भारतीय क्रिकेट में बीते कुछ वर्षों में जिस युवा बल्लेबाज़ ने अपनी आक्रामकता, निरंतरता और रिकॉर्डतोड़ पारियों से सबसे अधिक सुर्खियां बटोरी हैं, वह नाम है यशस्वी भूपेंद्र कुमार जायसवाल। बाएं हाथ का यह ओपनर आज तीनों फॉर्मेट में भारतीय टीम का अहम स्तंभ बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखते ही शतक से शुरुआत करने वाले जायसवाल ने न केवल अपनी प्रतिभा का परिचय दिया, बल्कि 2024 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में लगातार दो दोहरे शतक ठोककर खुद को विश्व क्रिकेट के शीर्ष बल्लेबाज़ों की श्रेणी में स्थापित कर दिया।

जायसवाल का यह सफर जितना चमकदार है, उतना ही संघर्षों से भरा हुआ भी रहा है। उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के एक साधारण परिवार में जन्मे इस खिलाड़ी ने मात्र 10 साल की उम्र में क्रिकेट का सपना लेकर मुंबई का रुख किया। वहां आजाद मैदान में अभ्यास के दौरान उन्होंने कभी डेयरी में काम किया तो कभी टेंट में रहकर गुजर-बसर की। हालात इतने कठिन थे कि उन्हें पेट भरने के लिए पानीपुरी तक बेचनी पड़ी, लेकिन उनके भीतर का क्रिकेटर लगातार निखरता रहा।

उनकी प्रतिभा को असली पहचान तब मिली जब कोच ज्वाला सिंह की नजर उन पर पड़ी और उन्होंने न केवल उन्हें प्रशिक्षण दिया बल्कि जीवन में स्थिरता भी दी। इसके बाद स्कूल क्रिकेट में 319 रन और 13 विकेट का अभूतपूर्व प्रदर्शन हो या अंडर-19 स्तर पर लगातार रन बनाना, जायसवाल ने हर मंच पर खुद को साबित किया। 2020 अंडर-19 विश्व कप में 400 से अधिक रन बनाकर ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ बनना उनके करियर का पहला बड़ा मोड़ साबित हुआ।

घरेलू क्रिकेट में मुंबई के लिए खेलते हुए उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी में 17 साल की उम्र में दोहरा शतक जड़कर इतिहास रचा और लिस्ट-ए क्रिकेट के सबसे युवा डबल सेंचुरियन बने। इसके बाद आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए उन्होंने 2023 सीजन में 625 रन बनाकर अपनी पहचान मजबूत की, जिसमें 13 गेंदों में अर्धशतक का रिकॉर्ड भी शामिल रहा। इसी प्रदर्शन ने उन्हें भारतीय टीम तक पहुंचाया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने जुलाई 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट डेब्यू में 171 रन की पारी खेलकर शानदार शुरुआत की। इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ 2024 की सीरीज में उन्होंने 700 से अधिक रन बनाए, जिसमें लगातार दो दोहरे शतक शामिल थे। वह टेस्ट इतिहास में सबसे कम उम्र में दो डबल सेंचुरी लगाने वाले तीसरे बल्लेबाज़ बने। इसी सीरीज में उन्होंने एक पारी में 12 छक्के लगाकर विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की और पूरी सीरीज में 20 छक्के लगाकर नया कीर्तिमान स्थापित किया।

जायसवाल की खासियत सिर्फ टेस्ट तक सीमित नहीं रही। टी20 अंतरराष्ट्रीय में उन्होंने नेपाल के खिलाफ शतक जड़ा, जबकि वनडे में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ नाबाद 116 रन बनाकर अपनी पहली सेंचुरी दर्ज की। खास बात यह रही कि उन्होंने वेस्टइंडीज, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड—तीनों देशों में अपने डेब्यू टेस्ट में शतक जड़कर एक अनोखा विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया। 2024-25 बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में 391 रन बनाकर वह भारत के सबसे सफल बल्लेबाज़ रहे।

आज यशस्वी जायसवाल सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि संघर्ष, धैर्य और प्रतिभा का प्रतीक बन चुके हैं। पानीपुरी बेचने से लेकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शिखर तक पहुंचने की उनकी कहानी भारतीय क्रिकेट के इतिहास में प्रेरणा का एक जीवंत उदाहरण बन गई है। यही वजह है कि 2025 में उन्हें टाइम मैगजीन की ‘टाइम 100 नेक्स्ट’ सूची में भी जगह मिली, जो उनके बढ़ते प्रभाव और वैश्विक पहचान का प्रमाण है।

Pratahkal Newsroom

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