शुभमन गिल की फॅमिली फोटो पर क्यों उठे सवाल? क्या है दादा-पोते के बिच का अंतर जिसने छेड़ा नया विवाद
भारतीय क्रिकेटर शुभमन गिल की पारिवारिक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सिख परंपराओं और पगड़ी को लेकर चर्चा तेज हो गई। तस्वीर में गिल और उनके पिता बिना पगड़ी के जबकि दादा पगड़ी में नजर आए, जिससे सिख पहचान और आधुनिक जीवनशैली में बदलाव को लेकर व्यापक बहस शुरू हो गई।

भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज़ शुभमन गिल की एक साधारण-सी पारिवारिक तस्वीर ने सोशल मीडिया पर सिख परंपराओं को लेकर बड़ी चर्चा को जन्म दे दिया है। हाल ही में साझा की गई इस तस्वीर में गिल अपने पैतृक गांव में परिवार के साथ दिखाई दे रहे हैं। तस्वीर में उनके दादा पगड़ी पहने हुए नज़र आते हैं, जबकि गिल और उनके पिता बिना पगड़ी के दिखते हैं। यही दृश्य इंटरनेट पर सवालों और बहस का कारण बन गया।
पैतृक गांव की यात्रा और वायरल हुई तस्वीर:
शुभमन गिल ने हाल ही में पंजाब स्थित अपने पैतृक गांव का दौरा किया था, जहां उन्होंने अपने दादा-दादी और अन्य परिवारजनों के साथ समय बिताया। इसी दौरान ली गई एक पारिवारिक तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। तस्वीर में एक ही परिवार के सदस्यों के अलग-अलग रूप दिखाई देने के कारण कई लोगों ने सिख परंपराओं को लेकर जिज्ञासा व्यक्त की।
कुछ सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने यह सवाल उठाया कि यदि गिल सिख परिवार से आते हैं तो वे पगड़ी क्यों नहीं पहनते। वहीं, कई लोगों ने यह भी पूछा कि क्या सभी सिख पुरुषों के लिए पगड़ी पहनना अनिवार्य होता है। इन सवालों ने सिख पहचान, धार्मिक आचरण और व्यक्तिगत चयन को लेकर एक व्यापक चर्चा को जन्म दिया।
I always thought every Sikh man had to wear a turban, but recently saw this image where Shubman Gill and his father don’t wear turbans, while his grandfather does
— Prayag (@theprayagtiwari) March 9, 2026
Just curious, why do some Sikh men stop wearing a turban? Is it allowed, or is it more of a personal choice? pic.twitter.com/cPxNKH5fQm
सिख परंपरा और विविधता:
सिख धर्म में पगड़ी और बिना कटे बाल (केश) धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक माने जाते हैं। विशेष रूप से अमृतधारी सिख, जिन्हें खालसा पंथ में दीक्षा प्राप्त होती है, वे धार्मिक नियमों का कड़ाई से पालन करते हैं और पगड़ी के साथ अपने बालों को बिना कटे रखते हैं।
हालांकि सिख समुदाय के भीतर आचरण और पहचान के कई रूप देखने को मिलते हैं, जिनमें प्रमुख रूप से निम्न श्रेणियां शामिल हैं:
- अमृतधारी सिख – खालसा दीक्षा लेने वाले सिख, जो पगड़ी और बिना कटे बाल सहित सभी धार्मिक मर्यादाओं का पालन करते हैं।
- केशधारी सिख – जो बाल लंबे रखते हैं, लेकिन हर समय पगड़ी पहनना अनिवार्य रूप से नहीं अपनाते।
- मोना सिख – वे सिख जो अपने बाल कटवाते हैं, लेकिन सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से सिख पहचान से जुड़े रहते हैं।
इसी विविधता के कारण कई परिवारों में अलग-अलग पीढ़ियों के बीच धार्मिक आचरण में भिन्नता देखी जा सकती है। यही कारण है कि गिल की तस्वीर में उनके दादा पगड़ी में दिखाई देते हैं, जबकि गिल और उनके पिता बिना पगड़ी के हैं।
आधुनिक दौर और व्यक्तिगत चयन:
आधुनिक समय में कई सिख परिवारों में धार्मिक पहचान को लेकर व्यक्तिगत चयन और जीवनशैली का प्रभाव भी देखने को मिलता है। क्रिकेट जगत में भी ऐसे कई उदाहरण हैं जहां खिलाड़ी सिख परिवारों से आते हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में पगड़ी नहीं पहनते। इनमें जसप्रीत बुमराह और युवराज सिंह जैसे नाम अक्सर चर्चा में आते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सिख धर्म का मूल संदेश बाहरी प्रतीकों के साथ-साथ आंतरिक आस्था और नैतिक जीवन पर भी समान रूप से जोर देता है। यही कारण है कि समुदाय के भीतर विभिन्न रूपों में धार्मिक पहचान देखने को मिलती है।
कई विश्लेषकों का यह भी कहना है कि समय के साथ सामाजिक और ऐतिहासिक परिस्थितियों ने भी सिख पहचान के बाहरी स्वरूप को प्रभावित किया है। विशेष रूप से 1984 के दंगों के बाद कई परिवारों में सुरक्षा और सामाजिक परिस्थितियों के कारण जीवनशैली में बदलाव देखने को मिला। हालांकि यह व्यक्तिगत और पारिवारिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
शुभमन गिल की पारिवारिक तस्वीर ने भले ही एक साधारण क्षण को कैद किया हो, लेकिन इसने सिख पहचान और परंपराओं की विविधता को लेकर एक महत्वपूर्ण चर्चा को जन्म दिया है। यह घटना इस बात को भी रेखांकित करती है कि आधुनिक समाज में धार्मिक पहचान केवल बाहरी प्रतीकों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि व्यक्तिगत आस्था, पारिवारिक परंपरा और सामाजिक परिवर्तनों के साथ विकसित होती रहती है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
