भारतीय क्रिकेट में बीते कुछ वर्षों में जिस खिलाड़ी ने अपनी शांत स्वभाव, किफायती गेंदबाजी और उपयोगी बल्लेबाजी से लगातार प्रभाव छोड़ा है, वह नाम है Washington Sundar। बाएं हाथ से बल्लेबाजी और दाएं हाथ की ऑफ-स्पिन गेंदबाजी करने वाले इस ऑलराउंडर ने टीम इंडिया के लिए तीनों प्रारूपों में अपनी अहमियत साबित की है। 2023 एशिया कप, 2025 चैंपियंस ट्रॉफी और 2026 टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहकर सुंदर ने खुद को बड़े मंच का खिलाड़ी सिद्ध किया है, जहां दबाव के बीच भी उनका प्रदर्शन स्थिर और प्रभावशाली बना रहता है।

5 अक्टूबर 1999 को चेन्नई में जन्मे सुंदर का क्रिकेट से रिश्ता बचपन से ही जुड़ गया था। उनके पिता मणि सुंदर खुद एक अच्छे क्लब क्रिकेटर रहे और परिवार का माहौल खेल के प्रति प्रेरित करने वाला था। महज चार-पांच साल की उम्र में बल्ला थामने वाले सुंदर शुरुआत में एक बल्लेबाज के रूप में जाने जाते थे, लेकिन समय के साथ उन्होंने अपनी ऑफ-स्पिन गेंदबाजी को इस स्तर तक निखारा कि वह टीम के प्रमुख स्पिन विकल्प बन गए। उनकी बहन शैलजा सुंदर भी पेशेवर क्रिकेटर हैं, जिसने इस खेल को उनके परिवार की पहचान बना दिया।

घरेलू क्रिकेट में तमिलनाडु के लिए 2016-17 रणजी ट्रॉफी से डेब्यू करने वाले सुंदर ने जल्द ही अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। 2017-18 रणजी सीजन में त्रिपुरा के खिलाफ अपना पहला प्रथम श्रेणी शतक जड़ते हुए उन्होंने यह साबित किया कि वह केवल गेंदबाज ही नहीं, बल्कि भरोसेमंद बल्लेबाज भी हैं। इससे पहले अंडर-19 विश्व कप 2016 में उनके प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा और उन्हें राष्ट्रीय टीम के दरवाजे तक पहुंचा दिया।

आईपीएल ने सुंदर के करियर को नई ऊंचाई दी, जब 2017 में राइजिंग पुणे सुपरजायंट्स ने उन्हें Ravichandran Ashwin के रिप्लेसमेंट के रूप में टीम में शामिल किया। अपने डेब्यू सीजन में ही उन्होंने मुंबई इंडियंस के खिलाफ क्वालिफायर-1 में 16 रन देकर 3 विकेट लेकर प्लेयर ऑफ द मैच का खिताब जीता, जिसने उन्हें रातोंरात सुर्खियों में ला दिया। इसके बाद रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और सनराइजर्स हैदराबाद के साथ उनका सफर जारी रहा, जहां उन्होंने पावरप्ले में किफायती गेंदबाजी कर कप्तानों का भरोसा जीता। 2025 में गुजरात टाइटंस द्वारा 3.2 करोड़ रुपये में खरीदे जाने के साथ उनका आईपीएल सफर एक नए अध्याय में प्रवेश कर गया।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सुंदर की एंट्री 2017 में श्रीलंका के खिलाफ हुई, जहां उन्होंने वनडे और टी20 दोनों प्रारूपों में डेब्यू किया। मात्र 18 साल 80 दिन की उम्र में टी20 अंतरराष्ट्रीय में डेब्यू करने वाले वह भारत के सबसे युवा खिलाड़ी बने। 2018 निदहास ट्रॉफी में उन्होंने 8 विकेट लेकर प्लेयर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार जीता और पावरप्ले में उनकी किफायती गेंदबाजी चर्चा का विषय बनी। हालांकि असली पहचान उन्हें 2020-21 ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गाबा टेस्ट में मिली, जहां नेट बॉलर के रूप में गए सुंदर ने मौका मिलने पर 62 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली और स्टीव स्मिथ का विकेट लेकर भारत की ऐतिहासिक जीत में योगदान दिया।

चोटों के कारण करियर में उतार-चढ़ाव देखने के बावजूद सुंदर ने 2024 में न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट में पहली बार 10 विकेट लेकर जोरदार वापसी की। इंग्लैंड के खिलाफ एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी में शतक और 2025 में इंग्लैंड दौरे पर मुश्किल परिस्थितियों में 53 रन की पारी ने उनकी बल्लेबाजी क्षमता को और मजबूत किया। एक बल्लेबाज से गेंदबाज और फिर पूर्ण ऑलराउंडर बनने तक का उनका सफर भारतीय क्रिकेट में धैर्य, संघर्ष और अवसर को भुनाने की मिसाल बन चुका है।

Pratahkal Newsroom

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