Aaron Ramsey retirement from professional football : फुटबॉल के मैदान पर अपनी जादुई मिडफील्डिंग और निर्णायक गोलों के लिए मशहूर वेल्स के महानतम खिलाड़ियों में से एक, एरॉन रैमसे ने प्रोफेशनल फुटबॉल से संन्यास की घोषणा कर खेल जगत को भावुक कर दिया है। मंगलवार को कार्डिफ से आई इस खबर ने न केवल वेल्स बल्कि आर्सेनल और वैश्विक फुटबॉल प्रशंसकों के बीच एक युग के अंत की पुष्टि कर दी। 35 वर्षीय रैमसे, जिन्होंने अपने देश के लिए 86 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 21 गोल दागे, एक ऐसे नायक के रूप में विदा हो रहे हैं जिन्होंने वेल्स को वैश्विक फुटबॉल मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाई। तीन बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले इस खिलाड़ी का सफर महज आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जुनून और नेतृत्व की एक बेमिसाल कहानी है।

रैमसे के करियर का सबसे सुनहरा अध्याय साल 2016 के यूरो कप में लिखा गया था, जहाँ उनके ऐतिहासिक प्रदर्शन के दम पर वेल्स ने सेमीफाइनल तक का सफर तय किया था। उनके इसी शानदार खेल की बदौलत उन्हें यूईएफए की 'टीम ऑफ द टूर्नामेंट' में शामिल किया गया था, जो किसी भी फुटबॉलर के लिए एक सर्वोच्च सम्मान है। अपने संन्यास की घोषणा करते हुए रैमसे ने बेहद भावुक शब्दों में कहा कि फुटबॉल को अलविदा कहना उनके लिए एक कठिन फैसला था, लेकिन काफी सोच-विचार के बाद उन्होंने यह कदम उठाया है। उन्होंने वेल्स की जर्सी पहनने को अपना सौभाग्य बताया और उन सभी प्रबंधकों व स्टाफ का आभार व्यक्त किया जिन्होंने उनके इस लंबे सफर में साथ दिया।

क्लब फुटबॉल की दुनिया में रैमसे का नाम 'आर्सेनल' के साथ अटूट रूप से जुड़ा रहेगा, जहाँ उन्होंने अपने जीवन के बेशकीमती 11 साल बिताए। इस क्लब के साथ उन्होंने तीन बार एफए कप का खिताब अपने नाम किया, जिसमें से दो फाइनल मुकाबलों में उन्होंने खुद विजयी गोल दागकर टीम को चैंपियन बनाया था। अपने विदाई संदेश में उन्होंने 'रेड वॉल' यानी अपने प्रशंसकों का विशेष जिक्र किया, जो हर उतार-चढ़ाव में उनके साथ चट्टान की तरह खड़े रहे। रैमसे ने अपनी पत्नी, बच्चों और परिवार को अपनी सफलता का सबसे बड़ा आधार बताते हुए उन सभी क्लबों का भी शुक्रिया अदा किया जिनके लिए उन्हें खेलने का मौका मिला।



35 की उम्र में फुटबॉल को अलविदा कहने वाले रैमसे पिछले कुछ समय से मैदान से दूर थे। मैक्सिकन क्लब 'पुमास' छोड़ने के बाद वह किसी नए क्लब से नहीं जुड़े और बोस्निया और हर्जेगोविना से मिली हार के बाद विश्व कप खेलने का उनका आखिरी सपना भी टूट गया था। एरॉन रैमसे का संन्यास केवल एक खिलाड़ी का हटना नहीं है, बल्कि उस प्रेरणा का विराम है जिसने वेल्स की एक पूरी पीढ़ी को फुटबॉल खेलने के लिए प्रेरित किया। उनके जाने से मैदान पर जो शून्यता पैदा हुई है, उसे भरना आसान नहीं होगा, लेकिन उनकी विरासत आने वाले कई वर्षों तक युवा खिलाड़ियों का मार्गदर्शन करती रहेगी।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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