ICC हॉल ऑफ फेम में शामिल है इनका नाम ; 109वीं जयंती पर जानिए कौन थे विनू मांकड़
विनू मांकड़ की 109वीं जयंती पर जानिए भारतीय क्रिकेट के इस महान ऑलराउंडर की कहानी, जिन्होंने अपने रिकॉर्ड, ऐतिहासिक साझेदारी और “मांकड़िंग” जैसे विवादित फैसले से खेल के इतिहास में अमिट छाप छोड़ी।

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी विनू मांकड़
भारतीय क्रिकेट इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज नाम विनू मांकड़ आज भी उतनी ही गरिमा और सम्मान के साथ लिया जाता है, जितना उनके खेल के दिनों में लिया जाता था। वर्ष 2026 में उनकी 109वीं जयंती के अवसर पर देश एक ऐसे दिग्गज को याद कर रहा है, जिसने न केवल अपने प्रदर्शन से बल्कि अपने सिद्धांतों से भी क्रिकेट को नई दिशा दी।
12 अप्रैल 1917 को गुजरात के जामनगर में जन्मे विनू मांकड़ ने अपने करियर की शुरुआत एक साधारण खिलाड़ी के रूप में की, लेकिन जल्द ही वे भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे भरोसेमंद ऑलराउंडरों में शामिल हो गए। उन्होंने 1946 से 1959 के बीच भारत के लिए 44 टेस्ट मैच खेले, जिसमें 2109 रन और 162 विकेट लेकर उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया। उनकी बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों ही क्षेत्रों में समान दक्षता ने उन्हें उस दौर के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में स्थापित किया।
मांकड़ का नाम विशेष रूप से 1956 में न्यूजीलैंड के खिलाफ बनाए गए 413 रनों की ऐतिहासिक ओपनिंग साझेदारी के लिए जाना जाता है, जो उन्होंने पंकज रॉय के साथ मिलकर बनाई थी। यह रिकॉर्ड 52 वर्षों तक अटूट रहा और भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक मील का पत्थर बना।
उनका करियर केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा। 1947-48 के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान उन्होंने एक ऐसी घटना को जन्म दिया, जिसने क्रिकेट की नैतिकता और नियमों पर वैश्विक बहस छेड़ दी। उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज बिल ब्राउन को नॉन-स्ट्राइकर एंड पर रन आउट किया, जिसे बाद में “मांकड़िंग” के नाम से जाना जाने लगा। इस विवादित लेकिन नियमों के अनुरूप कार्रवाई का समर्थन स्वयं महान बल्लेबाज डॉन ब्रैडमैन ने किया, जिन्होंने इसे खेल के नियमों के तहत पूरी तरह वैध बताया।
मांकड़ का योगदान केवल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक सीमित नहीं था। उन्होंने घरेलू और काउंटी क्रिकेट में भी अपनी छाप छोड़ी। 1952 में लॉर्ड्स के मैदान पर उनका प्रदर्शन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा, जहां उन्होंने एक ही टेस्ट में शतक और पांच विकेट लेकर भारतीय क्रिकेट की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई दी।
उनकी उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार ने 1973 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। इसके अलावा, बीसीसीआई द्वारा आयोजित अंडर-19 टूर्नामेंट “विनू मांकड़ ट्रॉफी” उनके सम्मान में ही शुरू की गई। 2021 में उन्हें आईसीसी क्रिकेट हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया, जो उनके वैश्विक प्रभाव का प्रमाण है।
विनू मांकड़ का जीवन और करियर इस बात का उदाहरण है कि अनुशासन, प्रतिभा और साहस से कैसे खेल की सीमाओं को पार किया जा सकता है। उनकी 109वीं जयंती केवल एक स्मरण नहीं, बल्कि उस विरासत का उत्सव है, जिसने भारतीय क्रिकेट को विश्व मंच पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
