Football Racism Statistics 2026 : फुटबॉल की दुनिया जिसे अक्सर 'खूबसूरत खेल' कहा जाता है, साल 2026 में भी एक घिनौने सच से जूझ रही है। रियल मैड्रिड के स्टार फॉरवर्ड विनीसियस जूनियर एक बार फिर नस्लवाद के उसी पुराने और जहरीले चक्र में फंस गए हैं। चैंपियंस लीग प्लेऑफ के एक हाई-प्रोफाइल मुकाबले के दौरान बेनफिका के 20 वर्षीय अर्जेंटीना विंगर जियानलुका प्रेस्टियानी द्वारा कथित तौर पर विनीसियस को "बंदर" कहना महज एक खिलाड़ी की निजी अभद्रता नहीं, बल्कि एक गहरी सांस्कृतिक जड़ता का संकेत है।

मैदान पर घृणा का प्रदर्शन :

विनीसियस जूनियर के लिए यह अनुभव नया नहीं है, लेकिन इसकी पुनरावृत्ति डरावनी है। ला लीगा के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, रियल मैड्रिड में अपने आठ साल के कार्यकाल के दौरान ब्राजीलियाई स्टार को कम से कम 26 बार नस्लीय दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा है। मंगलवार की रात जब विनीसियस ने विजयी गोल दागकर जश्न मनाया, तब प्रेस्टियानी की ओर से आए अपशब्दों ने खेल की गरिमा को तार-तार कर दिया। यह हमला केवल खेल के जोश में दिया गया अपशब्द नहीं था, बल्कि एक अन्य जातीय समूह को नीचा दिखाकर नस्लीय श्रेष्ठता स्थापित करने का प्रयास था।



अर्जेंटीना: नस्लवाद का पुराना और विवादित इतिहास :

यह घटना किसी वैक्यूम में नहीं हुई है। अर्जेंटीना के खिलाड़ी और प्रशंसक लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ऐसी घटनाओं के लिए दोषी पाए जाते रहे हैं। 2024 कोपा अमेरिका फाइनल के बाद अर्जेंटीना की राष्ट्रीय टीम द्वारा फ्रांसीसी खिलाड़ियों की विरासत पर अपमानजनक गीत गाना हो, या 2025 में विश्व कप क्वालीफायर के दौरान छह राष्ट्रीय संघों के साथ नस्लीय दुर्व्यवहार का दोषी पाया जाना—अर्जेंटीना का ट्रैक रिकॉर्ड चिंताजनक रहा है।

अर्जेंटीना में अफ्रीकी मूल की जनसंख्या का ऐतिहासिक पतन :

कालखंड

अफ्रीकी मूल की जनसंख्या (%)

सामाजिक स्थिति/धारणा

19वीं सदी (स्वतंत्रता काल)

लगभग 15%

महत्वपूर्ण सामाजिक उपस्थिति

2022 (जनगणना आंकड़े)

1% से भी कम

लगभग अदृश्य उपस्थिति

वर्तमान धारणा

0% (दावा)

'पूर्णतः यूरोपीय समाज' का मिथक

'श्वेत समाज' की चाहत और सांस्कृतिक मिथक :

ब्यूनस आयर्स विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पाब्लो अलाबार्सेस के अनुसार, अर्जेंटीना के लोग एक ऐसे मिथक में जी रहे हैं जहाँ वे खुद को दक्षिण अमेरिका के 'यूरोपीय श्वेत' मानते हैं। यहाँ 'अश्वेत' शब्द को नस्ल के बजाय वर्ग (गरीबी) से जोड़कर देखा जाता है, जिससे समाज में यह गलतफहमी पैदा हो गई है कि वे नस्लवादी हो ही नहीं सकते। 19वीं सदी में 15% रहने वाली अश्वेत आबादी का आज 1% से भी कम रह जाना उन ऐतिहासिक प्रयासों की ओर इशारा करता है, जिन्होंने समाज को 'श्वेत' दिखाने के लिए अश्वेत पहचान को हाशिए पर धकेल दिया। "अर्जेंटीना में यह माना जाता है कि 'काले लोग हैं ही नहीं', इसलिए हम नस्लवादी नहीं हो सकते। वहां 'काला' शब्द केवल गरीबी का प्रतीक बन गया है।" - प्रोफेसर पाब्लो अलाबार्सेस



Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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