भारतीय क्रिकेट के उभरते चेहरों में शुमार विक्की ओस्तवाल आज उस मुकाम पर खड़े हैं, जहां उनकी काबिलियत और निरंतरता उन्हें भविष्य का भरोसेमंद स्पिनर बनाती नजर आती है। बाएं हाथ के इस धीमे ऑर्थोडॉक्स स्पिनर ने सीमित अवसरों के बावजूद अपनी गेंदबाजी की सटीकता और नियंत्रण से खास पहचान बनाई है। खासकर टी20 प्रारूप में उनका इकॉनमी रेट 6.50 से नीचे रहना यह दर्शाता है कि वह मध्य ओवरों में रन रोकने की कला में कितने माहिर हैं। यही कारण है कि आईपीएल 2026 की नीलामी में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने उन्हें उनके बेस प्राइस 30 लाख रुपये में अपने साथ जोड़ा।

लोनावला जैसे छोटे शहर से निकलकर क्रिकेट की बड़ी दुनिया तक पहुंचने का उनका सफर संघर्ष और समर्पण की मिसाल है। शुरुआती दिनों में बेहतर प्रशिक्षण के लिए उन्हें लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। उन्होंने मुंबई जाकर वेंगसरकर क्रिकेट अकादमी में ट्रेनिंग ली, जिसके बाद उन्होंने महाराष्ट्र क्रिकेट को अपना आधार बनाया। रोजाना पुणे तक सफर कर अपने खेल को निखारना उनके जुनून को दर्शाता है, जिसने उनके करियर की मजबूत नींव रखी।

राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान तब बनी जब उन्होंने आईसीसी अंडर-19 वर्ल्ड कप 2022 में भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई। इस टूर्नामेंट में उन्होंने छह मैचों में 12 विकेट लेकर टीम के सबसे सफल गेंदबाज का खिताब हासिल किया। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 5/28 का उनका प्रदर्शन टूर्नामेंट के सबसे यादगार स्पेल्स में गिना गया। इस शानदार प्रदर्शन ने उन्हें सीधे घरेलू क्रिकेट के बड़े मंच पर पहुंचा दिया।

रणजी ट्रॉफी में महाराष्ट्र की ओर से खेलते हुए उन्होंने धीरे-धीरे खुद को रेड-बॉल क्रिकेट के अनुरूप ढाला। शुरुआत में चुनौतियों का सामना करने के बाद उन्होंने अपनी गेंदबाजी में विविधता और धैर्य जोड़ा, जिससे वह एक अधिक परिपक्व गेंदबाज बनकर उभरे। उनके करियर का एक बड़ा मोड़ 2024-25 के सीके नायडू ट्रॉफी सीजन में आया, जहां उन्होंने 69 विकेट लेकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इस प्रदर्शन के चलते उन्हें 2026 के बीसीसीआई अवॉर्ड्स में भी सम्मानित किया गया।

आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स के साथ तीन सीजन बिताने के बावजूद उन्हें प्लेइंग इलेवन में ज्यादा मौके नहीं मिले, लेकिन उन्होंने इस दौरान सीनियर खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ से सीखने का कोई मौका नहीं छोड़ा। यही अनुभव उनके खेल में निखार लाने का कारण बना। साथ ही, उन्होंने अपनी बल्लेबाजी पर भी काम किया और निचले क्रम में उपयोगी योगदान देने की क्षमता विकसित की, जिससे वह एक संभावित ऑलराउंडर के रूप में उभर रहे हैं।

आज विक्की ओस्तवाल सिर्फ एक उभरते हुए स्पिनर नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के भविष्य की एक मजबूत कड़ी माने जा रहे हैं। उनकी अनुशासित गेंदबाजी, विविधता और निरंतर सुधार की भूख उन्हें आने वाले वर्षों में भारतीय टीम के दरवाजे तक ले जा सकती है।

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Pratahkal Newsroom

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