भारतीय क्रिकेट में इन दिनों जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है वैभव सूर्यवंशी। महज 14 साल की उम्र में उन्होंने इंडियन प्रीमियर लीग जैसे बड़े मंच पर जिस तरह से अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से पहचान बनाई है, उसने उन्हें रातों-रात सुर्खियों में ला दिया। राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए उन्होंने 38 गेंदों में 101 रनों की पारी खेलकर न केवल आईपीएल इतिहास के सबसे कम उम्र के शतकवीर बनने का रिकॉर्ड बनाया, बल्कि 35 गेंदों में शतक पूरा कर भारतीय खिलाड़ियों में सबसे तेज शतक का कीर्तिमान भी अपने नाम कर लिया। यह पारी इस बात का संकेत थी कि भारतीय क्रिकेट को एक नया सुपरस्टार मिल चुका है।

बिहार के समस्तीपुर जिले के ताजपुर जैसे छोटे से कस्बे से निकलकर वैश्विक मंच तक पहुंचने का उनका सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। 27 मार्च 2011 को जन्मे वैभव के पिता संजीव सूर्यवंशी स्वयं क्रिकेटर बनना चाहते थे और उन्होंने अपने बेटे के सपने को साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मात्र चार साल की उम्र में क्रिकेट की शुरुआत करने वाले वैभव को आठ साल की उम्र में पटना की एक क्रिकेट अकादमी में दाखिला दिलाया गया, जहां तक पहुंचने के लिए उन्हें लगभग 100 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था। उनकी प्रतिभा को बचपन से ही पहचान लिया गया था और कोच उन्हें तेज सीखने वाला खिलाड़ी मानते थे।

किशोर उम्र में ही उन्होंने बड़े स्तर पर अपनी छाप छोड़नी शुरू कर दी थी। 12 साल की उम्र में ही उन्होंने बिहार की अंडर-19 टीम के लिए वीनू मांकड़ ट्रॉफी खेली और इसके बाद भारत बी अंडर-19 टीम के लिए खेलते हुए छह पारियों में 177 रन बनाए। सितंबर 2024 में ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 के खिलाफ अपने डेब्यू टेस्ट में उन्होंने 58 गेंदों में शतक जड़कर इतिहास रच दिया, जो किसी भारतीय अंडर-19 खिलाड़ी का सबसे तेज शतक था। इसके बाद एशिया कप और अन्य टूर्नामेंटों में उन्होंने लगातार अर्धशतक और तेज पारियां खेलकर अपनी आक्रामक शैली को साबित किया।

घरेलू क्रिकेट में भी वैभव का प्रदर्शन उतना ही शानदार रहा। जनवरी 2024 में उन्होंने महज 12 साल और 284 दिन की उम्र में रणजी ट्रॉफी में डेब्यू किया और आधुनिक दौर के सबसे युवा प्रथम श्रेणी खिलाड़ी बन गए। इसके बाद उन्होंने टी20 और लिस्ट ए क्रिकेट में भी सबसे कम उम्र में डेब्यू करने का रिकॉर्ड अपने नाम किया। विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ 36 गेंदों में शतक और 84 गेंदों में 190 रनों की विस्फोटक पारी खेलते हुए उन्होंने लिस्ट ए क्रिकेट में सबसे तेज 150 का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया, जो पहले एबी डिविलियर्स के नाम था।

फ्रेंचाइजी क्रिकेट में उनका उदय किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा। 13 साल की उम्र में 1.1 करोड़ रुपये में राजस्थान रॉयल्स द्वारा खरीदे जाने के साथ ही वे आईपीएल इतिहास के सबसे युवा खिलाड़ी बने। 2025 सीजन में उन्होंने 7 मैचों में 252 रन बनाते हुए 206.56 की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की, जिसमें उनका आक्रामक अंदाज साफ झलकता है। इसके अलावा, अंडर-19 विश्व कप 2026 के फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 80 गेंदों में 175 रनों की ऐतिहासिक पारी खेलकर उन्होंने भारत को जीत दिलाई और प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बने।

हालांकि उनकी उम्र को लेकर विवाद भी सामने आए, लेकिन बीसीसीआई द्वारा कराए गए बोन टेस्ट और उनके परिवार के दावों ने उनकी आधिकारिक उम्र को सही ठहराया। इतनी कम उम्र में उनकी ताकतवर बल्लेबाजी ने कई पूर्व खिलाड़ियों को हैरान किया, लेकिन उनके प्रदर्शन ने हर सवाल का जवाब मैदान पर ही दिया है। वर्ष 2025 में उन्हें प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया, जो उनके असाधारण योगदान का प्रमाण है। आज वैभव सूर्यवंशी न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के लिए उम्मीद की नई किरण बन चुके हैं, जिनकी बल्लेबाजी में भविष्य का भारतीय क्रिकेट चमकता नजर आता है।

Pratahkal Newsroom

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