उनकी प्रतिभा पहली बार बड़े स्तर पर तब सामने आई जब उन्होंने 2024 के विजय हजारे ट्रॉफी में अपने लिस्ट-ए डेब्यू मैच में ही 78 गेंदों पर 114 रन ठोक दिए। त्रिपुरा के खिलाफ खेली गई यह पारी उन्हें उन चुनिंदा खिलाड़ियों की सूची में ले आई, जिन्होंने अपने पहले ही मैच में शतक जड़ा। इसके बाद 2025 में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के जरिए उन्होंने टी20 क्रिकेट में कदम रखा और लगातार अपनी पहचान मजबूत की।

हालांकि, उनका असली विस्फोट दिल्ली प्रीमियर लीग में देखने को मिला, जहां उन्होंने साउथ दिल्ली सुपरस्टार्ज के लिए खेलते हुए 10 पारियों में 339 रन बनाए और उनका स्ट्राइक रेट 190.44 रहा। इस दौरान उन्होंने 29 छक्के जड़कर टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले खिलाड़ियों में खुद को शामिल किया। एक बारिश से प्रभावित मैच में 21 गेंदों पर 69 रन की तूफानी पारी, जिसमें महज 12 गेंदों पर अर्धशतक शामिल था, ने उन्हें रातोंरात चर्चा का केंद्र बना दिया।

दहिया का सफर हालांकि आसान नहीं रहा। दिल्ली के उम्र-समूह क्रिकेट में शुरुआती संघर्ष के बाद उन्होंने कूच बिहार ट्रॉफी में लगातार दो शतक जड़कर खुद को साबित किया। यह प्रदर्शन उनके आत्मविश्वास के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ और यहीं से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनकी विकेटकीपिंग भी उतनी ही तेज और सटीक है, जितनी उनकी बल्लेबाजी आक्रामक।

आज तेजस्वी सिंह दहिया उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो निडर क्रिकेट खेलने में विश्वास रखती है। आईपीएल जैसे बड़े मंच पर उनका चयन यह संकेत देता है कि आने वाले समय में भारतीय क्रिकेट को एक और विस्फोटक मैच विनर मिल सकता है। उनकी कहानी केवल प्रतिभा की नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, आक्रामकता और मौके को भुनाने की मिसाल है।

Pratahkal Newsroom

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