भारतीय क्रिकेट में जब भी डेथ ओवर्स में सटीक यॉर्कर की बात होती है, तो टी. नटराजन का नाम सबसे पहले उभरकर सामने आता है। अपनी धारदार गेंदबाजी और दबाव भरे पलों में बेहतरीन नियंत्रण के दम पर उन्होंने खुद को आधुनिक दौर के सबसे भरोसेमंद बाएं हाथ के तेज गेंदबाजों में स्थापित किया है। इंडियन प्रीमियर लीग में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ऐतिहासिक शुरुआत ने उन्हें रातों-रात सुर्खियों में ला दिया, लेकिन इस चमक के पीछे संघर्ष और धैर्य की लंबी कहानी छिपी है।

तमिलनाडु के सेलम जिले के छोटे से गांव चिन्नप्पमपट्टी में जन्मे नटराजन का शुरुआती जीवन बेहद साधारण रहा। उनके पिता पावरलूम में बुनकर थे और मां सड़क किनारे खाने का छोटा सा स्टॉल चलाती थीं। पांच भाई-बहनों में सबसे बड़े नटराजन ने आर्थिक तंगी के बीच क्रिकेट के अपने सपने को जिंदा रखा। बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के टेनिस बॉल से खेलते हुए उन्होंने अपनी प्राकृतिक गेंदबाजी प्रतिभा को निखारा। स्थानीय कोच जयप्रकाश की नजर उन पर पड़ी और यहीं से उनके जीवन ने नई दिशा पकड़ी, जब वे चेन्नई जाकर तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन लीग में खेलने लगे।

घरेलू क्रिकेट में 2014-15 रणजी ट्रॉफी से पहला कदम रखने वाले नटराजन ने धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई। हालांकि उनके करियर में एक समय ऐसा भी आया जब संदिग्ध गेंदबाजी एक्शन के कारण उन्हें झटका लगा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने एक्शन को सुधारकर दमदार वापसी की। 2017 में पंजाब किंग्स ने उन्हें 3 करोड़ रुपये में खरीदा, जो उनके करियर का पहला बड़ा मोड़ साबित हुआ। इसके बाद सनराइजर्स हैदराबाद के साथ जुड़कर 2020 के सीजन में उन्होंने अपनी यॉर्कर गेंदबाजी से बल्लेबाजों को परेशान करते हुए खुद को एक मैच विनर के रूप में स्थापित किया।

नटराजन की असली पहचान 2020-21 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर बनी, जहां उन्होंने इतिहास रचते हुए एक ही दौरे पर टेस्ट, वनडे और टी20—तीनों फॉर्मेट में डेब्यू किया, जो भारतीय क्रिकेट में बेहद दुर्लभ उपलब्धि है। टी20 अंतरराष्ट्रीय में अपने पहले मैच में 3/30 के आंकड़े के साथ उन्होंने अपनी उपयोगिता साबित की, जबकि टेस्ट डेब्यू में अहम विकेट लेकर टीम की ऐतिहासिक जीत में योगदान दिया। इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ निर्णायक मुकाबलों में उनकी किफायती गेंदबाजी ने भारत को सीरीज जिताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, खासकर आखिरी ओवरों में उनका नियंत्रण चर्चा का विषय बना।

हालांकि चोटों ने उनके करियर की रफ्तार को कई बार धीमा किया, लेकिन हर बार उन्होंने वापसी कर अपनी उपयोगिता साबित की। 2022 आईपीएल में 11 मैचों में 18 विकेट लेकर वे अपनी टीम के दूसरे सबसे सफल गेंदबाज बने। 2025 आईपीएल नीलामी में दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें 10.75 करोड़ रुपये में खरीदा, जो उनके मूल्य और काबिलियत का बड़ा प्रमाण था। हालांकि उस सीजन में चोट के कारण वे केवल दो मैच ही खेल सके, लेकिन टीम प्रबंधन ने उन्हें भविष्य की योजना का अहम हिस्सा माना।

क्रिकेट के मैदान के बाहर भी नटराजन ने अपनी जड़ों को नहीं भुलाया। उन्होंने अपने गांव में क्रिकेट अकादमी स्थापित कर युवाओं को मुफ्त प्रशिक्षण देना शुरू किया, जिससे वे आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन गए हैं। एक साधारण परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुंचने का उनका सफर इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा, मेहनत और अवसर का सही मेल किसी भी खिलाड़ी को शिखर तक पहुंचा सकता है।

Pratahkal Newsroom

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