सूरजपुर की बेटियों ने फुटबॉल के मैदान में गाड़ा झंडा; सरगुजा ओलंपिक में जीता गोल्ड मेडल
छत्तीसगढ़ के मानपुर गांव की बेटियों ने सरगुजा ओलंपिक फुटबॉल में गोल्ड जीतकर रचा इतिहास। संसाधनों की कमी के बावजूद रेशमी और टीम ने बढ़ाया प्रदेश का मान।

Chhattisgarh Junior Football
Chhattisgarh Junior Football : छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग की धरती से एक ऐसी गौरवगाथा सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे फौलादी हों, तो संसाधनों की कमी कभी सफलता की राह में रोड़ा नहीं बन सकती। सूरजपुर जिले के एक छोटे से गांव 'मानपुर' की बेटियों ने सरगुजा ओलंपिक में अपने अद्भुत खेल कौशल का प्रदर्शन करते हुए जूनियर फुटबॉल प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। यह जीत केवल एक पदक भर नहीं है, बल्कि उन रूढ़ियों और बाधाओं पर भी एक करारी चोट है जो अक्सर ग्रामीण प्रतिभाओं का रास्ता रोकती हैं।
इन बेटियों का सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। मानपुर गांव की ये खिलाड़ी रोजाना सुख-सुविधाओं के अभाव और परिवहन की चुनौतियों से जूझती हैं। नियमित अभ्यास के लिए इन छात्राओं को करीब 30 से 35 किलोमीटर की लंबी और थका देने वाली दूरी तय करनी पड़ती है। लेकिन मैदान पर उतरते ही उनकी थकान जुनून में बदल जाती है। इसी समर्पण का नतीजा रहा कि सरगुजा ओलंपिक के कड़े मुकाबलों में उन्होंने बड़ी से बड़ी टीमों को धूल चटाकर स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया।
कड़ी मेहनत और गुरु का मार्गदर्शन बना जीत का मंत्र :
टीम की स्टार खिलाड़ी रेशमी ने अपनी इस सफलता का राज टीमवर्क और अनुशासन को बताया है। उन्होंने साझा किया कि मैदान पर खिलाड़ियों के बीच का बेहतर तालमेल और जीत का अटूट आत्मविश्वास ही उन्हें पोडियम के शीर्ष तक ले गया। रेशमी ने अपनी इस उपलब्धि का पूरा श्रेय कोच सुशील खाखा को दिया है। उनके मुताबिक, कोच के रणनीतिक मार्गदर्शन और निरंतर प्रोत्साहन ने ही एक सामान्य टीम को 'चैंपियन' में तब्दील कर दिया।
इस टीम की एक खास बात यह भी है कि इसमें शासकीय विद्यालय मानपुर की प्राथमिक, माध्यमिक और हाई स्कूल की कुल 11 छात्राएं शामिल हैं। हेडमास्टर असगर अंसारी ने बताया कि ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली इन बच्चियों ने न केवल विद्यालय, बल्कि पूरे सूरजपुर जिले का मान बढ़ाया है। उनकी जीत इस बात की मिसाल है कि प्रतिभा किसी महानगर की चकाचौंध की मोहताज नहीं होती।
सम्मान और भविष्य की राह :
प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली इस जांबाज टीम को गोल्ड मेडल के साथ 10,000 रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया गया है। आधिकारिक प्रक्रिया के तहत यह राशि सीधे खिलाड़ियों के बैंक खातों में जमा की जाएगी, जो उनके खेल किट और भविष्य के अभ्यास में सहायक सिद्ध होगी।
यह जीत छत्तीसगढ़ के खेल जगत के लिए एक बड़ा संकेत है। मानपुर की इन 11 बेटियों ने दिखा दिया है कि यदि उन्हें सही मंच और अवसर मिले, तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तिरंगा लहराने का माद्दा रखती हैं। गांव की गलियों से निकलकर गोल्ड मेडल तक पहुंचने का यह सफर प्रदेश की हजारों अन्य लड़कियों के लिए प्रेरणा का नया स्रोत बन गया है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
