डब्ल्यूएफआई की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए नोटिस जारी किया, मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 1 जून को निर्धारित की गई।

Supreme Court Vinesh Phogat : भारतीय कुश्ती जगत और खेल गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। स्टार इंडियन फ्रीस्टाइल रेसलर विनेश फोगाट को आगामी एशियाई खेलों के चयन ट्रायल में शामिल होने की अनुमति मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए विनेश को एक बड़ी फौरी राहत दी है। हालांकि, देश की शीर्ष अदालत ने इस राहत के साथ-साथ विनेश फोगाट की मांगों और खेल संघ के नियमों को लेकर कई गंभीर सवाल भी खड़े किए हैं। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि विनेश कोई साधारण एथलीट नहीं हैं, उन्होंने देश के लिए कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन जब बात नियमों की आती है तो देश और उसकी खेल व्यवस्था सबसे पहले आती है।

यह पूरा विवाद तब सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुंचा जब रेस्लिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया यानी डब्ल्यूएफआई ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी, जिसमें विनेश को एशियाई खेल 2026 के सेलेक्शन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति दी गई थी। शुक्रवार, 29 मई 2026 को इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ने कहा कि चूंकि ट्रायल अगले ही दिन यानी 30 और 31 मई को होने हैं, इसलिए अदालत खिलाड़ी के करियर को देखते हुए उन्हें रोकना नहीं चाहती। कोर्ट ने साफ किया कि वह विनेश को ट्रायल में उतरने की इजाजत तो दे रहे हैं, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश को लेकर उनके मन में कई गंभीर सवाल हैं, जिनका जवाब विनेश और उनके कानूनी दल को देना होगा। अब इस पूरे मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 1 जून को मुकर्रर की गई है।

अदालत के भीतर जिरह के दौरान भावुक और तार्किक दलीलें देखने को मिलीं। विनेश फोगाट की महिला वकील ने कोर्ट से बेहद भावुक अपील करते हुए कहा कि उनकी मुवक्किल सिर्फ ट्रायल में हिस्सा लेने की मांग कर रही हैं। उन्होंने अदालत को याद दिलाया कि करीब सालभर पहले मां बनी एक महिला खिलाड़ी सिर्फ देश के लिए खेलने का एक मौका मांग रही है और इसके लिए उसे ट्रायल में बैठने की अनुमति मिलनी चाहिए। इस मानवीय और भावुक दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा लेकिन व्यावहारिक रुख अपनाया। कोर्ट ने विनेश के पिछले कुछ समय के घटनाक्रमों पर उंगली उठाते हुए पूछा कि 14 दिसंबर 2024 को ब्रेक लेने और फिर मातृत्व अवकाश के बाद उन्होंने तय प्रक्रिया के तहत डोपिंग टेस्ट में हिस्सा क्यों नहीं लिया। इतना ही नहीं, खिलाड़ी की उपलब्धता से जुड़ी 'व्हेयरअबाउट्स' की जानकारी भी समय पर नहीं दी गई। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि बाद में स्पष्टीकरण में यह कहा गया कि विनेश विधानसभा की कार्यवाही में व्यस्त थीं, जो कि खेल नियमों के दायरे में स्वीकार्य नहीं पाया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने खेल की वैश्विक गरिमा और नियमों की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि फरवरी 2026 में ही एशियन गेम्स से जुड़ी आधिकारिक प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। नियमों के मुताबिक इसके लिए पहले चार प्रमुख खेलों में भाग लेना अनिवार्य था, जिसे विनेश फोगाट ने पूरा नहीं किया। इसके बाद खिलाड़ी ने मई के महीने में अचानक सक्रियता दिखाते हुए सीधे अदालत का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट की इस बात पर भी हैरानी जताई जिसने खेल संघ के नियमों को 'एक्सक्लूजनरी' यानी बाहर करने वाला करार दे दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि खेल संघ के नियम काफी समय से लागू हैं और देश के हर खिलाड़ी पर समान रूप से लागू होते हैं। भारतीय खेल व्यवस्था पूरी तरह से विश्व खेल महासंघों से जुड़ी हुई है, इसलिए किसी एक खिलाड़ी के लिए स्थापित अंतरराष्ट्रीय मापदंडों और राष्ट्रीय चयन प्रक्रियाओं से समझौता नहीं किया जा सकता।

यह घटनाक्रम भारतीय खेल इतिहास में एक बेहद महत्वपूर्ण मोड़ साबित होने वाला है। एक तरफ जहां विनेश फोगाट जैसी दिग्गज पहलवान के पास 30 और 31 मई को मैट पर उतरकर खुद को साबित करने का आखिरी मौका होगा, वहीं दूसरी तरफ 1 जून को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई यह तय करेगी कि भविष्य में भारतीय खेलों में नियम और अनुशासन का क्या स्थान रहेगा। यह मामला यह भी साफ करता है कि अतीत की उपलब्धियां कितनी भी शानदार क्यों न हों, जब बात वैश्विक पटल पर देश के प्रतिनिधित्व की आती है, तो स्थापित नियमों और प्रक्रियाओं की कसौटी से किसी भी खिलाड़ी को छूट नहीं दी जा सकती।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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