पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने अपने 54वें जन्मदिन के अवसर पर आईसीसी हॉल ऑफ फेम में शामिल होने की बड़ी खबर साझा की है। गांगुली ने इस विशेष सम्मान के लिए आईसीसी और चेयरमैन जय शाह का आभार व्यक्त किया है। हालांकि, आईसीसी की ओर से हॉल ऑफ फेम में शामिल किए गए नए नामों को लेकर अभी आधिकारिक सार्वजनिक घोषणा की जानी बाकी है। आईसीसी के पात्रता नियमों के अनुसार, किसी भी खिलाड़ी को उनके अंतिम अंतरराष्ट्रीय मैच के पांच साल बाद ही इस सूची में शामिल होने के लिए विचार किया जाता है।

sourav-ganguly-icc-hall-of-fame-inclusionसोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए गांगुली ने महान खिलाड़ियों के साथ इस सूची का हिस्सा बनने पर खुशी जताई। उन्होंने अपने संदेश में लिखा कि आईसीसी और चेयरमैन जय शाह द्वारा उन्हें हॉल ऑफ फेम में शामिल किया जाना एक बड़ा सम्मान है। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए गर्व की बात है कि वह इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल होने वाले 10 भारतीय खिलाड़ियों में से एक बन गए हैं।

पूर्व भारतीय सुपरस्टार युवराज सिंह ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से गांगुली को बधाई दी। युवराज ने इस सम्मान को पूरी तरह से हकदार बताया और गांगुली की कप्तानी शैली की सराहना की। उन्होंने कहा कि दादा ने न केवल एक टीम बनाई, बल्कि क्रिकेटरों की एक पूरी पीढ़ी में विश्वास पैदा किया। उनके नेतृत्व में खेलकर बनाई गई यादें जीवनभर साथ रहेंगी। इसके अलावा सचिन तेंदुलकर ने भी इस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए गांगुली को हॉल ऑफ फेम में शामिल होने पर बधाई दी।

सौरव गांगुली ने भारतीय क्रिकेट में नेतृत्व को एक नई परिभाषा दी। उन्होंने ऐसे कठिन समय में टीम की कमान संभाली जब भारतीय क्रिकेट चुनौतियों का सामना कर रहा था। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने टीम की मानसिकता को बदलते हुए आक्रामकता, आत्मविश्वास और विदेशी धरती पर जीतने की क्षमता को विकसित किया। अपने शानदार करियर के दौरान गांगुली ने 424 मैचों में 38 शतकों और 107 अर्धशतकों की मदद से 18,575 अंतरराष्ट्रीय रन बनाए। उन्होंने 113 टेस्ट मैचों में 7,212 रन और 311 वनडे मैचों में 11,363 रन बनाकर खुद को भारत के महानतम बल्लेबाजों में स्थापित किया।

कप्तान के रूप में गांगुली ने 196 अंतरराष्ट्रीय मैचों में भारत का नेतृत्व किया और 97 जीत हासिल की। उनके कार्यकाल में 2001 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में स्टीव वॉ की ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ प्रसिद्ध जीत, 2004 में पाकिस्तान में भारत की पहली टेस्ट सीरीज जीत और 2000 आईसीसी नॉकआउट ट्रॉफी तथा 2003 आईसीसी क्रिकेट विश्व कप के फाइनल में पहुंचना शामिल है। गांगुली ने महेंद्र सिंह धोनी, युवराज सिंह, हरभजन सिंह, जहीर खान, इरफान पठान, गौतम गंभीर और वीरेंद्र सहवाग जैसी युवा प्रतिभाओं पर भरोसा जताया, जो आगे चलकर मैच विजेता बने। गांगुली ने एक दशक से अधिक के करियर के बाद नवंबर 2008 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था।

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Pratahkal Newsroom

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