घरेलू क्रिकेट के रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन से लेकर टीम इंडिया के उपकप्तान और आईपीएल के सफल कप्तान बनने की पूरी कहानी।

भारतीय क्रिकेट में पिछले कुछ वर्षों में अगर किसी बल्लेबाज़ ने अपनी तकनीक, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता से खास पहचान बनाई है, तो वह नाम है श्रेयस अय्यर। सीमित ओवरों में टीम इंडिया के भरोसेमंद मध्यक्रम बल्लेबाज़ और उपकप्तान के रूप में अय्यर ने खुद को एक मैच विनर के रूप में स्थापित किया है। 2023 वनडे विश्व कप में सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ शतक और पूरे टूर्नामेंट में निर्णायक पारियों ने उन्हें बड़े मंच का खिलाड़ी साबित किया, वहीं 2025 आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी और एशिया कप 2023 जैसी सफलताओं में भी उनका योगदान अहम रहा।

6 दिसंबर 1994 को मुंबई के चेंबूर में जन्मे श्रेयस अय्यर का क्रिकेट सफर शहर के प्रसिद्ध शिवाजी पार्क से शुरू हुआ, जहां कोच प्रवीण आमरे की नजर उन पर पड़ी। बचपन से ही आक्रामक बल्लेबाज़ी शैली और बेखौफ अंदाज के कारण उनकी तुलना वीरेंद्र सहवाग से की जाने लगी। अंडर-19 विश्व कप 2014 में भारत का प्रतिनिधित्व करने के बाद उन्होंने घरेलू क्रिकेट में ऐसा प्रदर्शन किया जिसने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा। 2014-15 रणजी ट्रॉफी सीजन में 809 रन और अगले ही सीजन में 1321 रन बनाकर वह पूरे टूर्नामेंट के शीर्ष स्कोरर बने, जिसने उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की नींव रखी।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 2017 में डेब्यू करने वाले अय्यर ने धीरे-धीरे खुद को भारत की लिमिटेड ओवर टीम का स्थायी सदस्य बना लिया। 2020 में न्यूजीलैंड के खिलाफ अपना पहला वनडे शतक जड़ने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अब तक वह वनडे क्रिकेट में 2400 से अधिक रन 47 से ज्यादा के औसत से बना चुके हैं, जिसमें पांच शतक और 18 अर्धशतक शामिल हैं। टेस्ट क्रिकेट में 2021 में न्यूजीलैंड के खिलाफ डेब्यू मैच में ही पहली पारी में शतक और दूसरी में अर्धशतक लगाकर उन्होंने इतिहास रच दिया, ऐसा करने वाले वह पहले भारतीय बल्लेबाज़ बने। टी20 अंतरराष्ट्रीय में भी उन्होंने लगातार तीन अर्धशतकों के साथ 204 रन बनाकर नया रिकॉर्ड कायम किया।

इंडियन प्रीमियर लीग में भी श्रेयस अय्यर की कहानी उतनी ही प्रभावशाली रही है। 2015 में दिल्ली फ्रेंचाइजी से शुरुआत करते हुए उन्होंने अपने पहले ही सीजन में 439 रन बनाकर ‘इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द ईयर’ का खिताब जीता। 2018 में मात्र 23 साल की उम्र में टीम की कप्तानी संभालकर उन्होंने अपनी नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया और 2020 में दिल्ली को पहली बार फाइनल तक पहुंचाया। इसके बाद कोलकाता टीम की कप्तानी करते हुए 2024 में उन्हें खिताब दिलाया, जिससे वह दो अलग-अलग टीमों को फाइनल तक पहुंचाने वाले पहले कप्तान बने। 2025 में पंजाब किंग्स ने उन्हें 26.75 करोड़ रुपये में खरीदकर कप्तानी सौंपी, जहां उन्होंने टीम को लंबे समय बाद फाइनल तक पहुंचाया।

हालांकि अय्यर का करियर पूरी तरह आसान नहीं रहा। पीठ और कंधे की चोटों ने कई बार उनके खेल को रोका, यहां तक कि 2024 में उन्हें बीसीसीआई का केंद्रीय अनुबंध भी गंवाना पड़ा। लेकिन रणजी ट्रॉफी में वापसी कर मुंबई को खिताब दिलाना और फिर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करना उनके जुझारू स्वभाव को दर्शाता है। यही कारण है कि आज वह न सिर्फ एक भरोसेमंद बल्लेबाज़ बल्कि एक प्रेरणादायक लीडर के रूप में भी देखे जाते हैं।

आज श्रेयस अय्यर भारतीय क्रिकेट के उस दौर का प्रतिनिधित्व करते हैं जहां तकनीक और आक्रामकता का संतुलन देखने को मिलता है। कवर ड्राइव की खूबसूरती, स्पिन के खिलाफ उनकी महारत और दबाव में खेलने की क्षमता उन्हें आधुनिक क्रिकेट का एक संपूर्ण बल्लेबाज़ बनाती है। मुंबई के मैदानों से उठकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का उनका सफर इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा के साथ अगर निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास हो, तो सफलता तय है।

Pratahkal Newsroom

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