बांग्लादेश में हिंदुओं पर जुल्म देख शिखर धवन ने उठाई आवाज ; क्या अब भारत सरकार लेगी बड़ा एक्शन?
बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों ने गंभीर चिंता पैदा की है। झिनैदह जिले में हिंदू विधवा पर हमले, व्यापारियों की हत्या और दर्जनों घटनाओं के बीच शिखर धवन की प्रतिक्रिया और सरकार पर कार्रवाई का दबाव तेज हुआ है।

शिखर धवन
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हाल के महीनों में सामने आए हिंसक घटनाक्रम ने न केवल देश के भीतर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गंभीर चिंता पैदा कर दी है। दिसंबर 2024 के अंत और जनवरी 2025 की शुरुआत में हुई कई घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि राजनीतिक अस्थिरता के बीच धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा एक बड़े सवाल के रूप में उभर रही है। इसी क्रम में भारतीय क्रिकेटर शिखर धवन द्वारा सार्वजनिक रूप से की गई कड़ी प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे को और अधिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
Heartbreaking to read about the brutal assault on a Hindu widow in Bangladesh. Such violence against anyone, anywhere is unacceptable. Prayers for justice and support for the survivor. 🙏
— Shikhar Dhawan (@SDhawan25) January 7, 2026
30 दिसंबर को बांग्लादेश के झिनैदह जिले के कालिगंज इलाके में एक हिंदू विधवा महिला पर कथित तौर पर हमला किया गया। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, महिला के साथ मारपीट की गई और उसके घर में तोड़फोड़ की गई। घटना की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है और मामले की जांच जारी है। प्रशासन का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह मामला सांप्रदायिक तनाव से जुड़ा प्रतीत होता है, हालांकि सभी पहलुओं की गहराई से पड़ताल की जा रही है।
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए शिखर धवन ने सोशल मीडिया के माध्यम से चिंता व्यक्त की और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनकी प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ कई अन्य हिंसक घटनाएं भी सामने आई हैं। 5 जनवरी को दो हिंदू व्यापारियों की हत्या की खबर ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। इसके अलावा, एक युवक के भीड़ से बचने की कोशिश में डूबने से मौत की सूचना है, जिसने माहौल को और तनावपूर्ण कर दिया।
रिपोर्टों के मुताबिक, केवल दिसंबर 2024 में ही बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर 51 हमलों की पुष्टि हुई है। इन घटनाओं में घरों और दुकानों में तोड़फोड़, शारीरिक हिंसा और धमकियों के मामले शामिल हैं। हालांकि, कुछ दावों की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हो पाई है, जिससे अफवाहों और अपुष्ट सूचनाओं के कारण स्थिति और जटिल होती जा रही है।
इन घटनाओं के बाद बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई यूनिटी काउंसिल ने सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। संगठन का कहना है कि आगामी चुनावों से पहले अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि भय और असुरक्षा के माहौल में मतदान प्रक्रिया प्रभावित न हो। काउंसिल ने दोषियों के खिलाफ त्वरित कानूनी कार्रवाई और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की है।
सरकारी स्तर पर, बांग्लादेशी प्रशासन ने यह आश्वासन दिया है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों को सतर्क किया गया है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सांप्रदायिक हिंसा को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों को कानून के अनुसार सजा दी जाएगी।
बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे इन हमलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राजनीतिक संक्रमण के दौर में सामाजिक सौहार्द और अल्पसंख्यक अधिकारों की रक्षा एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं और आंतरिक दबाव के बीच आने वाले दिनों में सरकार की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी, क्योंकि यह न केवल बांग्लादेश की आंतरिक स्थिरता बल्कि क्षेत्रीय छवि के लिए भी निर्णायक साबित हो सकती है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
