कौन हैं शाहबाज अहमद? संघर्ष, साहस और ऑलराउंड प्रदर्शन से चमका सितारा
इंजीनियरिंग छोड़कर क्रिकेट में पहचान बनाने वाले शाहबाज अहमद के घरेलू क्रिकेट, आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय करियर का विस्तृत विवरण।

आईपीएल के दौरान सनराइजर्स हैदराबाद की ओर से खेलते हुए विकेट लेने का जश्न मनाते ऑलराउंडर शाहबाज अहमद।
भारतीय क्रिकेट में पिछले कुछ वर्षों में जिन ऑलराउंडरों ने अपनी अलग पहचान बनाई है, उनमें शाहबाज अहमद का नाम तेजी से उभरा है। बाएं हाथ से बल्लेबाजी और धीमी बाएं हाथ की स्पिन गेंदबाजी के दम पर उन्होंने घरेलू क्रिकेट से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक अपनी उपयोगिता साबित की है। भारतीय टीम के लिए सीमित अवसरों में भी प्रभाव छोड़ने वाले शाहबाज 2022 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे, जिसने उनके करियर को एक नई ऊंचाई दी और उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई।
हरियाणा के नूंह जिले में 11 दिसंबर 1994 को जन्मे शाहबाज की कहानी संघर्ष और साहस से भरी है। एक साधारण परिवार से आने वाले इस खिलाड़ी ने पढ़ाई में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, लेकिन क्रिकेट के प्रति जुनून ने उन्हें इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में छोड़ने का कठिन फैसला लेने पर मजबूर कर दिया। कोलकाता जाकर छोटे कमरे में साथियों के साथ रहना और गुजारा करने के लिए बर्तन तक धोना, उनके संघर्ष की गहराई को दर्शाता है। इसी शहर में कोच पार्थ प्रतिम चौधरी के मार्गदर्शन और बाद में मनोज तिवारी व अरुण लाल जैसे दिग्गजों के सहयोग ने उनके करियर को दिशा दी।
घरेलू क्रिकेट में शाहबाज ने बंगाल के लिए खेलते हुए खुद को एक भरोसेमंद ऑलराउंडर के रूप में स्थापित किया। 2018-19 विजय हजारे ट्रॉफी में लिस्ट ए डेब्यू के साथ शुरू हुआ सफर जल्द ही रणजी ट्रॉफी और टी20 क्रिकेट तक पहुंचा। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उन्होंने 1800 से अधिक रन बनाते हुए 43 से ऊपर की औसत कायम की, जिसमें 116 का सर्वोच्च स्कोर शामिल है, जबकि गेंदबाजी में 100 से अधिक विकेट लेकर अपनी उपयोगिता साबित की। उनकी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी 7/57 रही, जो उनके मैच विनिंग क्षमता को दर्शाती है। जनवरी 2021 में रणजी ट्रॉफी में हैट्रिक लेने वाले वे बंगाल के सातवें खिलाड़ी बने, जिसने उन्हें सुर्खियों में ला दिया।
लिस्ट ए और टी20 क्रिकेट में भी शाहबाज का प्रदर्शन लगातार प्रभावशाली रहा है। लिस्ट ए में उन्होंने 1000 से अधिक रन और 50 से ज्यादा विकेट लेकर संतुलित ऑलराउंड प्रदर्शन दिखाया, जबकि टी20 में उनकी किफायती गेंदबाजी और निचले क्रम में तेज रन बनाने की क्षमता टीम के लिए फायदेमंद रही। 2023 विजय हजारे ट्रॉफी में शतक और अहम विकेट लेने के साथ-साथ 2024 सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में शतक जड़कर उन्होंने खुद को दबाव में प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया।
इंडियन प्रीमियर लीग में भी शाहबाज अहमद का सफर उल्लेखनीय रहा है। 2020 में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर से जुड़ने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे अपनी जगह बनाई और 2021 सीजन में एक ही ओवर में तीन विकेट लेकर सुर्खियां बटोरीं। 2024 सीजन में राजस्थान के खिलाफ 3/23 का प्रदर्शन उनकी क्षमता का प्रमाण बना। आईपीएल में 500 से अधिक रन और 20 से ज्यादा विकेट उनके संतुलित योगदान को दर्शाते हैं। बाद में सनराइजर्स हैदराबाद और फिर लखनऊ सुपर जायंट्स से जुड़कर उन्होंने अपनी भूमिका को और मजबूत किया।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनका डेब्यू 2022 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे मैच से हुआ, जबकि 2023 में बांग्लादेश के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय में उन्होंने पहला मैच खेला। सीमित अवसरों के बावजूद उनकी उपयोगिता को देखते हुए चयनकर्ताओं का भरोसा उन पर लगातार बना रहा है। एक संघर्षशील युवा से लेकर भारतीय टीम के भरोसेमंद ऑलराउंडर बनने तक का सफर शाहबाज अहमद की मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास की कहानी है, जो आने वाले समय में उन्हें भारतीय क्रिकेट का अहम चेहरा बना सकती है।

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