FCON Trophy Controversy : फुटबॉल की दुनिया में एक अभूतपूर्व और सनसनीखेज घटनाक्रम के तहत, सेनेगल की राष्ट्रीय टीम ने अफ्रीका कप ऑफ नेशंस (AFCON) का खिताब आधिकारिक तौर पर छीने जाने के बावजूद पेरिस के प्रतिष्ठित 'स्टाडे डी फ्रांस' में ट्रॉफी का सार्वजनिक प्रदर्शन किया। पेरू के खिलाफ एक मैत्रीपूर्ण मुकाबले से ठीक पहले, सेनेगल के खिलाड़ियों ने हजारों प्रशंसकों की मौजूदगी में उस ट्रॉफी को लहराया, जिसे अफ्रीकी फुटबॉल महासंघ (CAF) ने कुछ ही घंटे पहले मोरक्को को सौंपने का निर्णय सुनाया था। यह घटना न केवल खेल के मैदान पर एक बड़ा विद्रोह है, बल्कि इसने अफ्रीका के दो दिग्गज फुटबॉल राष्ट्रों के बीच एक गंभीर कूटनीतिक और कानूनी विवाद को जन्म दे दिया है।

इस विवाद की जड़ें जनवरी में खेले गए एक विवादास्पद फाइनल में छिपी हैं। उस मैच के दौरान मोरक्को को दी गई एक पेनल्टी के विरोध में सेनेगल के खिलाड़ी मैदान छोड़कर बाहर चले गए थे। हालांकि वे 14 मिनट बाद वापस लौटे और अतिरिक्त समय में पापे गुये के गोल की बदौलत सेनेगल ने 1-0 से जीत दर्ज की, लेकिन मोरक्को ने इस आचरण के खिलाफ अपील दायर की थी। शनिवार को मैच शुरू होने से कुछ समय पहले, CAF की अपील समिति ने अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए सेनेगल की जीत को रद्द कर दिया और नियम उल्लंघन के आधार पर मोरक्को को 3-0 से विजेता घोषित कर दिया।

CAF के इस फैसले की परवाह न करते हुए, सेनेगल के कप्तान कालिदू कौलिबली और स्टार गोलकीपर एडुआर्ड मेंडी ने सुपरस्टार यूसू एन'डोर के संगीत कार्यक्रम के बाद मैदान पर ट्रॉफी के साथ मार्च किया। लगभग 70,000 दर्शकों की भीड़ के सामने खिलाड़ियों ने ट्रॉफी को सेनेगल फुटबॉल महासंघ के अध्यक्ष अब्दौले फॉल के सामने प्रस्तुत किया। स्टेडियम के बाहर भी माहौल बेहद भावुक और उग्र था, जहाँ नवनिर्वाचित मेयर बैली बागायोको के नेतृत्व में सैकड़ों समर्थकों ने पारंपरिक ढोल-नगाड़ों के साथ जुलूस निकाला और सेनेगल के प्रति अपनी एकजुटता प्रकट की।

कानूनी और आधिकारिक मोर्चे पर, यह लड़ाई अब और तेज होने वाली है। सेनेगल सरकार ने इस पूरे मामले की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है और CAF के फैसले के पीछे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। सेनेगल फुटबॉल महासंघ ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस फैसले को 'कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट' (CAS) में चुनौती देंगे, जहाँ अंतिम निर्णय आने में एक साल तक का समय लग सकता है।

यह मैच विश्व कप की तैयारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण था, जहाँ सेनेगल को फ्रांस और नॉर्वे जैसी टीमों के साथ एक ही समूह में रखा गया है। हालांकि, फुटबॉल के विशेषज्ञों का मानना है कि मैदान के बाहर चल रहा यह 'ट्रॉफी विवाद' खिलाड़ियों के मनोबल और अफ्रीकी फुटबॉल की छवि पर गहरा असर डाल सकता है। फिलहाल, सेनेगल ने झुकने से इनकार कर दिया है, जिससे यह स्पष्ट है कि AFCON का यह खिताब अब फुटबॉल की पिचों से निकलकर अदालतों की फाइलों में अपनी अगली जंग लड़ेगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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