कौन हैं Sanju Samson? टी20 विश्व कप 2026 के हीरो से ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ बनने तक का सफर
केरल के विकेटकीपर-बल्लेबाज़ संजू सैमसन के शुरुआती संघर्ष, घरेलू क्रिकेट रिकॉर्ड और भारतीय टीम के लिए विश्व कप 2026 में निभायी गई ऐतिहासिक भूमिका का विवरण।

इंडियन प्रीमियर लीग के एक मुकाबले के दौरान बल्लेबाजी के बाद दर्शकों का अभिवादन स्वीकार करते संजू सैमसन; उन्होंने साल 2026 के टी20 विश्व कप में भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई।
भारतीय क्रिकेट के आधुनिक दौर में जिस खिलाड़ी ने अपनी विस्फोटक बल्लेबाज़ी और निर्णायक मौकों पर मैच पलटने की क्षमता से नई पहचान बनाई है, वह नाम है संजू सैमसन। 2026 के टी20 विश्व कप में उन्होंने जिस अंदाज़ में वेस्टइंडीज़ के खिलाफ 50 गेंदों पर नाबाद 97 रन, इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में 42 गेंदों पर 89 और फाइनल में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ 46 गेंदों पर 89 रन ठोके, उसने उन्हें न केवल भारत की जीत का नायक बनाया बल्कि ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ का खिताब भी दिलाया। महज़ पांच मैचों में 321 रन बनाकर उन्होंने साबित किया कि बड़े मंच पर दबाव उनके खेल को और निखार देता है।
11 नवंबर 1994 को केरल के तिरुवनंतपुरम के पास पुलुविला गांव में जन्मे सैमसन का शुरुआती जीवन संघर्षों से भरा रहा। उनके पिता, जो दिल्ली पुलिस में कॉन्स्टेबल और एक फुटबॉल खिलाड़ी रह चुके थे, ने बेटे के क्रिकेट करियर के लिए नौकरी तक छोड़ दी और परिवार को दिल्ली से केरल ले आए। दिल्ली के जीटीबी नगर की पुलिस कॉलोनी से लेकर तिरुवनंतपुरम के मैदानों तक का यह सफर आसान नहीं था, लेकिन इसी ने सैमसन के भीतर वह जज़्बा पैदा किया जिसने उन्हें कम उम्र में ही केरल की अंडर-13 और अंडर-16 टीमों का कप्तान बना दिया। अंडर-13 स्तर पर 973 रन और 108.11 की औसत के साथ ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ बनना उनके उभरते सितारे की पहली झलक थी।
घरेलू क्रिकेट में उनकी प्रतिभा जल्दी ही सामने आ गई। 14 साल की उम्र में रणजी ट्रॉफी टीम में जगह बनाना और 2011 में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में डेब्यू करना उनके करियर की बड़ी उपलब्धि थी। 2013-14 रणजी सीजन में 530 रन और 58.88 की औसत के साथ केरल के शीर्ष स्कोरर बनना, साथ ही असम के खिलाफ 211 रनों की पारी खेलना, उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ले आया। 2019-20 विजय हजारे ट्रॉफी में गोवा के खिलाफ 129 गेंदों पर नाबाद 212 रन की पारी, जो लिस्ट-ए क्रिकेट में भारत के सबसे तेज दोहरे शतकों में से एक है, ने उन्हें एक बार फिर सुर्खियों में ला खड़ा किया और चार साल बाद भारतीय टीम में वापसी का रास्ता खोला।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सैमसन का सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा। 2015 में जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 डेब्यू करने के बाद उन्हें लंबे समय तक निरंतर मौके नहीं मिले, लेकिन 2022 के बाद उनका बल्ला लगातार बोलने लगा। आयरलैंड के खिलाफ 42 गेंदों पर 77 रन की पारी, वेस्टइंडीज़ और जिम्बाब्वे दौरों पर निर्णायक योगदान, और 2023 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 114 गेंदों पर 108 रन की मैच जिताऊ पारी ने उन्हें वनडे और टी20 दोनों प्रारूपों में मजबूत दावेदार बना दिया। 2024 में बांग्लादेश के खिलाफ 47 गेंदों पर 111 रन की तूफानी पारी और दक्षिण अफ्रीका में लगातार दो टी20 शतक लगाकर उन्होंने रिकॉर्ड बुक में अपना नाम दर्ज कराया, जहां वह एक कैलेंडर वर्ष में तीन टी20 अंतरराष्ट्रीय शतक लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज़ बने।
आईपीएल में भी सैमसन का सफर उतना ही प्रभावशाली रहा है। 2013 में राजस्थान रॉयल्स के लिए डेब्यू करते हुए ‘इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द ईयर’ जीतना, 2017 में पहला आईपीएल शतक, और कप्तान के रूप में टीम को फाइनल तक पहुंचाना उनके नेतृत्व कौशल को दर्शाता है। 2024 सीजन में 531 रन बनाकर उन्होंने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया, जबकि 2025 में चेन्नई सुपर किंग्स में ट्रेड होकर उन्होंने एक नई शुरुआत की। उनकी बल्लेबाज़ी शैली, जिसमें तेज़ हाथ, शानदार टाइमिंग और बिना ज्यादा फुटवर्क के बड़े शॉट खेलने की क्षमता शामिल है, उन्हें आधुनिक क्रिकेट के सबसे खतरनाक बल्लेबाज़ों में शुमार करती है।
संजू सैमसन की कहानी सिर्फ प्रतिभा की नहीं, बल्कि धैर्य, संघर्ष और मौके मिलने पर उसे भुनाने की है। जूनियर क्रिकेट से लेकर विश्व कप के मंच तक, उन्होंने हर स्तर पर खुद को साबित किया है। लगातार अस्थिरता और आलोचनाओं के बावजूद जिस तरह उन्होंने वापसी की और 2026 में भारत को विश्व कप जिताने में केंद्रीय भूमिका निभाई, वह उन्हें भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रेरक चेहरों में शामिल करता है।

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