क्या साक्षी चौधरी बनेंगी नई बॉक्सिंग क्वीन? जानें विश्व चैंपियन मीनाक्षी को धूल चटाकर कैसे किया एशियन गेम्स का टिकट पक्का
मुक्केबाज साक्षी चौधरी ने चयन ट्रायल में विश्व चैंपियन मीनाक्षी हुड्डा और निकहत जरीन को हराकर राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों के लिए क्वालीफाई किया।

पटियाला के एनएसएनआईएस में आयोजित चयन प्रतियोगिता के दौरान रिंग में मुक्केबाजी का प्रदर्शन करतीं साक्षी चौधरी।
Sakshi Chaudhary wins 51kg boxing trials : भारतीय महिला मुक्केबाजी के इतिहास में शुक्रवार का दिन एक बड़े फेरबदल और नई उम्मीदों के उदय का गवाह बना। पटियाला स्थित नेताजी सुभाष राष्ट्रीय खेल संस्थान (NSNIS) में आयोजित राष्ट्रीय मुक्केबाजी चयन प्रतियोगिता के दौरान हरियाणा की उभरती हुई मुक्केबाज साक्षी चौधरी ने रिंग में वह कर दिखाया, जिसकी कल्पना बड़े-बड़े विशेषज्ञों ने भी नहीं की थी। साक्षी ने महिलाओं के 51 किलोग्राम भारवर्ग के फाइनल में मौजूदा विश्व और एशियाई चैंपियन मीनाक्षी हुड्डा को एकतरफा मुकाबले में मात देकर इस वर्ष होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों के लिए अपना स्थान सुरक्षित कर लिया है। इस जीत के साथ ही साक्षी ने न केवल पदक की दावेदारी पेश की है, बल्कि मुक्केबाजी की दुनिया में अपनी बादशाहत का शंखनाद भी कर दिया है।
साक्षी चौधरी की इस स्वर्णिम यात्रा की शुरुआत सेमीफाइनल से ही हो गई थी, जहां उन्होंने दो बार की विश्व चैंपियन निकहत जरीन को हराकर इस दशक का सबसे बड़ा उलटफेर किया। निकहत जरीन, जो मंगोलिया में हुई एशियाई चैंपियनशिप के सेमीफाइनल में हारने के बाद सीधे प्रवेश से चूक गई थीं, उन्हें चयन प्रतियोगिता की अग्निपरीक्षा से गुजरना पड़ा, जहां साक्षी के सटीक मुक्कों ने उन्हें चयन की दौड़ से बाहर कर दिया। वहीं दूसरी ओर, मीनाक्षी हुड्डा ने भी पूर्व विश्व चैंपियन नीतू घंघास को हराकर फाइनल में जगह बनाई थी, लेकिन खिताबी मुकाबले में वह साक्षी की फुर्ती और तकनीक का सामना नहीं कर सकीं। दिलचस्प बात यह है कि साक्षी ने इस प्रतियोगिता के लिए अपना वजन वर्ग 54 किलोग्राम से घटाकर 51 किलोग्राम किया था, जो उनके लिए बेहद लकी साबित हुआ।
चयन प्रक्रिया के तकनीकी और आधिकारिक परिणामों पर नजर डालें तो इस बार 51 किलोग्राम वर्ग में भारत को एक बिल्कुल नया चेहरा मिलेगा। साक्षी चौधरी के साथ-साथ सचिन सिवाच, प्रीति पवार और प्रिया घंघास ने भी एशियाई चैंपियनशिप के फाइनल में पहुँचने के आधार पर राष्ट्रमंडल खेल और एशियाई खेल दोनों के लिए सीधे क्वालीफाई कर लिया है। इसके अतिरिक्त, जैस्मिन लाम्बोरिया और अरुंधति चौधरी ने केवल राष्ट्रमंडल खेलों के लिए अपनी जगह पक्की की है, क्योंकि उनके संबंधित वजन वर्ग एशियाई खेलों के कार्यक्रम का हिस्सा नहीं हैं। भारतीय मुक्केबाजी महासंघ ने स्पष्ट किया है कि यह चयन पूरी तरह से योग्यता और हालिया प्रदर्शन के मानदंडों पर आधारित है ताकि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की पदक तालिका को और समृद्ध किया जा सके।
अब भारतीय मुक्केबाजी प्रेमियों की नजरें वैश्विक मंचों पर टिकी हैं, जहां ये मुक्केबाज तिरंगे का गौरव बढ़ाएंगे। राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन 23 जुलाई से 2 अगस्त तक स्कॉटलैंड के ग्लासगो में होना है, जिसके तुरंत बाद 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक जापान के आइची-नागोया में एशियाई खेलों का महाकुंभ सजेगा। साक्षी चौधरी द्वारा दिग्गजों के वर्चस्व को चुनौती देकर हासिल किया गया यह मुकाम भारतीय खेलों में एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है। यह देखना रोमांचक होगा कि पटियाला की रिंग में दिग्गजों को पस्त करने वाली साक्षी क्या ग्लासगो और जापान की धरती पर भी स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच पाएंगी।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
