कौन हैं ऋषभ पंत? विस्फोटक बल्लेबाज़ी और जज़्बे से क्रिकेट जगत पर राज करने वाला सितारा
ऋषभ पंत 2025 आईपीएल ऑक्शन में 27 करोड़ की रिकॉर्ड बोली के साथ सबसे महंगे खिलाड़ी बने, साथ ही वे लखनऊ सुपर जायंट्स की कप्तानी और टीम इंडिया में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

लखनऊ सुपर जायंट्स के कप्तान ऋषभ पंत आईपीएल 2025 के लिए मैदान पर रणनीति तैयार करते हुए; पंत इस सीजन के सबसे महंगे खिलाड़ी के रूप में टीम का नेतृत्व कर रहे हैं।
भारतीय क्रिकेट में अगर मौजूदा दौर के सबसे प्रभावशाली विकेटकीपर-बल्लेबाज़ों की बात होती है, तो ऋषभ पंत का नाम सबसे आगे नजर आता है। टेस्ट क्रिकेट में टीम इंडिया के उपकप्तान और आईपीएल में लखनऊ सुपर जायंट्स के कप्तान के रूप में पंत ने अपनी आक्रामक बल्लेबाज़ी और बेखौफ अंदाज़ से एक अलग पहचान बनाई है। साल 2025 के आईपीएल ऑक्शन में 27 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड बोली ने उन्हें इतिहास का सबसे महंगा खिलाड़ी बना दिया, जो उनके बढ़ते कद और प्रभाव का प्रमाण है। 2024 टी20 विश्व कप और 2025 चैंपियंस ट्रॉफी जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अहमियत साबित की।
हरिद्वार में जन्मे ऋषभ पंत का सफर संघर्ष और समर्पण की कहानी है। महज 12 साल की उम्र में अपनी मां के साथ दिल्ली जाकर ट्रेनिंग लेना और गुरुद्वारे में रहकर अभ्यास करना उनके जुनून को दर्शाता है। कोच तारक सिन्हा के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी बल्लेबाज़ी तकनीक में बदलाव किया, जिसका असर जल्द ही दिखने लगा। अंडर-19 क्रिकेट में असम के खिलाफ 150 रनों की पारी और 2016 अंडर-19 विश्व कप में नेपाल के खिलाफ 18 गेंदों में अर्धशतक ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया। यही वह दौर था जब पंत ने खुद को भविष्य के सितारे के रूप में स्थापित करना शुरू किया।
घरेलू क्रिकेट में पंत का प्रदर्शन असाधारण रहा। 2016-17 रणजी ट्रॉफी में महाराष्ट्र के खिलाफ 308 रनों की पारी खेलकर वह सबसे कम उम्र में तिहरा शतक लगाने वाले भारतीय खिलाड़ियों में शामिल हो गए। इसी सीजन में झारखंड के खिलाफ महज 48 गेंदों में शतक ठोककर उन्होंने अपनी विस्फोटक क्षमता का परिचय दिया। टी20 क्रिकेट में भी उन्होंने 32 गेंदों में शतक जड़कर रिकॉर्ड बनाए। आईपीएल 2018 में सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ नाबाद 128 रनों की पारी उस समय किसी भारतीय का सर्वोच्च स्कोर था, जिसने उन्हें वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पंत ने 2017 में टी20, 2018 में टेस्ट और वनडे डेब्यू किया और कुछ ही समय में अपनी छाप छोड़ दी। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट शतक लगाकर उन्होंने विदेशी सरजमीं पर अपनी काबिलियत साबित की। 2018-19 ऑस्ट्रेलिया दौरे पर एक टेस्ट में 11 कैच लेने और सिडनी में शतक जड़ने जैसे कारनामों ने उन्हें खास बना दिया। हालांकि 2019-20 में खराब फॉर्म और आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा, लेकिन 2021 में गाबा टेस्ट में 89 रनों की नाबाद पारी खेलकर भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाते हुए उन्होंने दमदार वापसी की और खुद को मैच विनर के रूप में स्थापित किया।
पंत का करियर 2022 में एक भयानक कार दुर्घटना से लगभग पटरी से उतर गया था, जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आईं। लंबे समय तक क्रिकेट से दूर रहने के बाद 2024 में उनकी वापसी किसी प्रेरणादायक कहानी से कम नहीं रही। वापसी के बाद उन्होंने न सिर्फ टीम में जगह बनाई बल्कि 2025 में इंग्लैंड में एक टेस्ट मैच की दोनों पारियों में शतक जड़कर इतिहास रच दिया। वह ऐसा करने वाले पहले भारतीय विकेटकीपर बने और सबसे तेज 3000 टेस्ट रन पूरे करने वाले भारतीय विकेटकीपर भी बने।
आज ऋषभ पंत सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास और आक्रामक क्रिकेट का प्रतीक बन चुके हैं। उनकी बल्लेबाज़ी शैली, मुश्किल हालात में मैच जिताने की क्षमता और नेतृत्व कौशल ने उन्हें भारतीय क्रिकेट का अहम स्तंभ बना दिया है। शुरुआती संघर्षों से लेकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में चमकने तक का उनका सफर यह बताता है कि प्रतिभा के साथ अगर जज़्बा हो, तो कोई भी बाधा सफलता की राह में रुकावट नहीं बन सकती।

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