विश्व क्रिकेट के क्षितिज पर रिकी थॉमस पोंटिंग एक ऐसे नाम के रूप में उभरे, जिन्होंने न केवल अपनी बल्लेबाजी से खौफ पैदा किया, बल्कि अपनी कप्तानी से एक अविजित साम्राज्य की स्थापना की। वर्तमान में एक प्रतिष्ठित कोच और कमेंटेटर की भूमिका निभा रहे पोंटिंग को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट इतिहास का सबसे सफल कप्तान माना जाता है, जिनके नेतृत्व में ऑस्ट्रेलिया ने 324 मैचों में से 220 में जीत दर्ज की। 67.91% का यह शानदार जीत प्रतिशत उनकी रणनीतिक कुशलता का प्रमाण है। सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक शतकों का रिकॉर्ड आज भी उनके नाम दर्ज है। उनके करियर का सबसे स्वर्णिम अध्याय आईसीसी टूर्नामेंटों में उनकी सफलता रही, जहाँ उन्होंने कप्तान के रूप में 2003 और 2007 के विश्व कप सहित 2006 और 2009 की चैंपियंस ट्रॉफी जीतकर ऑस्ट्रेलिया को निर्विवाद विश्व विजेता बनाया।

तस्मानिया के लॉन्सेस्टन में 19 दिसंबर 1974 को जन्मे रिकी का क्रिकेट से नाता बचपन से ही जुड़ गया था। एक खेल प्रेमी परिवार में पले-बढ़े पोंटिंग के भीतर जीतने का जज्बा उनके पिता ग्रीम और चाचा ग्रेग कैंपबेल ने भरा। मात्र 11 वर्ष की आयु में अंडर-13 टीम के लिए खेलते हुए उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और आठवें ग्रेड में पहुँचते-पहुँचते प्रसिद्ध बैट निर्माता कूकाबुरा के साथ अनुबंध करने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने। हालांकि किशोरावस्था के दौरान फुटबॉल खेलते समय हाथ की हड्डी टूटने के कारण उन्हें उस खेल को छोड़ना पड़ा, लेकिन इसी मोड़ ने उन्हें पूरी तरह से क्रिकेट के प्रति समर्पित कर दिया। 17 साल की उम्र में तस्मानिया के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण कर वे सबसे कम उम्र के तस्मानियाई खिलाड़ी बने और जल्द ही एडिलेड की क्रिकेट अकादमी में दिग्गज रोड मार्श की नजरों में आ गए, जिन्होंने उन्हें उस समय का सर्वश्रेष्ठ युवा बल्लेबाज घोषित किया था।

पोंटिंग के अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत 1995 में न्यूजीलैंड के खिलाफ हुई, लेकिन उनके सितारे तब चमके जब उन्होंने पर्थ में श्रीलंका के खिलाफ अपने टेस्ट पदार्पण पर 96 रनों की यादगार पारी खेली। हालांकि शुरुआती दौर में अनुशासन और फॉर्म की चुनौतियों के कारण उन्हें टीम से अंदर-बाहर होना पड़ा, लेकिन 1999 के विश्व कप की जीत में उनकी 354 रनों की महत्वपूर्ण भागीदारी ने उनके करियर को नई दिशा दी। साल 2002 में एकदिवसीय और 2004 में टेस्ट टीम की कमान संभालने के बाद पोंटिंग ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने अपनी बल्लेबाजी को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाते हुए 2003 के कैलेंडर वर्ष में तीन दोहरे शतक जड़कर सर डॉन ब्रैडमैन के रिकॉर्ड की बराबरी की। उसी वर्ष विश्व कप फाइनल में भारत के खिलाफ खेली गई उनकी नाबाद 140 रनों की पारी ने उन्हें महानता की श्रेणी में ला खड़ा किया।

मैदान पर एक आक्रामक योद्धा की छवि रखने वाले पोंटिंग ने अपने करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे। 2005 की एशेज हार के बाद उन पर कप्तानी छोड़ने का दबाव था, लेकिन उन्होंने 2006-07 की एशेज में इंग्लैंड को 5-0 से हराकर ऐतिहासिक वापसी की। पोंटिंग इतिहास के एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं जो 100 टेस्ट जीत का हिस्सा रहे और जिन्होंने 262 एकदिवसीय जीत दर्ज कीं। टेस्ट और वनडे दोनों प्रारूपों में ऑस्ट्रेलिया के लिए सर्वाधिक रन बनाने वाले इस बल्लेबाज ने 168 टेस्ट मैचों में 51.85 की औसत से 13,378 रन बनाए। उनके खेल की सबसे बड़ी विशेषता उनका 'पुल' और 'हुक' शॉट था, जिसे दुनिया के सबसे घातक गेंदबाजों के खिलाफ भी वे निडर होकर खेलते थे। उनकी क्षेत्ररक्षण क्षमता, विशेषकर स्लिप और कवर में, उन्हें एक पूर्ण क्रिकेटर बनाती थी।

साल 2012 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पर्थ टेस्ट के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने वाले पोंटिंग का योगदान खेल के प्रति आज भी कम नहीं हुआ है। संन्यास के बाद उन्होंने कोचिंग में हाथ आजमाया और आईपीएल में मुंबई इंडियंस को 2015 का खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली कैपिटल्स के साथ उनका लंबा जुड़ाव रहा और अब वे पंजाब किंग्स के मुख्य कोच के रूप में नई जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। खेल के प्रति उनके समर्पण के लिए उन्हें 2012 में 'ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ ऑस्ट्रेलिया' से सम्मानित किया गया और 2018 में उन्हें आईसीसी 'हॉल ऑफ फेम' में शामिल किया गया। तस्मानिया के बेलेरिव ओवल में उनके नाम पर बना स्टैंड और उनकी कांस्य प्रतिमा आज भी आने वाली पीढ़ियों को उनके संघर्ष और सफलता की गाथा सुनाती है।

Pratahkal Newsroom

Pratahkal Newsroom

प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story