आज भारतीय क्रिकेट में जब भी युवा स्पिनरों की चर्चा होती है, तो Ravi Bishnoi का नाम सबसे तेज़ी से उभरता है। अपनी कलाई की जादुई स्पिन और सटीक लाइन-लेंथ से बल्लेबाज़ों को चकमा देने वाले इस लेग स्पिनर ने बहुत कम समय में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खास पहचान बनाई है। 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी20 सीरीज़ में 5 मैचों में 9 विकेट लेकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि वह बड़े मंच पर दबाव में भी प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं, भले ही सीरीज़ की शुरुआत में 4 ओवर में 54 रन खर्च करने जैसा कठिन दौर क्यों न आया हो।

लेकिन इस चमकदार सफलता के पीछे संघर्ष की एक लंबी कहानी छिपी है। राजस्थान के जोधपुर के बिरामी गांव में जन्मे बिश्नोई ऐसे इलाके से आते हैं, जहां क्रिकेट के लिए ना संसाधन थे और ना ही कोई मजबूत ढांचा। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपने दोस्तों और कोचों के साथ मिलकर खुद ईंट-गारे से “स्पार्टन्स क्रिकेट अकादमी” बनाई, ताकि अभ्यास का रास्ता तैयार हो सके। शुरुआती दिनों में उन्हें अंडर-16 और अंडर-19 ट्रायल्स में बार-बार नजरअंदाज किया गया, लेकिन लगातार मेहनत और कोचों के विश्वास ने आखिरकार उन्हें राजस्थान की अंडर-19 टीम तक पहुंचा दिया।

यहीं से उनका करियर तेज़ी से आगे बढ़ा। 2019 में उन्होंने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में टी20 डेब्यू किया और उसी साल विजय हजारे ट्रॉफी में लिस्ट-ए क्रिकेट में कदम रखा। हालांकि, असली पहचान उन्हें 2020 के अंडर-19 विश्व कप में मिली, जहां उन्होंने 17 विकेट लेकर पूरे टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ का खिताब अपने नाम किया। जापान के खिलाफ एक मैच में 8 ओवर में सिर्फ 5 रन देकर 4 विकेट लेना उनके करियर के शुरुआती सबसे प्रभावशाली प्रदर्शनों में से एक रहा।

इस शानदार प्रदर्शन ने उन्हें आईपीएल तक पहुंचाया, जहां 2020 की नीलामी में किंग्स इलेवन पंजाब ने उन्हें खरीदा। अपने पहले ही सीज़न में उन्होंने 12 विकेट लेकर “इमर्जिंग प्लेयर” अवॉर्ड की दौड़ में जगह बनाई। बाद में वह लखनऊ सुपर जायंट्स का हिस्सा बने और अपनी किफायती गेंदबाज़ी से टीम के प्रमुख स्पिनर के रूप में उभरे। 2026 की नीलामी से पहले रिलीज़ होने के बाद भी उनकी काबिलियत पर भरोसा बरकरार रहा और राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें 7.2 करोड़ रुपये में अपनी टीम में शामिल कर लिया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बिश्नोई ने तेज़ शुरुआत की। 2022 में वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 डेब्यू मैच में ही 17 रन देकर 2 विकेट लेकर “प्लेयर ऑफ द मैच” बने, जो उनके आत्मविश्वास और प्रतिभा का बड़ा संकेत था। उसी साल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे डेब्यू भी किया। हालांकि टीम इंडिया में जगह बनाए रखना आसान नहीं रहा, क्योंकि युजवेंद्र चहल जैसे अनुभवी स्पिनरों से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिली, जिसके चलते 2024 टी20 वर्ल्ड कप टीम में वह जगह बनाने से चूक गए।

इसके बावजूद रवि बिश्नोई का सफर रुकने वाला नहीं दिखता। घरेलू क्रिकेट में लगातार प्रदर्शन, आईपीएल में स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौके मिलने पर प्रभावशाली प्रदर्शन ने उन्हें भारतीय क्रिकेट के भविष्य का अहम हिस्सा बना दिया है। संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास के दम पर रेगिस्तान की मिट्टी से उठकर विश्व क्रिकेट में पहचान बनाना ही उनकी असली कहानी है, जो उन्हें आज के दौर का एक प्रेरणादायक सितारा बनाती है।

Pratahkal Newsroom

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