भारतीय क्रिकेट के बदलते परिदृश्य में रजत पाटीदार का नाम तेजी से उभरे उन सितारों में शामिल हो चुका है, जिन्होंने अपनी बल्लेबाज़ी और नेतृत्व क्षमता से खेल की दिशा बदल दी। इंडियन प्रीमियर लीग में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को 2025 में पहली बार खिताब जिताना उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ, जिसने उन्हें सिर्फ एक भरोसेमंद बल्लेबाज़ ही नहीं बल्कि एक सफल कप्तान के रूप में भी स्थापित कर दिया। यह उपलब्धि ऐसे समय आई जब टीम में विराट कोहली जैसे दिग्गज मौजूद थे, लेकिन कप्तानी की जिम्मेदारी पाटीदार के कंधों पर सौंपी गई थी।

मध्य प्रदेश के इंदौर में 1 जून 1993 को जन्मे पाटीदार का क्रिकेट सफर साधारण शुरुआत से निकला एक असाधारण किस्सा है। एक व्यापारी परिवार से आने वाले पाटीदार ने महज आठ साल की उम्र में क्रिकेट क्लब जॉइन किया और अपने दादा के मार्गदर्शन में अकादमी में प्रशिक्षण शुरू किया। शुरुआती दौर में वह एक गेंदबाज़ के रूप में खेले, लेकिन अंडर-15 स्तर पर उन्होंने बल्लेबाज़ी पर ध्यान केंद्रित किया, जो आगे चलकर उनकी पहचान बनी।

घरेलू क्रिकेट में उनका प्रदर्शन लगातार निखरता गया। 2015-16 रणजी ट्रॉफी में डेब्यू करने के बाद उन्होंने 2018-19 सीजन में मध्य प्रदेश के लिए 713 रन बनाकर खुद को एक भरोसेमंद बल्लेबाज़ के रूप में स्थापित किया। इसके बाद 2024-25 सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में कप्तान के रूप में उन्होंने 9 पारियों में 428 रन बनाए, जिसमें उनका औसत 61.14 और स्ट्राइक रेट 186.08 रहा। इस दौरान पांच अर्धशतक और फाइनल में 81 रन की नाबाद पारी उनके अकेले संघर्ष को दर्शाती है, जिसने टीम को खिताबी मुकाबले तक पहुंचाया।

फ्रेंचाइजी क्रिकेट में पाटीदार का असली उदय 2022 आईपीएल सीजन में देखने को मिला, जब उन्होंने एलिमिनेटर मुकाबले में 49 गेंदों पर नाबाद 112 रन बनाकर इतिहास रच दिया। वह प्लेऑफ में शतक लगाने वाले पहले अनकैप्ड खिलाड़ी बने और इस सीजन में 8 मैचों में 333 रन बनाकर अपनी उपयोगिता साबित की। हालांकि 2023 में चोट के कारण वह बाहर रहे, लेकिन 2024 में 13 पारियों में 395 रन और 177.13 के स्ट्राइक रेट के साथ उन्होंने जोरदार वापसी की। 2025 में जब फाफ डु प्लेसिस टीम का हिस्सा नहीं रहे, तब पाटीदार को कप्तानी सौंपी गई और उन्होंने इस भरोसे को ऐतिहासिक खिताब जीतकर सही साबित किया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पाटीदार ने अपनी जगह बनानी शुरू कर दी है। दिसंबर 2023 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे डेब्यू करते हुए उन्होंने 16 गेंदों में 22 रन बनाए, जबकि 2024 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट डेब्यू का मौका मिला। हालांकि शुरुआती टेस्ट सीरीज में वह बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सके, लेकिन घरेलू क्रिकेट में वापसी करते हुए हरियाणा के खिलाफ 68 गेंदों में शतक और 102 गेंदों पर 159 रन की पारी खेलकर उन्होंने अपनी क्षमता का दमदार प्रदर्शन किया।

रजत पाटीदार की कहानी केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धैर्य, निरंतरता और मौके का सही उपयोग करने की मिसाल भी है। एक ऐसे खिलाड़ी के रूप में, जिसने घरेलू क्रिकेट से लेकर आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय मंच तक हर स्तर पर खुद को साबित किया, पाटीदार आज भारतीय क्रिकेट के भविष्य की मजबूत कड़ी बन चुके हैं।

Pratahkal Newsroom

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