भारतीय ग्रैंडमास्टर आर. प्रग्नानंद ने जर्मनी के विंसेंट कीमर को हराकर इतिहास रचा, टूर्नामेंट में मैग्नस कार्लसन को भी दी मात।

praggnanandhaa wins norway chess : विश्व शतरंज के फलक पर भारतीय मेधा का एक ऐसा स्वर्णिम अध्याय लिखा गया है जिसने पूरी दुनिया को अचंभित कर दिया है। भारत के युवा ग्रैंडमास्टर आर. प्रग्गनानंदा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ाते हुए प्रतिष्ठित नॉर्वे चेस चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम कर लिया है। इस खिताबी जीत के साथ ही वे इस बेहद मुश्किल और नामचीन प्रतियोगिता को जीतने वाले देश के पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। प्रग्गनानंदा की इस ऐतिहासिक और असाधारण सफलता की गूंज देश के सर्वोच्च गलियारों तक पहुंची है, जिसके तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को इस युवा खिलाड़ी को राष्ट्र की ओर से बधाई देते हुए उनकी निरंतर उत्कृष्टता की सराहना की है।

इस रोंगटे खड़े कर देने वाले खिताबी मुकाबले के सफर पर नज़र डालें तो प्रग्गनानंदा की यह जीत किसी चमत्कारिक पटकथा से कम नहीं लगती। टूर्नामेंट के छठे दौर के बाद यह युवा खिलाड़ी अंक तालिका में सबसे निचले पायदान पर खिसक गया था और खेल समीक्षकों ने उनके खिताब जीतने की उम्मीदें लगभग छोड़ दी थीं। लेकिन इसके बाद 20 वर्षीय इस ग्रैंडमास्टर ने अपनी मानसिक दृढ़ता का परिचय देते हुए खेल की बिसात पर वो ऐतिहासिक वापसी की जिसकी मिसालें सदियों तक दी जाएंगी। प्रग्गनानंदा ने क्लासिकल चेस इवेंट के 10वें और आखिरी निर्णायक राउंड में जर्मनी के दिग्गज खिलाड़ी विंसेंट कीमर को मात दी। मैच के दौरान उन्होंने कीमर द्वारा की गई तकनीकी गलतियों का बारीकी से फायदा उठाया और महज 45वीं चाल में उन्हें घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।

इस महासमर के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो प्रग्गनानंदा ने पूरे टूर्नामेंट का अंत 5 शानदार जीत, 2 हार और दो ड्रॉ मुकाबलों के साथ कुल 18 अंकों के साथ शीर्ष पर रहते हुए किया। जिन दो मुकाबलों में बाजी ड्रॉ रही, उनका फैसला रोमांचक आर्मागेडन गेम के जरिए निकाला गया, जहां इस भारतीय स्टार ने दबाव को मात देकर जीत सुनिश्चित की। अपने इस ऐतिहासिक सफर के दौरान प्रग्गनानंदा ने न सिर्फ खिताब जीता, बल्कि शतरंज की दुनिया के बेताज बादशाह और मौजूदा चैंपियन मैग्नस कार्लसन को टूर्नामेंट में दूसरी बार शिकस्त देकर सनसनी फैला दी। इसके साथ ही उन्होंने हमवतन खिलाड़ी डी. गुकेश के खिलाफ भी एक बेहतरीन जीत दर्ज की। इस असाधारण प्रदर्शन की बदौलत प्रग्गनानंदा साल 2021 के बाद से इस टूर्नामेंट में लगातार चार क्लासिकल मुकाबले जीतने वाले दुनिया के महज दूसरे खिलाड़ी बन गए हैं, उनसे पहले यह कीर्तिमान सिर्फ खुद मैग्नस कार्लसन के नाम दर्ज था।

प्रोटोकॉल और आधिकारिक स्तर पर इस ऐतिहासिक क्षण को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस शानदार कामयाबी की सराहना की। प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक संदेश में लिखा कि प्रग्गनानंदा की यह जीत वास्तव में एक शानदार उपलब्धि है, जो खेल जगत में उनकी लगातार बेहतरीन उत्कृष्टता को प्रदर्शित करती है। इसके साथ ही पीएम मोदी ने उनके उज्ज्वल भविष्य और आगामी वैश्विक प्रयासों के लिए देश की ओर से ढेरों शुभकामनाएं भी प्रेषित कीं। खेल के इस शिखर पर पहुंचने के बाद प्रग्गनानंदा ने अपनी इस कामयाबी का पूरा श्रेय अपनी मां को दिया। उन्होंने भावुक होकर बताया कि उनकी मां ने पहले ही भरोसा जताया था कि वे नए महीने की शुरुआत में एक नया इतिहास रचेंगे। मां के इसी विश्वास ने उन्हें लगातार चार बेहद कड़े मुकाबलों में अपराजेय बनाए रखा। भारत के इस युवा खिलाड़ी की यह वैश्विक विजय यह साबित करती है कि भारतीय शतरंज का भविष्य न केवल सुरक्षित है, बल्कि विश्व पटल पर राज करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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