भारतीय क्रिकेट में जब भी युवा प्रतिभाओं की बात होती है, तो पृथ्वी शॉ का नाम एक ऐसे बल्लेबाज़ के रूप में सामने आता है, जिसने बेहद कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी छाप छोड़ दी। आक्रामक बल्लेबाजी, तेज़ शुरुआत और बेखौफ अंदाज़ ने उन्हें क्रिकेट जगत में अलग पहचान दिलाई। 18 साल की उम्र में टेस्ट डेब्यू पर शतक जड़कर उन्होंने न सिर्फ इतिहास रचा, बल्कि खुद को भारत के भविष्य के सितारों में शामिल कर लिया, जहां उनकी तुलना महान बल्लेबाज़ सचिन तेंदुलकर से की जाने लगी।

पृथ्वी शॉ की कहानी सिर्फ एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी की नहीं, बल्कि संघर्ष और मेहनत से सफलता तक पहुंचने की दास्तान है। महाराष्ट्र के विरार में जन्मे शॉ के पिता आर्थिक कारणों से बिहार के गया से मुंबई आए थे। बचपन से ही क्रिकेट के प्रति उनके जुनून ने उन्हें अलग बना दिया। स्कूल क्रिकेट में 2013 में 546 रनों की ऐतिहासिक पारी खेलकर उन्होंने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। यह पारी न केवल भारतीय स्कूल क्रिकेट के इतिहास की सबसे चर्चित पारियों में शामिल हुई, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसे असाधारण उपलब्धि माना गया।

मुंबई के घरेलू क्रिकेट से अपने करियर की शुरुआत करने वाले शॉ ने 2017 में रणजी ट्रॉफी डेब्यू में ही शतक जड़कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसके बाद दिलीप ट्रॉफी में भी डेब्यू शतक लगाकर उन्होंने सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड की बराबरी की। घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी 2021 में 827 रन बनाकर एक सीजन में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम किया, जिसमें 227 नाबाद की विस्फोटक पारी भी शामिल रही, जो टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत स्कोर है। 2023 में असम के खिलाफ 379 रन बनाकर उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में भारत के दूसरे सबसे बड़े स्कोर का रिकॉर्ड भी कायम किया।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शॉ का आगाज़ बेहद धमाकेदार रहा। 4 अक्टूबर 2018 को वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट डेब्यू में उन्होंने शतक बनाकर भारत के लिए सबसे कम उम्र में डेब्यू शतक लगाने वाले बल्लेबाज़ का रिकॉर्ड बनाया। उनकी इस उपलब्धि ने उन्हें तुरंत स्टार बना दिया और आईसीसी ने उन्हें 2018 के ब्रेकआउट स्टार्स में शामिल किया। हालांकि, करियर में उतार-चढ़ाव भी आए, जिसमें 2019 का डोपिंग प्रतिबंध और 2020 ऑस्ट्रेलिया दौरे पर खराब प्रदर्शन शामिल रहा, लेकिन इन चुनौतियों ने उन्हें और मजबूत बनाया।

आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स के लिए खेलते हुए शॉ ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से कई यादगार पारियां खेलीं। 2018 में सबसे कम उम्र में ओपनिंग करने का रिकॉर्ड बनाने से लेकर 2021 में एक ओवर में लगातार छह चौके लगाने तक, उन्होंने टी20 क्रिकेट में भी अपनी अलग पहचान बनाई। हालांकि 2025 आईपीएल नीलामी में अनसोल्ड रहना उनके लिए झटका था, लेकिन उन्होंने घरेलू क्रिकेट में वापसी कर अपनी फॉर्म और फिटनेस से आलोचकों को जवाब दिया।

मुंबई क्रिकेट से अलग होकर 2025 में महाराष्ट्र टीम से जुड़ना उनके करियर का नया अध्याय साबित हुआ। नए सिरे से शुरुआत करते हुए उन्होंने बुची बाबू टूर्नामेंट में शतक जड़ा और रणजी ट्रॉफी में तेज़ दोहरा शतक लगाकर यह साबित किया कि उनमें अभी भी बड़े स्तर पर वापसी करने की क्षमता है। संघर्ष, विवाद और गिरावट के बावजूद पृथ्वी शॉ का सफर यह दिखाता है कि प्रतिभा के साथ दृढ़ संकल्प हो, तो वापसी हमेशा संभव है।

Pratahkal Newsroom

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