भारतीय क्रिकेट में जब भी रफ्तार और आक्रामक तेज़ गेंदबाज़ी की चर्चा होती है, तो नवदीप सैनी का नाम स्वतः ही उभरकर सामने आता है। 2019 से 2021 के बीच तीनों अंतरराष्ट्रीय प्रारूपों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले सैनी ने अपनी तेज़ गति, सटीक लाइन-लेंथ और निर्णायक मौकों पर विकेट लेने की क्षमता से पहचान बनाई। इंडियन प्रीमियर लीग में उनकी मौजूदगी और घरेलू क्रिकेट में निरंतर प्रदर्शन ने उन्हें आधुनिक भारतीय तेज़ गेंदबाज़ी के अहम चेहरों में शामिल कर दिया।

हरियाणा के करनाल में 23 नवंबर 1992 को जन्मे सैनी का सफर संघर्षों से भरा रहा। एक साधारण परिवार से आने वाले सैनी के पिता हरियाणा सरकार में ड्राइवर थे, जबकि उनके दादा करम सिंह स्वतंत्रता सेनानी रहे, जिन्होंने सुभाष चंद्र बोस की आज़ाद हिंद फौज में योगदान दिया था। सीमित संसाधनों के बावजूद सैनी ने अपने सपनों को थामे रखा और कड़ी मेहनत के दम पर क्रिकेट की दुनिया में कदम रखा।

दिल्ली के लिए 2013 से घरेलू क्रिकेट खेल रहे सैनी ने 2015-16 सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में टी20 डेब्यू किया, लेकिन असली पहचान उन्हें 2017-18 रणजी ट्रॉफी में मिली, जब उन्होंने आठ मैचों में 34 विकेट लेकर दिल्ली के लिए सबसे ज्यादा विकेट झटके। इसके बाद 2018-19 विजय हजारे ट्रॉफी में भी उन्होंने आठ मैचों में 16 विकेट लेकर अपनी उपयोगिता साबित की। उनकी 150 किमी प्रति घंटे की रफ्तार और स्विंग कराने की क्षमता ने उन्हें घरेलू सर्किट का सबसे खतरनाक गेंदबाज़ बना दिया, जिसके चलते 2018 आईपीएल नीलामी में उन्हें 3 करोड़ रुपये में खरीदा गया।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर सैनी का आगाज़ बेहद धमाकेदार रहा। अगस्त 2019 में वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय डेब्यू करते हुए उन्होंने चार ओवर में तीन विकेट झटके, जिसमें निकोलस पूरन और शिमरोन हेटमायर को लगातार गेंदों पर आउट करना शामिल था। अंतिम ओवर में विकेट मेडन डालकर कीरोन पोलार्ड को आउट करने के साथ उन्होंने ‘मैन ऑफ द मैच’ का खिताब भी अपने नाम किया और डेब्यू मैच में यह उपलब्धि हासिल करने वाले भारत के छठे खिलाड़ी बने। दिसंबर 2019 में उन्होंने वनडे डेब्यू भी इसी टीम के खिलाफ किया, जबकि जनवरी 2021 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट डेब्यू करते हुए विल पुकोव्स्की को आउट कर अपना पहला टेस्ट विकेट लिया।

आईपीएल में उनका सफर भी दिलचस्प रहा, जहां 2017 में दिल्ली टीम ने उन्हें 10 लाख रुपये में खरीदा, लेकिन खेलने का मौका नहीं मिला। 2019 में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के लिए उतरते हुए वह टीम के दूसरे सबसे सफल गेंदबाज़ बने। आगे चलकर 2022 में राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें अपनी टीम में शामिल किया, वहीं 2026 में कोलकाता नाइट राइडर्स ने उन्हें चोटिल खिलाड़ी के विकल्प के रूप में साइन किया। इंग्लैंड में केंट के लिए खेलते हुए उन्होंने डेब्यू मैच में सात विकेट, जिसमें पहली पारी में पांच विकेट शामिल थे, लेकर अपनी प्रतिभा का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रदर्शन किया।

हाल के वर्षों में भी सैनी ने अपने खेल में निरंतरता बनाए रखी है। 2024 दिलीप ट्रॉफी में इंडिया बी के लिए खेलते हुए उन्होंने 144 गेंदों में 56 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली और आठवें विकेट के लिए मुशीर खान के साथ रिकॉर्ड साझेदारी कर टीम को 321 तक पहुंचाया। यह प्रदर्शन बताता है कि सैनी केवल गेंदबाज़ ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर उपयोगी बल्लेबाज़ भी साबित हो सकते हैं। अपनी रफ्तार, संघर्ष और लगातार बेहतर होते प्रदर्शन के दम पर नवदीप सैनी ने भारतीय क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई है और आने वाले समय में वह खुद को टीम के नियमित सदस्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में अग्रसर हैं।

Pratahkal Newsroom

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