मुकुल दलिप चौधरी आज भारतीय क्रिकेट में एक उभरता हुआ नाम बन चुके हैं, जिन्होंने अपनी विस्फोटक बल्लेबाज़ी और दबाव में मैच जिताने की क्षमता से अचानक सुर्खियां बटोर ली हैं। 9 अप्रैल 2026 को Indian Premier League के मुकाबले में Lucknow Super Giants के लिए खेलते हुए उन्होंने Kolkata Knight Riders के खिलाफ महज 27 गेंदों में नाबाद 54 रन की पारी खेलकर 182 रनों का लक्ष्य आखिरी गेंद पर हासिल कराया। यह पारी न केवल उनकी प्रतिभा का परिचायक बनी, बल्कि उन्हें रातोंरात क्रिकेट प्रेमियों के बीच चर्चा का केंद्र भी बना गई।

6 अगस्त 2004 को जन्मे मुकुल चौधरी का सफर राजस्थान के झुंझुनू जैसे छोटे शहर से शुरू हुआ, जहां संसाधनों की कमी के बावजूद उनके पिता दलिप कुमार चौधरी ने बेटे को क्रिकेटर बनाने का सपना देखा। शुरुआती आर्थिक संघर्षों के बावजूद उनके पिता ने हार नहीं मानी और शिक्षक की नौकरी के बाद रियल एस्टेट व होटल व्यवसाय में सफलता हासिल कर अपने बेटे के क्रिकेट करियर के लिए मजबूत आधार तैयार किया। इसी संकल्प के चलते मुकुल को सीकर की एसबीएस क्रिकेट अकादमी में दाखिला दिलाया गया, जहां उनके खेल को सही दिशा मिली।

दिलचस्प बात यह है कि मुकुल ने अपने करियर की शुरुआत विकेटकीपर के रूप में नहीं, बल्कि एक मीडियम-फास्ट गेंदबाज़ के तौर पर की थी। हालांकि एक मैच के दौरान टीम में विकेटकीपर की कमी होने पर उन्होंने यह भूमिका निभाई और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अपने आदर्श MS Dhoni से प्रेरित होकर उन्होंने विकेटकीपिंग और बल्लेबाज़ी दोनों में महारत हासिल की। धीरे-धीरे उनके प्रदर्शन ने जूनियर चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा और उन्हें जयपुर की अरावली क्रिकेट अकादमी में प्रशिक्षण का अवसर मिला, जहां उनके परिवार ने भी उनका पूरा साथ दिया।

घरेलू क्रिकेट में मुकुल का सफर तेज़ी से आगे बढ़ा। उन्होंने 17 जनवरी 2023 को Ranji Trophy में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया और फिर 24 दिसंबर 2025 को Vijay Hazare Trophy में लिस्ट ए क्रिकेट में कदम रखा। उनकी निरंतर प्रगति और आक्रामक खेल शैली ने जल्द ही आईपीएल स्काउट्स का ध्यान आकर्षित किया, जो युवा प्रतिभाओं की तलाश में रहते हैं।

साल 2026 के आईपीएल ऑक्शन में मुकुल चौधरी के लिए जबरदस्त बोली लगी और अंततः लखनऊ सुपर जायंट्स ने उन्हें 2.6 करोड़ रुपये में अपनी टीम में शामिल किया। यह सौदा उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, क्योंकि इसके बाद उन्हें बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला। अपने पहले ही सीजन में उन्होंने जिस तरह दबाव भरे मुकाबलों में खुद को साबित किया, उसने उन्हें भविष्य के सितारे के रूप में स्थापित कर दिया।

मुकुल चौधरी की कहानी केवल एक खिलाड़ी की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, पारिवारिक समर्थन और अटूट विश्वास का परिणाम है। छोटे शहर से निकलकर आईपीएल जैसे बड़े मंच पर छा जाना इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा और मेहनत के दम पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उनकी हालिया मैच जिताऊ पारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय क्रिकेट को एक और भरोसेमंद विकेटकीपर-बल्लेबाज़ मिल चुका है, जो आने वाले वर्षों में टीम के लिए अहम भूमिका निभा सकता है।

Pratahkal Newsroom

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