कौन हैं Mohammed Siraj? ऑटो ड्राइवर के बेटे से टीम इंडिया की तेज़ धार बनने तक का सफर
भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज के जीवन का संघर्ष, आईपीएल 2025 मेगा ऑक्शन, एशिया कप प्रदर्शन और डिप्टी एसपी बनने तक की पूरी जानकारी।

गुजरात टाइटंस के तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज मैच के दौरान विकेट लेने के बाद खुशी मनाते हुए। सिराज को आईपीएल 2025 मेगा ऑक्शन में टीम ने 12.25 करोड़ रुपये में खरीदा।
भारतीय क्रिकेट में जब भी नई गेंद से आग उगलते स्पेल की बात होती है, तो मोहम्मद सिराज का नाम सबसे आगे उभरकर आता है। आज वह टीम इंडिया के प्रमुख तेज़ गेंदबाजों में गिने जाते हैं, जिन्होंने अपनी रफ्तार, स्विंग और आक्रामकता के दम पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खास पहचान बनाई है। 2023 एशिया कप के फाइनल में उनकी घातक गेंदबाजी, जिसमें उन्होंने मात्र 21 रन देकर 6 विकेट झटके और प्लेयर ऑफ द मैच बने, ने उन्हें वैश्विक मंच पर एक मैच-विनर के रूप में स्थापित कर दिया। इसके साथ ही 2024 और 2026 टी20 वर्ल्ड कप विजेता भारतीय टीम का हिस्सा बनकर उन्होंने अपनी सफलता को और ऊंचाई दी।
लेकिन इस चमक के पीछे एक संघर्षपूर्ण कहानी छिपी है, जिसकी शुरुआत हैदराबाद के एक साधारण परिवार से होती है। 13 मार्च 1994 को सिकंदराबाद में जन्मे सिराज के पिता ऑटो-रिक्शा चालक थे और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद साधारण थी। टेनिस बॉल से गली क्रिकेट खेलते हुए उन्होंने 16 साल की उम्र में गेंदबाजी शुरू की और महज 19 साल की उम्र में क्लब क्रिकेट में कदम रखा। अपने शुरुआती मैच में ही 9 विकेट लेकर उन्होंने संकेत दे दिया था कि यह खिलाड़ी लंबी रेस का घोड़ा है।
घरेलू क्रिकेट में सिराज का उभार बेहद तेज़ रहा। 2015-16 रणजी ट्रॉफी में हैदराबाद के लिए डेब्यू करने के बाद 2016-17 सीजन में उन्होंने 9 मैचों में 41 विकेट लेकर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके बाद 2017-18 विजय हजारे ट्रॉफी में 7 मैचों में 23 विकेट लेकर वह टूर्नामेंट के सबसे सफल गेंदबाज बने। यही प्रदर्शन उनके लिए आईपीएल और फिर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के दरवाजे खोलने का कारण बना। 2017 में आईपीएल में 2.6 करोड़ रुपये में खरीदे जाने के बाद उनकी जिंदगी ने रफ्तार पकड़ ली और 2018 में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर से जुड़कर उन्होंने अपनी पहचान और मजबूत की।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सिराज की शुरुआत भले ही उतनी प्रभावशाली नहीं रही, लेकिन उन्होंने हर मौके को सीख में बदला। 2017 में टी20 डेब्यू के बाद 2019 में वनडे और फिर 2020 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट डेब्यू ने उनके करियर को नई दिशा दी। 2020-21 के ऐतिहासिक ऑस्ट्रेलिया दौरे पर उन्होंने 3 टेस्ट में 13 विकेट लेकर भारत की सीरीज जीत में अहम भूमिका निभाई और टीम के सबसे सफल गेंदबाज बने। इसके बाद 2023 में वह आईसीसी वनडे रैंकिंग में नंबर-1 गेंदबाज भी बने, जो उनके निरंतर प्रदर्शन का प्रमाण है।
सिराज ने फ्रेंचाइज़ी क्रिकेट में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। आईपीएल में वह लगातार प्रभावशाली रहे और 2020 में बैक-टू-बैक मेडन ओवर डालने वाले पहले गेंदबाज बनकर इतिहास रचा। 2025 मेगा ऑक्शन में गुजरात टाइटंस ने उन्हें 12.25 करोड़ रुपये में खरीदा, जो उनकी बढ़ती अहमियत को दर्शाता है। इसके अलावा 2025 में एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी में 9 पारियों में 23 विकेट लेकर वह सीरीज के सबसे सफल गेंदबाज बने और अपने करियर के चौथे और पांचवें फाइव विकेट हॉल भी दर्ज किए।
मैदान के बाहर भी सिराज की पहचान लगातार मजबूत हुई है। 2024 में उन्हें हैदराबाद में मानद डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस नियुक्त किया गया, जो उनके योगदान और प्रेरणादायक सफर की बड़ी पहचान है। एक ऑटो ड्राइवर के बेटे से लेकर भारतीय क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद तेज़ गेंदबाज बनने तक का उनका सफर न केवल संघर्ष और मेहनत की मिसाल है, बल्कि यह भी दिखाता है कि जुनून और निरंतर प्रयास किसी भी खिलाड़ी को शिखर तक पहुंचा सकते हैं।

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