भारतीय क्रिकेट में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो बड़े मंच पर अपनी एक पारी से पहचान बना लेते हैं, और मनीष पांडे उन्हीं में से एक हैं। इंडियन प्रीमियर लीग के इतिहास में पहले भारतीय शतकवीर बनने का गौरव हासिल करने वाले पांडे ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और दबाव में खेलने की क्षमता से खुद को एक भरोसेमंद बल्लेबाज के रूप में स्थापित किया। Indian Premier League में उनकी पहचान सिर्फ एक बल्लेबाज की नहीं, बल्कि मैच जिताने वाले खिलाड़ी की रही है, जिसने कई टीमों के लिए निर्णायक योगदान दिया।

10 सितंबर 1989 को उत्तराखंड के नैनीताल में जन्मे पांडे का क्रिकेट सफर बेंगलुरु की जमीन पर आकार लेता है, जहां वह किशोरावस्था में अपने परिवार के साथ आ बसे। उनके पिता भारतीय सेना में थे, जिसने अनुशासन और समर्पण की भावना उनमें बचपन से ही भर दी। कर्नाटक की घरेलू टीम से खेलते हुए उन्होंने उम्र-स्तरीय क्रिकेट में तेजी से पहचान बनाई और 2008 के अंडर-19 विश्व कप विजेता भारतीय टीम का हिस्सा बने। यहीं से उनके करियर की नींव मजबूत हुई और उन्होंने लगातार घरेलू क्रिकेट में रन बनाकर चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा।

आईपीएल 2009 में Royal Challengers Bengaluru के लिए खेलते हुए पांडे ने इतिहास रच दिया, जब उन्होंने 114 रनों की विस्फोटक पारी खेलकर टूर्नामेंट में शतक लगाने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बनने का रिकॉर्ड अपने नाम किया। यह पारी उन्हें रातोंरात सुर्खियों में ले आई। इसके बाद उनका सफर Kolkata Knight Riders, Sunrisers Hyderabad और अन्य फ्रेंचाइजियों के साथ जारी रहा, जहां उन्होंने कई अहम पारियां खेलीं। खासकर 2014 के आईपीएल फाइनल में 94 रनों की उनकी मैच जिताऊ पारी ने कोलकाता को खिताब दिलाया और उन्हें ‘मैन ऑफ द मैच’ का सम्मान मिला। 2014 में 401 रन और 2017 में 396 रन बनाकर वह टूर्नामेंट के शीर्ष स्कोररों में भी शामिल रहे।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनका पदार्पण 2015 में जिम्बाब्वे के खिलाफ हुआ, जहां उन्होंने 71 रनों की संयमित पारी खेलकर अपनी उपयोगिता साबित की। लेकिन असली पहचान उन्हें 2016 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सिडनी में मिली, जब उन्होंने नाबाद 104 रन बनाकर 330 रनों के लक्ष्य का सफल पीछा किया और भारत को श्रृंखला में सम्मानजनक जीत दिलाई। इस पारी ने उन्हें एक ऐसे बल्लेबाज के रूप में स्थापित किया जो दबाव में भी संयम नहीं खोता। हालांकि, उनके करियर में उतार-चढ़ाव भी आए और टीम में स्थायी जगह बनाना उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन 2018 एशिया कप विजेता टीम का हिस्सा बनना उनके करियर की एक बड़ी उपलब्धि रही।

आईपीएल में उनका सफर लगातार जारी रहा, जहां उन्होंने मुंबई इंडियंस से शुरुआत की और फिर कई टीमों का हिस्सा बने। 2018 में सनराइजर्स हैदराबाद ने उन्हें 11 करोड़ रुपये में खरीदा, जिससे वह उस सीजन के सबसे महंगे खिलाड़ियों में शामिल हुए। बाद में वह लखनऊ सुपर जायंट्स, दिल्ली कैपिटल्स और फिर एक बार फिर कोलकाता नाइट राइडर्स के साथ जुड़े, जहां उन्होंने 2024 में एक और खिताब जीतने का स्वाद चखा। घरेलू क्रिकेट में कर्नाटक के कप्तान के रूप में भी उन्होंने नेतृत्व की जिम्मेदारी निभाई और लगातार प्रदर्शन से अपनी उपयोगिता साबित की।

मनीष पांडे का करियर इस बात का उदाहरण है कि प्रतिभा के साथ धैर्य और निरंतरता कितनी महत्वपूर्ण होती है। भले ही वह टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण न कर सके हों, लेकिन सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनकी भूमिका एक भरोसेमंद फिनिशर और लचीले बल्लेबाज की रही है। उनकी कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि उस संघर्ष और समर्पण की है, जिसने उन्हें भारतीय क्रिकेट के यादगार नामों में शामिल कर दिया।

Pratahkal Newsroom

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