भारतीय क्रिकेट में उभरते हुए स्पिन गेंदबाज़ों की नई फसल में मणिमारन सिद्धार्थ का नाम तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है, जो अपनी कसी हुई लाइन-लेंथ और टर्न निकालने की अद्भुत क्षमता के दम पर घरेलू क्रिकेट से लेकर आईपीएल तक पहचान बना रहे हैं। बाएं हाथ के इस ऑर्थोडॉक्स स्पिनर ने सीमित मौकों में भी अपनी उपयोगिता साबित करते हुए यह संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में वह भारतीय गेंदबाजी आक्रमण का अहम हिस्सा बन सकते हैं। आईपीएल 2024 में बेंगलुरु के खिलाफ विकेट लेकर उन्होंने एक बार फिर अपने हुनर की झलक दिखाई, जिसने उन्हें चर्चाओं में ला खड़ा किया।

3 जुलाई 1998 को जन्मे सिद्धार्थ का क्रिकेट सफर तमिलनाडु के मैदानों से शुरू हुआ, जहां उन्होंने अपनी सधी हुई गेंदबाजी से जल्द ही चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा। उन्होंने 22 नवंबर 2019 को सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में तमिलनाडु के लिए टी20 डेब्यू किया और उसी वर्ष 9 दिसंबर को रणजी ट्रॉफी में प्रथम श्रेणी क्रिकेट की शुरुआत कर दी। शुरुआती दौर में ही उन्होंने अपनी गेंदबाजी में विविधता और नियंत्रण का ऐसा मेल दिखाया, जिसने उन्हें टीम का भरोसेमंद विकल्प बना दिया।

घरेलू क्रिकेट में सिद्धार्थ का प्रदर्शन लगातार निखरता गया। रणजी ट्रॉफी में उन्होंने 30 से अधिक विकेट झटके, जो उनकी लंबी फॉर्मेट में प्रभावशीलता को दर्शाता है। वहीं लिस्ट ए क्रिकेट में 26 से ज्यादा विकेट लेकर उन्होंने अपनी उपयोगिता को और मजबूत किया। टी20 प्रारूप में तो उनका प्रदर्शन और भी प्रभावशाली रहा, जहां मात्र 12 मैचों में 20 से अधिक विकेट लेकर उन्होंने साबित किया कि छोटे प्रारूप में भी वह मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। 2019 सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में मुंबई के खिलाफ 4 विकेट पर 16 रन का उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन आज भी उनकी काबिलियत की मिसाल माना जाता है।

सिद्धार्थ का करियर 2022 विजय हजारे ट्रॉफी में उस समय एक नए मुकाम पर पहुंचा, जब उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ पांच विकेट लेकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। यह प्रदर्शन उनके आत्मविश्वास और निरंतर सुधार की कहानी बयां करता है। उनकी गेंदों में उछाल और टर्न का संयोजन बल्लेबाजों के लिए चुनौती बनता जा रहा है, जो उन्हें एक खतरनाक स्पिनर के रूप में स्थापित करता है।

आईपीएल में भी सिद्धार्थ की यात्रा दिलचस्प रही है। 2020 की नीलामी में कोलकाता नाइट राइडर्स ने उन्हें खरीदा, जबकि 2021 में दिल्ली कैपिटल्स ने उन पर दांव लगाया। हालांकि चोट के कारण उन्हें उस सीजन में बाहर होना पड़ा और उनकी जगह कुलवंत खेजरोलिया को शामिल किया गया, लेकिन इससे उनके हौसले पर असर नहीं पड़ा। सीमित अवसरों के बावजूद उन्होंने हर मौके को भुनाने की कोशिश की और अपनी उपयोगिता साबित की।

मणिमारन सिद्धार्थ की कहानी संघर्ष, धैर्य और निरंतर मेहनत की मिसाल है, जहां उन्होंने घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के दम पर खुद को स्थापित किया और आईपीएल जैसे बड़े मंच तक पहुंचे। क्रिकेट विशेषज्ञों और दिग्गजों द्वारा उनकी तुलना भारतीय क्रिकेट के दिग्गज स्पिनरों से की जा रही है, जो उनके उज्ज्वल भविष्य की ओर इशारा करता है। अब उनकी नजरें भारतीय राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ने पर टिकी हैं।

Pratahkal Newsroom

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