Luca Toni Interview La Repubblica : इतालवी फुटबॉल इस समय अपने सबसे बुरे दौर और पहचान के संकट से गुजर रहा है। 26 मार्च को उत्तरी आयरलैंड के खिलाफ होने वाले निर्णायक विश्व कप क्वालीफाइंग प्ले-ऑफ से ठीक पहले, 2006 के विश्व चैंपियन लुका टोनी ने देश के फुटबॉल ढांचे पर तीखा प्रहार किया है। 'ला रिपब्लिका' को दिए एक विस्फोटक साक्षात्कार में, फियोरेंटीना और बायर्न म्यूनिख के पूर्व दिग्गज स्ट्राइकर ने स्पष्ट किया कि चैंपियंस लीग में इतालवी क्लबों की विफलता महज एक संयोग नहीं, बल्कि एक गहरे संरचनात्मक पतन का परिणाम है।

इंटर मिलान का 'भ्रम' और वास्तविकता का टकराव :

लुका टोनी के अनुसार, हाल के वर्षों में इंटर मिलान द्वारा खेले गए दो यूरोपीय फाइनल ने इटली को एक 'झूठी उम्मीद' और भ्रम में रखा कि सब कुछ ठीक है। उन्होंने तर्क दिया कि उन सफलताओं ने सिस्टम की कमियों को ढक दिया था, लेकिन अब यूरोप में इतालवी टीमों का समग्र प्रदर्शन हकीकत बयां कर रहा है। टोनी ने विशेष रूप से कॉन्टे के नेतृत्व में नेपोली के खराब प्रदर्शन और इंटर की बोडो के खिलाफ विफलता पर निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जहाँ जुवेंटस और अटलांटा जैसे क्लब संघर्ष कर रहे हैं, वहीं सीरी ए वैश्विक स्तर पर काफी पीछे छूट गई है।

बायर्न म्यूनिख मॉडल : अनुशासन और निवेश का सबक

अपने अनुभव साझा करते हुए टोनी ने बायर्न म्यूनिख के सफल मॉडल का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि कैसे बायर्न अपनी कमाई का सही निवेश करता है और उनके पास ऐसे प्रबंधक हैं जो फुटबॉल की बारीकियों को समझते हैं।

  • बैलेंस शीट बनाम कर्ज : जहाँ कई इतालवी क्लब चैंपियंस लीग जीतने के लिए भारी कर्ज में डूबे हैं, वहीं बायर्न म्यूनिख का बैलेंस शीट हमेशा सकारात्मक रहता है।
  • अनुभवी चयन : बायर्न हर सीजन में एक या दो विश्व स्तरीय खिलाड़ियों को शामिल कर अपनी टीम को मजबूत बनाता है, जबकि इतालवी क्लब परमिट और स्थानांतरण नीतियों में उलझे हुए हैं।


युवा अकादमियों का संकट और नियमों की विसंगति :

टोनी ने इतालवी युवा अकादमियों (Youth Academies) की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने वर्तमान नियमों को दोषपूर्ण बताते हुए कहा कि 12 से 18 वर्ष के बच्चों के लिए कोई प्रतिबंध न होना उनके भविष्य और क्लबों के निवेश को बर्बाद कर रहा है। उन्होंने अपने बेटे लियोनार्डो का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे हर सीजन में टीम बदलने की आजादी 'खिलाड़ियों के बाजार' के बजाय 'परिवारों के बाजार' को जन्म दे रही है, जहाँ पैसों के दम पर बच्चों का भविष्य तय किया जा रहा है।

दिग्गजों की वापसी की पुकार

इतालवी फुटबॉल को फिर से जीवित करने के लिए टोनी ने एक क्रांतिकारी समाधान प्रस्तावित किया है। उनका मानना है कि फुटबॉल का सुधार उन लोगों द्वारा नहीं किया जा सकता जिन्होंने कभी मैदान पर पसीना नहीं बहाया।

  • शीर्ष स्तरीय लीडरशिप: रॉबर्टो बैजियो ने पहले भी सुधार की योजना पेश की थी जिसे नजरअंदाज कर दिया गया। टोनी ने मांग की है कि बैजियो और पाओलो माल्डिनी जैसे दिग्गजों को युवा प्रशिक्षण और प्रबंधन की कमान सौंपी जानी चाहिए।
  • फुटबॉल का ज्ञान: प्रशासनिक पदों पर राजनीतिक हस्तियों के बजाय उन लोगों की जरूरत है जो खेल की रग-रग से वाकिफ हों, अन्यथा इटली वैश्विक मंच पर केवल 'हंसी का पात्र' बनकर रह जाएगा।
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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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