लॉर्ड्स में कभी महिलाओं की थी नो एंट्री, अब ऑनर बोर्ड पर चमके क्रांति गौड़ और यस्तिका भाटिया के नाम
लॉर्ड्स में कभी महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध था, लेकिन जुलाई 2026 के पहले महिला टेस्ट में क्रांति गौड़ और यस्तिका भाटिया ने ऑनर बोर्ड पर नाम दर्ज कर इतिहास रच दिया।

तस्वीर में भारतीय महिला क्रिकेटर यस्तिका भाटिया (बाएं) और क्रांति गौड़ (दाएं) ब्लू जर्सी में मुस्कुराते हुए लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड के ऐतिहासिक ऑनर्स बोर्ड के सामने पोज दे रही हैं।
क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड का 142 वर्ष से अधिक पुराना टेस्ट इतिहास जितना गौरवशाली रहा है, महिलाओं के लिए उतना ही प्रतिबंधों और रूढ़िवादी परंपराओं से जुड़ा भी रहा। जिस मैदान पर कभी महिलाओं को दर्शक दीर्घा में बैठकर मैच देखने के लिए भी कड़े नियमों का सामना करना पड़ता था और ऐतिहासिक पवेलियन व लॉन्ग रूम में प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित था, उसी लॉर्ड्स के प्रतिष्ठित ऑनर बोर्ड पर अब भारत की क्रांति गौड़ और यस्तिका भाटिया ने अपना नाम दर्ज करा दिया है।
जुलाई 2026 में लॉर्ड्स के मैदान पर इतिहास का पहला आधिकारिक महिला टेस्ट मैच खेला गया। भारत और इंग्लैंड की महिला टीमों के बीच खेले गए इस ऐतिहासिक मुकाबले में भारतीय टीम ने 270 रनों के विशाल अंतर से जीत दर्ज की। इसी मैच में भारत की दो खिलाड़ियों ने अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर लॉर्ड्स के प्रतिष्ठित ऑनर बोर्ड में जगह बनाकर नया इतिहास रच दिया।
लॉर्ड्स की पहचान उसके ऐतिहासिक मुख्य पवेलियन और लॉन्ग रूम से है, लेकिन लंबे समय तक मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब (MCC) के इस विशेष पुरुष क्लब में महिलाओं के प्रवेश पर सख्त पाबंदी रही। वर्ष 1973 में इंग्लैंड की महिला टीम के वर्ल्ड कप जीतने के बावजूद महिलाओं को लॉर्ड्स में पहला अंतरराष्ट्रीय वनडे मैच खेलने के लिए 1976 तक इंतजार करना पड़ा।
लॉर्ड्स के 200 वर्ष से अधिक पुराने इतिहास में पहली बार वर्ष 1999 में महिलाओं को एमसीसी (MCC) की सदस्यता और पवेलियन में प्रवेश की अनुमति मिली। लॉर्ड्स में पुरुषों का पहला टेस्ट मैच 1884 में खेला गया था, जबकि महिलाओं को इस ऐतिहासिक मैदान पर अपना पहला टेस्ट मैच खेलने के लिए पूरे 142 वर्ष, यानी 2026 तक इंतजार करना पड़ा।
इस ऐतिहासिक मुकाबले में बुंदेलखंड के एक छोटे से गांव की 22 वर्षीय तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ ने पहली पारी में 37 रन देकर 5 विकेट (5/37) लेकर शानदार प्रदर्शन किया। क्रिकेट रिकॉर्ड्स के अनुसार, वह लॉर्ड्स के टेस्ट ऑनर बोर्ड पर जगह बनाने वाली दुनिया की पहली महिला गेंदबाज बनीं, क्योंकि इससे पहले टेस्ट ऑनर बोर्ड पर किसी महिला गेंदबाज का नाम दर्ज नहीं था। इसके साथ ही क्रांति गौड़ लॉर्ड्स में टेस्ट मैच में पांच विकेट लेने वाली भारत की सबसे युवा तेज गेंदबाज भी बन गईं।
दूसरी ओर गुजरात के वडोदरा की 25 वर्षीय विकेटकीपर-बल्लेबाज यस्तिका भाटिया ने दूसरी पारी में 158 गेंदों पर 113 रन की शानदार और धैर्यपूर्ण पारी खेली। वह लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर टेस्ट शतक लगाने वाली इतिहास की पहली महिला क्रिकेटर बनीं। इस शतक के साथ उनका नाम पहली बार लॉर्ड्स के बल्लेबाजी ऑनर बोर्ड पर सुनहरे अक्षरों में दर्ज हुआ।
जिस लॉर्ड्स के मैदान पर कभी महिलाओं के प्रवेश और भागीदारी पर कड़े प्रतिबंध थे, आज उसी मैदान के सबसे प्रतिष्ठित ऑनर बोर्ड पर क्रांति गौड़ और यस्तिका भाटिया के नाम दर्ज हैं। भारतीय महिला क्रिकेट की इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने यह साबित किया कि प्रतिभा को अवसर मिलने पर वर्षों पुरानी रूढ़िवादी परंपराएं और पाबंदियां भी टूट जाती हैं। लॉर्ड्स का इतिहास अब इन दोनों भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियों के बिना अधूरा माना जाएगा।

Pratahkal Bureau
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