भारतीय घरेलू क्रिकेट में लगातार अपनी छाप छोड़ने वाले कुलवंत खेझरोलिया आज उन चुनिंदा बाएं हाथ के तेज गेंदबाजों में गिने जाते हैं, जिन्होंने सीमित अवसरों के बावजूद अपनी गेंदबाजी से चयनकर्ताओं और फ्रेंचाइजियों का ध्यान खींचा है। अपनी सटीक लाइन-लेंथ, दोनों तरफ स्विंग कराने की क्षमता और अतिरिक्त उछाल के कारण वह बल्लेबाजों के लिए मुश्किलें खड़ी करने में माहिर हैं। IPL जैसी बड़ी लीग में उनका सफर भले ही उतार-चढ़ाव भरा रहा हो, लेकिन घरेलू क्रिकेट में उनके प्रदर्शन ने उन्हें लगातार प्रासंगिक बनाए रखा है।

13 मार्च 1992 को राजस्थान के झुंझुनू में जन्मे कुलवंत खेझरोलिया का सफर किसी बड़े क्रिकेटिंग बैकग्राउंड से नहीं, बल्कि साधारण परिवार से शुरू हुआ। उनके पिता शंकर सिंह एक किराना दुकान चलाते हैं, जबकि माता सरोज कंवर गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने क्रिकेट के सपने को जिंदा रखा और बेहतर अवसरों की तलाश में दिल्ली का रुख किया। शुरुआती दौर में ट्रायल्स में प्रभावित करने के बावजूद उन्हें तुरंत टीम में जगह नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और मेहनत जारी रखी।

साल 2017 उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जब उन्हें विजय हजारे ट्रॉफी में दिल्ली के लिए लिस्ट ए डेब्यू का मौका मिला। इसी दौरान IPL में मुंबई इंडियंस ने उन्हें 10 लाख रुपये में खरीदा, जिससे उनके करियर को नई दिशा मिली। इसके बाद उन्होंने रणजी ट्रॉफी 2017-18 में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया और उसी सीजन में 18 विकेट लेकर अपनी उपयोगिता साबित की, जिसमें सेमीफाइनल में लिया गया छह विकेट का शानदार प्रदर्शन भी शामिल रहा।

2018 में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में उनका टी20 डेब्यू हुआ और उन्होंने अपने पहले ही सीजन में दिल्ली के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेकर टीम को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इसी प्रदर्शन से प्रभावित होकर IPL में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने उन्हें अपने साथ जोड़ा। उसी वर्ष विजय हजारे ट्रॉफी के क्वार्टर फाइनल में हरियाणा के खिलाफ उन्होंने 31 रन देकर 6 विकेट झटके और हैट्रिक लेकर अपनी गेंदबाजी का लोहा मनवाया।

हालांकि IPL में उन्हें लगातार मौके नहीं मिले और 2020 से पहले आरसीबी ने उन्हें रिलीज कर दिया, लेकिन उन्होंने घरेलू क्रिकेट में अपनी धार बनाए रखी। 2023 में कोलकाता फ्रेंचाइजी से जुड़ने के बाद भी वह बड़ी भूमिका नहीं निभा सके, जबकि 2024 में मुंबई इंडियंस ने उन्हें फिर से टीम में शामिल किया, लेकिन पूरे सीजन में उन्हें प्लेइंग इलेवन में मौका नहीं मिला। इसके बावजूद उन्होंने अपने प्रदर्शन से उम्मीदें कायम रखीं और 2025 के IPL ऑक्शन में गुजरात टाइटंस ने उन्हें 30 लाख रुपये में खरीदकर एक बार फिर उन पर भरोसा जताया।

कुलवंत खेझरोलिया की सबसे बड़ी ताकत उनकी सीम गेंदबाजी है, जिसमें वह गेंद को दोनों दिशाओं में मूव कराने के साथ-साथ अतिरिक्त उछाल भी पैदा करते हैं। यही कारण है कि घरेलू क्रिकेट में वह लगातार विकेट लेने वाले गेंदबाज के रूप में उभरे हैं। सीमित अंतरराष्ट्रीय या IPL अवसरों के बावजूद, उनकी कहानी यह दर्शाती है कि निरंतर प्रदर्शन और धैर्य के बल पर एक खिलाड़ी कैसे अपनी पहचान बनाए रख सकता है और बड़े मंच पर वापसी की उम्मीद जिंदा रख सकता है।

Pratahkal Newsroom

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