भारतीय क्रिकेट में तेज़ गेंदबाज़ी के नए उभरते चेहरों में कुलदीप सेन का नाम तेजी से चर्चा में आया है, जिनकी रफ्तार और संघर्ष की कहानी उन्हें खास बनाती है। 140 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति से गेंदबाज़ी करने वाले इस तेज़ गेंदबाज़ ने घरेलू क्रिकेट, आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रदर्शन से यह साबित किया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपनों को हासिल किया जा सकता है। राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए उन्होंने दबाव भरे मौकों पर जिस तरह संयम और आक्रामकता का प्रदर्शन किया, उसने उन्हें क्रिकेट जगत में अलग पहचान दिलाई।

मध्य प्रदेश के रीवा जिले के हरिहरपुर गांव में 22 अक्टूबर 1996 को जन्मे कुलदीप सेन का शुरुआती जीवन संघर्षों से भरा रहा। एक साधारण परिवार में पले-बढ़े कुलदीप के पिता रामपाल सेन पेशे से नाई थे और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। पांच भाई-बहनों में तीसरे स्थान पर रहने वाले कुलदीप ने बचपन से ही क्रिकेट के प्रति रुचि दिखाई, लेकिन इसे गंभीरता से उन्होंने किशोरावस्था में अपनाया। उनके कोच अरिल एंथनी के मार्गदर्शन में उनकी प्रतिभा को सही दिशा मिली, जहां उनकी कच्ची गति और उछाल पैदा करने की क्षमता ने उन्हें स्थानीय स्तर पर अलग पहचान दिलाई।

घरेलू क्रिकेट में उनका सफर 2018 में शुरू हुआ जब उन्होंने 1 नवंबर को मध्य प्रदेश के लिए रणजी ट्रॉफी में प्रथम श्रेणी पदार्पण किया। महज कुछ ही हफ्तों बाद पंजाब के खिलाफ उन्होंने अपना पहला पांच विकेट हॉल लेकर चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा। इसके बाद 2019 में उन्होंने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में टी20 और विजय हजारे ट्रॉफी में लिस्ट ए क्रिकेट में भी पदार्पण किया। लगातार 140 किमी/घंटा से अधिक की रफ्तार और विकेट निकालने की क्षमता ने उन्हें घरेलू सर्किट में एक भरोसेमंद तेज़ गेंदबाज़ के रूप में स्थापित किया।

आईपीएल ने उनके करियर को नई दिशा दी, जब 2022 में राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें अपनी टीम में शामिल किया। इसी मंच पर उन्होंने अपने करियर का सबसे यादगार प्रदर्शन किया, जब लखनऊ के खिलाफ अंतिम ओवर में 14 रन बचाते हुए मार्कस स्टोइनिस का विकेट लेकर टीम को रोमांचक जीत दिलाई। इस प्रदर्शन ने उन्हें राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की नजर में ला दिया और दिसंबर 2022 में बांग्लादेश के खिलाफ वनडे सीरीज में उन्होंने भारत के लिए पदार्पण किया, जहां उन्होंने अपने पहले ही मैच में दो विकेट हासिल किए।

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कदम रखने के तुरंत बाद उन्हें चोटों ने घेर लिया, जिससे उनका करियर कुछ समय के लिए थम सा गया। पीठ और घुटने की चोटों से जूझते हुए उन्होंने लंबा पुनर्वास किया और 2024 में वापसी की। इस दौरान उनका आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती उनके सबसे बड़े हथियार बने। 2025-26 रणजी ट्रॉफी में उन्होंने सात मैचों में 17 विकेट लेकर शानदार प्रदर्शन किया, जिसमें जम्मू-कश्मीर के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में 9/131 का करियर सर्वश्रेष्ठ आंकड़ा शामिल रहा।

आईपीएल 2026 से पहले राजस्थान रॉयल्स द्वारा रिटेन किए जाने के साथ कुलदीप सेन ने एक बार फिर साबित किया कि निरंतर मेहनत और दृढ़ संकल्प से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है। गांव की गलियों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुंचने का उनका सफर न सिर्फ प्रेरणादायक है, बल्कि यह भारतीय क्रिकेट में नई प्रतिभाओं के उभार का भी प्रतीक बन चुका है।

Pratahkal Newsroom

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