कौन हैं करुण नायर? तिहरे शतक से इतिहास रचकर फिर वापसी की जिद से चमकता भारतीय सितारा
तिहरा शतक जड़ने वाले करुण नायर का सफर संघर्षों से भरा रहा है, जिन्होंने 2025 में घरेलू क्रिकेट में कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए।

विदर्भ के लिए घरेलू सत्र के दौरान शानदार बल्लेबाजी करने के बाद हेलमेट और बल्ला उठाकर अभिवादन करते करुण नायर।
भारतीय क्रिकेट में जब भी किसी बल्लेबाज़ के नाम के साथ ‘ट्रिपल सेंचुरी’ का तमगा जुड़ता है, तो वह अपने आप में एक असाधारण पहचान बन जाती है, और करुण नायर उसी दुर्लभ सूची के खिलाड़ी हैं जिन्होंने इस उपलब्धि के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी अमिट छाप छोड़ी। दाएं हाथ के इस शीर्ष क्रम के बल्लेबाज़ ने टेस्ट क्रिकेट में 303 नाबाद रन बनाकर इतिहास रचा और देखते ही देखते वह भारतीय क्रिकेट के उन चुनिंदा चेहरों में शामिल हो गए जिनसे भविष्य की बड़ी उम्मीदें जुड़ गईं। घरेलू क्रिकेट में कर्नाटक का प्रतिनिधित्व करते हुए और इंडियन प्रीमियर लीग में दिल्ली कैपिटल्स जैसी टीमों के लिए खेलते हुए उन्होंने लगातार यह साबित किया कि प्रतिभा और धैर्य का संगम उन्हें खास बनाता है।
6 दिसंबर 1991 को राजस्थान के जोधपुर में जन्मे करुण नायर का सफर किसी सामान्य क्रिकेटर की तरह नहीं रहा। एक समय ऐसा था जब वह एक प्रीमैच्योर बच्चे के रूप में कमजोर फेफड़ों की समस्या से जूझ रहे थे, लेकिन डॉक्टरों की सलाह पर खेल को अपनाना ही उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। बेंगलुरु में कोरमंगला क्रिकेट अकादमी से शुरू हुई उनकी ट्रेनिंग ने उन्हें तकनीकी रूप से मजबूत बनाया और धीरे-धीरे वह स्कूल क्रिकेट से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक अपनी बल्लेबाज़ी का लोहा मनवाने लगे। जैन यूनिवर्सिटी से वाणिज्य की पढ़ाई पूरी करते हुए उन्होंने क्रिकेट को अपना करियर बनाने की दिशा में लगातार मेहनत जारी रखी।
घरेलू क्रिकेट में उनका उदय बेहद प्रभावशाली रहा। 2013-14 के रणजी ट्रॉफी सीजन में पदार्पण करते ही उन्होंने कर्नाटक को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई और लगातार तीन शतक जड़कर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। हालांकि अगले सीजन में उनका प्रदर्शन कुछ फीका रहा, लेकिन 2014-15 के रणजी फाइनल में 328 रन की विशाल पारी खेलकर उन्होंने न सिर्फ टीम को जीत दिलाई, बल्कि रिकॉर्ड बुक में भी अपना नाम दर्ज करा दिया। यह रणजी फाइनल में किसी बल्लेबाज़ द्वारा बनाया गया सर्वोच्च स्कोर था। इसके बाद 2015-16 सीजन में 500 रन बनाते हुए उन्होंने अपनी निरंतरता साबित की और अगले सीजन में भी शतक और अर्धशतकों की बदौलत अपने प्रदर्शन को बनाए रखा।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनका सफर 2016 में जिम्बाब्वे के खिलाफ वनडे डेब्यू से शुरू हुआ, लेकिन असली पहचान उन्हें टेस्ट क्रिकेट में मिली। इंग्लैंड के खिलाफ चेन्नई टेस्ट में उन्होंने 303 नाबाद रन बनाकर इतिहास रच दिया। वह भारत के लिए तिहरा शतक लगाने वाले दूसरे बल्लेबाज़ बने और महज अपने तीसरे टेस्ट में यह कारनामा कर दुनिया को चौंका दिया। यह उपलब्धि उन्हें उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल करती है जिन्होंने अपने पहले टेस्ट शतक को ही तिहरे शतक में बदला। हालांकि इस ऐतिहासिक पारी के बावजूद टीम में प्रतिस्पर्धा के कारण उन्हें बाहर भी होना पड़ा, लेकिन यह उतार-चढ़ाव उनके करियर का हिस्सा बन गया।
इंडियन प्रीमियर लीग में भी करुण नायर का सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। 2014 में राजस्थान रॉयल्स के लिए 330 रन बनाकर उन्होंने अपनी उपयोगिता साबित की, जबकि 2016 में दिल्ली डेयरडेविल्स के लिए खेलते हुए उन्हें कप्तानी का मौका भी मिला। इसके बाद किंग्स इलेवन पंजाब, कोलकाता नाइट राइडर्स और फिर राजस्थान रॉयल्स के साथ जुड़े रहने के बाद 2025 में दिल्ली कैपिटल्स के लिए वापसी करते हुए उन्होंने मुंबई इंडियंस के खिलाफ 40 गेंदों में 89 रन की विस्फोटक पारी खेलकर फिर से अपनी क्षमता का परिचय दिया। इसी दौरान घरेलू क्रिकेट में 2025 विजय हजारे ट्रॉफी में बिना आउट हुए 542 रन बनाकर उन्होंने लिस्ट ए क्रिकेट में लगातार सबसे ज्यादा रन बनाने का विश्व रिकॉर्ड भी कायम किया।
करुण नायर की कहानी केवल एक तिहरे शतक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, गिरावट और फिर वापसी की जिद की कहानी है। 2025 में इंडिया ए के लिए इंग्लैंड लायंस के खिलाफ 204 रन की पारी ने उन्हें एक बार फिर राष्ट्रीय टीम में जगह दिलाई, जिससे यह साबित हुआ कि उनका सफर अभी खत्म नहीं हुआ है। बार-बार टीम से अंदर-बाहर होने के बावजूद उन्होंने अपने प्रदर्शन से यह दिखाया कि क्रिकेट में स्थायित्व केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि धैर्य और निरंतर मेहनत से आता है।

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