कौन हैं Josh Hazlewood? सटीक लाइन-लेंथ से दुनिया को झुकाने वाला ऑस्ट्रेलिया का घातक तेज़ गेंदबाज़
ऑस्ट्रेलियाई तेज़ गेंदबाज़ जोश हेज़लवुड के शुरुआती संघर्ष, अंतरराष्ट्रीय डेब्यू, एशेज में शानदार प्रदर्शन और आईपीएल 2025 में मिली सफलता का विस्तृत विवरण।

आईपीएल 2025 के दौरान रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के लिए खेलते हुए जोश हेज़लवुड विकेट लेने के बाद जश्न मनाते हुए, जिन्होंने टीम को पहला खिताब दिलाने में मदद की।
आधुनिक क्रिकेट में जब भी घातक तेज़ गेंदबाज़ी और अनुशासन की बात होती है, तो Josh Hazlewood का नाम सबसे ऊपर आता है। 6 फीट 4 इंच लंबे इस ऑस्ट्रेलियाई पेसर ने अपनी सटीक लाइन-लेंथ और लगातार दबाव बनाने की क्षमता से दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ों को परेशान किया है। आईसीसी रैंकिंग में तीनों फॉर्मेट में शीर्ष 10 में जगह बनाना और 2015, 2021 तथा 2023 के विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट जीतना उनकी महानता को दर्शाता है। मौजूदा दौर में वह ऑस्ट्रेलिया की तेज़ गेंदबाज़ी विरासत के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं।
लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने की कहानी एक छोटे से शहर से शुरू होती है। 8 जनवरी 1991 को न्यू साउथ वेल्स के टैमवर्थ में जन्मे हेज़लवुड का बचपन बेंडेमियर जैसे छोटे कस्बे में बीता, जहां उन्होंने अपने बड़े भाई के साथ backyard क्रिकेट खेलते हुए खेल की बारीकियां सीखी। महज 12 साल की उम्र में वयस्क खिलाड़ियों के खिलाफ खेलना उनकी प्रतिभा का संकेत था। 17 साल की उम्र में न्यू साउथ वेल्स के लिए चयनित होकर वह सबसे कम उम्र के तेज़ गेंदबाज़ बने, जिसने उनके पेशेवर करियर की मजबूत नींव रखी।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनका आगाज़ भी उतना ही प्रभावशाली रहा। 2010 में वनडे डेब्यू और 2014 में ब्रिस्बेन के गाबा मैदान पर भारत के खिलाफ टेस्ट डेब्यू में पहली पारी में 5 विकेट लेकर उन्होंने अपनी धमाकेदार एंट्री दर्ज कराई। उसी टेस्ट में कुल 7 विकेट लेकर उन्होंने मैच का रुख बदल दिया। 2015 विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ क्वार्टरफाइनल में 4 विकेट लेकर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। डे-नाइट टेस्ट में 6/70 के ऐतिहासिक आंकड़े दर्ज करते हुए उन्होंने न सिर्फ पहला पांच विकेट हॉल लिया बल्कि 12 टेस्ट में 50 विकेट पूरे कर महान गेंदबाज़ों जैसे Glenn McGrath से भी तेज़ यह उपलब्धि हासिल की।
हेज़लवुड का करियर सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने कई अनोखे रिकॉर्ड भी बनाए। 2017 में न्यूजीलैंड के खिलाफ एक वनडे मैच में बिना एक भी गेंद खेले 54 रन की साझेदारी का हिस्सा बनना और डायमंड डक पर आउट होना क्रिकेट इतिहास की दुर्लभ घटनाओं में शामिल है। उन्होंने 33 मैचों तक वनडे में आउट न होने का रिकॉर्ड भी बनाया। 2019 एशेज में 4 मैचों में 20 विकेट लेकर उन्होंने इंग्लैंड में अपनी क्षमता का लोहा मनवाया, जबकि 2020-21 बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में भारत के खिलाफ 5/8 की घातक स्पेल ने विपक्ष को 36 रन पर समेट दिया।
2018 के बॉल टैंपरिंग विवाद के बाद जब Steve Smith और David Warner को पद छोड़ना पड़ा, तब हेज़लवुड को टीम की जिम्मेदारी सौंपी गई और उन्होंने टेस्ट उपकप्तान की भूमिका निभाई। सीमित ओवरों में भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी और एकदिवसीय में कप्तानी का अनुभव हासिल किया। फ्रेंचाइज़ी क्रिकेट में भी वह सफल रहे, खासकर आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के लिए 2025 में सबसे ज्यादा विकेट लेकर टीम को पहला खिताब जिताने में अहम भूमिका निभाई।
हालांकि, उनका करियर चोटों से भी प्रभावित रहा। पीठ, हैमस्ट्रिंग और अकिलिस इंजरी के चलते कई अहम सीरीज और टूर्नामेंट मिस करने पड़े, जिसमें 2026 टी20 विश्व कप भी शामिल है। इसके बावजूद 200 से ज्यादा टेस्ट विकेट, आईसीसी के तीनों फॉर्मेट में शीर्ष रैंकिंग और लगातार प्रदर्शन ने उन्हें इस पीढ़ी के सबसे भरोसेमंद तेज़ गेंदबाज़ों में शामिल कर दिया है। हेज़लवुड की कहानी केवल आंकड़ों की नहीं, बल्कि अनुशासन, धैर्य और निरंतरता की मिसाल है, जिसने उन्हें विश्व क्रिकेट का सुपरस्टार बना दिया।

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