कौन हैं Jemimah Rodrigues? भारतीय महिला क्रिकेट की निडर बल्लेबाज़ जिसने दुनिया को अपना मुरीद बना दिया
मुंबई से विश्व कप तक जेमिमा रोड्रिग्स का सफर, 2025 में ऐतिहासिक शतक और महिला प्रीमियर लीग में दिल्ली कैपिटल्स की कप्तानी तक की पूरी कहानी।

भारतीय महिला क्रिकेट में पिछले कुछ वर्षों में जिस युवा बल्लेबाज़ ने अपनी आक्रामक शैली, आत्मविश्वास और बड़े मैचों में दमदार प्रदर्शन से अलग पहचान बनाई है, उनमें Jemimah Rodrigues का नाम सबसे प्रमुख माना जाता है। मिडिल ऑर्डर में बल्लेबाज़ी करते हुए उन्होंने भारतीय टीम को कई ऐतिहासिक जीत दिलाई हैं और 2025 महिला क्रिकेट विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का अहम हिस्सा बनकर खुद को वैश्विक मंच पर स्थापित किया। 2022 एशिया कप, 2022 एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक और 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स का रजत पदक उनके करियर की उन उपलब्धियों में शामिल हैं जिन्होंने उन्हें भारतीय महिला क्रिकेट की नई पीढ़ी का चेहरा बना दिया। अपनी निर्भीक बल्लेबाज़ी, तेज रन गति और दबाव में मैच फिनिश करने की क्षमता के कारण जेमिमा आज भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर की फ्रेंचाइज़ी क्रिकेट लीगों की भी पसंदीदा खिलाड़ी बन चुकी हैं।
5 सितंबर 2000 को मुंबई के भांडुप में जन्मी जेमिमा जेसिका रोड्रिग्स का क्रिकेट सफर बेहद कम उम्र में शुरू हो गया था। उनके पिता इवान रोड्रिग्स स्कूल स्तर पर क्रिकेट कोच थे और उन्होंने ही जेमिमा की प्रतिभा को सबसे पहले पहचाना। परिवार ने बच्चों को बेहतर खेल सुविधाएं दिलाने के लिए बांद्रा का रुख किया, जहां जेमिमा अपने भाइयों के साथ घंटों क्रिकेट खेला करती थीं। क्रिकेट के अलावा उन्होंने फुटबॉल, बास्केटबॉल और हॉकी में भी राज्य स्तर तक प्रतिनिधित्व किया, लेकिन अंततः क्रिकेट ही उनका भविष्य बना। महज 13 साल की उम्र में अंडर-19 क्रिकेट में पदार्पण करने वाली जेमिमा ने जल्द ही घरेलू क्रिकेट में अपने रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन से चयनकर्ताओं का ध्यान खींच लिया। 2017 में गुजरात के खिलाफ 142 गेंदों पर 178 रन और फिर सौराष्ट्र के खिलाफ 163 गेंदों में 202 रन की विस्फोटक पारी ने उन्हें देश की सबसे चर्चित युवा बल्लेबाज़ बना दिया। वह स्मृति मंधाना के बाद 50 ओवर क्रिकेट में दोहरा शतक लगाने वाली दूसरी भारतीय महिला क्रिकेटर बनीं और 2018 में उन्हें बीसीसीआई का जगमोहन डालमिया अवॉर्ड भी मिला।
घरेलू क्रिकेट में धमाकेदार प्रदर्शन के बाद 2018 में दक्षिण अफ्रीका दौरे पर उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली। 13 फरवरी 2018 को टी20 अंतरराष्ट्रीय पदार्पण मैच में 37 रन बनाकर उन्होंने तुरंत प्रभाव छोड़ा, जबकि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने शुरुआती अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में ही उन्होंने अर्धशतक जड़कर यह संकेत दे दिया कि वह लंबी रेस की खिलाड़ी हैं। श्रीलंका के खिलाफ 2018 की टी20 सीरीज़ में 191 रन बनाकर वह सर्वाधिक रन बनाने वाली बल्लेबाज़ रहीं। उसी वर्ष वेस्टइंडीज में हुए आईसीसी महिला टी20 विश्व कप में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने उन्हें ‘प्लेयर टू वॉच’ बताया और उन्होंने पांच मैचों में 125 रन बनाकर इस भरोसे को सही साबित किया। 2020 टी20 विश्व कप में भारत को फाइनल तक पहुंचाने में भी उनकी अहम भूमिका रही। हालांकि उनके करियर में उतार-चढ़ाव भी आए, लेकिन उन्होंने हर बार वापसी कर खुद को और मजबूत साबित किया।
जेमिमा का करियर 2025 में एक नए शिखर पर पहुंचा जब उन्होंने आयरलैंड के खिलाफ राजकोट में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय शतक लगाया और फिर श्रीलंका में आयोजित त्रिकोणीय सीरीज़ में 245 रन बनाकर भारतीय बल्लेबाज़ी की रीढ़ साबित हुईं। उसी वर्ष महिला क्रिकेट विश्व कप के सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेली गई उनकी नाबाद 127 रन की पारी भारतीय महिला क्रिकेट इतिहास की सबसे यादगार पारियों में गिनी जाने लगी। भारत ने 339 रन का ऐतिहासिक लक्ष्य हासिल कर ऑस्ट्रेलिया को विश्व कप में पहली बार हराया और जेमिमा को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। कप्तान Harmanpreet Kaur के साथ उनकी 167 रन की साझेदारी ने इतिहास रच दिया। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका को हराकर भारत ने पहली बार महिला क्रिकेट विश्व कप का खिताब जीता और जेमिमा भारतीय क्रिकेट की नई सुपरस्टार बनकर उभरीं।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के साथ-साथ फ्रेंचाइज़ी क्रिकेट में भी जेमिमा का दबदबा लगातार बढ़ता गया। महिला टी20 चैलेंज में सुपरनोवास और ट्रेलब्लेज़र्स के लिए खेलते हुए उन्होंने अपनी विस्फोटक बल्लेबाज़ी का प्रदर्शन किया। इंग्लैंड की ‘द हंड्रेड’ प्रतियोगिता में नॉर्दर्न सुपरचार्जर्स के लिए खेलते हुए उन्होंने 92 रन की पारी खेली, जो उस सीज़न का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर था। ऑस्ट्रेलिया की महिला बिग बैश लीग में मेलबर्न रेनेगेड्स के लिए 13 मैचों में 333 रन बनाकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पहचान को और मजबूत किया, जबकि बाद में ब्रिस्बेन हीट ने उन्हें बड़ी रकम में अपनी टीम में शामिल किया। महिला प्रीमियर लीग में दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें 2.2 करोड़ रुपये में खरीदा और तीन सीज़न में 527 रन बनाने के बाद 2026 सीज़न के लिए उन्हें टीम का कप्तान नियुक्त किया गया। कप्तान के रूप में उन्होंने दिल्ली को फाइनल तक पहुंचाया और खुद अर्धशतक लगाकर अपनी नेतृत्व क्षमता का भी परिचय दिया।
क्रिकेट के मैदान के बाहर भी जेमिमा का जीवन आसान नहीं रहा। 2024 में सोशल मीडिया पर उन्हें साइबर बुलिंग का सामना करना पड़ा, जिसने उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया। लेकिन इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने खुद को संभाला और मैदान पर अपने प्रदर्शन से जवाब दिया। यही कारण है कि जेमिमा रोड्रिग्स आज केवल एक क्रिकेटर नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास और नई भारतीय महिला क्रिकेट की पहचान बन चुकी हैं। उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा के साथ अनुशासन, मेहनत और मानसिक मजबूती जुड़ जाए तो कोई भी खिलाड़ी विश्व क्रिकेट के शिखर तक पहुंच सकता है।

Pratahkal Bureau
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