कौन हैं जयदेव उनादकट? 12 साल बाद वापसी कर लिखी जिद और जज्बे की नई इबारत
सौराष्ट्र के कप्तान जयदेव उनादकट ने घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन और 12 साल के लंबे इंतजार के बाद भारतीय टेस्ट टीम में अपनी जगह दोबारा हासिल की।

भारतीय तेज गेंदबाज जयदेव उनादकट अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैच की तैयारी के दौरान स्टेडियम में अभ्यास सत्र में भाग लेते हुए।
भारतीय क्रिकेट में कई ऐसे नाम हैं जो सुर्खियों में लगातार बने रहते हैं, लेकिन कुछ खिलाड़ी ऐसे भी होते हैं जिनकी कहानी संघर्ष, धैर्य और वापसी की मिसाल बन जाती है। जयदेव उनादकट उन्हीं खिलाड़ियों में से एक हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लंबा इंतजार झेला, लेकिन घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में अपने प्रदर्शन से खुद को बार-बार साबित किया। 2022 में 12 साल बाद टेस्ट टीम में उनकी वापसी सिर्फ एक चयन नहीं, बल्कि उनके धैर्य और निरंतर मेहनत का सबसे बड़ा प्रमाण बन गई।
सौराष्ट्र के इस बाएं हाथ के तेज गेंदबाज की कहानी वर्तमान से पीछे की ओर देखने पर और भी दिलचस्प हो जाती है। 18 अक्टूबर 1991 को जन्मे उनादकट ने 2010 में अंडर-19 विश्व कप के जरिए अपनी पहचान बनाई, जहां उन्होंने भारत के लिए गेंदबाजी आक्रमण की अगुवाई की। उसी साल वेस्टइंडीज अंडर-19 के खिलाफ अपने फर्स्ट क्लास डेब्यू में 13 विकेट लेकर उन्होंने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा और जल्द ही दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सेंचुरियन टेस्ट में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा। हालांकि, यह शुरुआत जितनी तेज थी, आगे का सफर उतना ही चुनौतीपूर्ण साबित हुआ।
आईपीएल में उनका सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा, लेकिन इसी मंच ने उन्हें पहचान भी दिलाई। 2013 में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने उन्हें महंगे दामों में खरीदा, जहां उन्होंने दिल्ली के खिलाफ 5/25 का शानदार प्रदर्शन कर सुर्खियां बटोरीं। इसके बाद दिल्ली, कोलकाता और राइजिंग पुणे सुपरजायंट्स जैसी टीमों के साथ जुड़ते हुए उन्होंने 2017 सीजन में 24 विकेट लिए और सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ आखिरी ओवर में हैट्रिक लेकर अपनी टी20 काबिलियत का लोहा मनवाया। 2018 की नीलामी में राजस्थान ने उन्हें 11.5 करोड़ रुपये में खरीदा, जो उस समय उन्हें सबसे महंगे भारतीय खिलाड़ियों में शामिल करता था।
घरेलू क्रिकेट में जयदेव उनादकट की असली ताकत नजर आती है। सौराष्ट्र के लिए खेलते हुए उन्होंने रणजी ट्रॉफी में 200 विकेट का आंकड़ा पार किया और 2019-20 सीजन में 10 मैचों में 67 विकेट लेकर सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बने। मार्च 2020 में उन्होंने सौराष्ट्र को पहली बार रणजी ट्रॉफी जिताकर कप्तान के रूप में इतिहास रच दिया। यह उपलब्धि उन्हें घरेलू क्रिकेट के सबसे सफल कप्तानों में शामिल करती है और उनकी रणनीतिक समझ को भी दर्शाती है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भले ही मौके सीमित रहे, लेकिन 2016 में जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 डेब्यू और फिर 2022 में बांग्लादेश के खिलाफ मीरपुर टेस्ट में वापसी ने यह साबित किया कि वह कभी हार नहीं मानते। 6 फीट 3 इंच लंबे इस गेंदबाज की स्विंग और सीम पर नियंत्रण, साथ ही उनकी फील्डिंग क्षमता, उन्हें एक संपूर्ण खिलाड़ी बनाती है। लंबे इंतजार के बाद मिली टेस्ट वापसी उनके करियर का भावनात्मक और ऐतिहासिक मोड़ बन गई।
हाल के वर्षों में भी उनका प्रदर्शन लगातार प्रभावशाली रहा है। आईपीएल 2025 में उन्होंने सिर्फ सात मैचों में 11 विकेट लेकर अपनी उपयोगिता साबित की, जबकि रणजी ट्रॉफी 2025-26 में सात मैचों में 20 विकेट झटके। सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में भी वह सौराष्ट्र के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे। यही निरंतरता उन्हें आईपीएल 2026 के लिए सनराइजर्स हैदराबाद में बनाए रखने की वजह बनी।
जयदेव उनादकट की कहानी सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस जिद की कहानी है जो असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानती। अंडर-19 स्टार से लेकर रणजी ट्रॉफी विजेता कप्तान और 12 साल बाद टेस्ट वापसी तक का उनका सफर भारतीय क्रिकेट में प्रेरणा का एक मजबूत अध्याय बन चुका है।

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