भारतीय क्रिकेट में जब भी लंबे कद, तेज रफ्तार और निरंतरता की बात होती है, तो सबसे पहले नाम Ishant Sharma का सामने आता है। 6 फीट 4 इंच लंबे इस तेज गेंदबाज ने अपनी लय, सटीकता और अथक मेहनत के दम पर भारतीय टेस्ट क्रिकेट में एक मजबूत पहचान बनाई है। 2021 में टेस्ट क्रिकेट में 300 विकेट पूरे करने वाला यह गेंदबाज न केवल भारत के सबसे भरोसेमंद पेसरों में गिना जाता है, बल्कि 2013 आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी जीतने वाली टीम का अहम हिस्सा भी रहा। उनकी गेंदबाजी में 150 किमी/घंटा से अधिक की रफ्तार और लंबे स्पैल डालने की क्षमता ने उन्हें एक ‘वर्कहॉर्स’ गेंदबाज के रूप में स्थापित किया।

दिल्ली में 2 सितंबर 1988 को जन्मे ईशांत शर्मा का क्रिकेट सफर बेहद कम उम्र में शुरू हो गया था। महज 18 साल की उम्र में उन्होंने घरेलू क्रिकेट में दिल्ली के लिए पदार्पण किया और जल्द ही अपनी प्रतिभा के दम पर भारतीय टीम में जगह बनाई। 2007 में बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट डेब्यू करने वाले ईशांत ने शुरुआत में संघर्ष जरूर किया, लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ अपने दूसरे ही टेस्ट में 5 विकेट लेकर उन्होंने चयनकर्ताओं का भरोसा जीत लिया। इसके बाद 2008 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर उन्होंने जिस तरह से रिकी पोंटिंग को परेशान किया, वह उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पर्थ टेस्ट में उनका घातक स्पैल, जिसमें उन्होंने पोंटिंग का विकेट लिया, आज भी भारतीय क्रिकेट इतिहास के यादगार पलों में गिना जाता है। उसी साल भारत में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज में 16 विकेट लेकर वह मैन ऑफ द सीरीज बने और कपिल देव के बाद घरेलू सरजमीं पर यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले भारतीय तेज गेंदबाज बने। इसके साथ ही उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में अपनी मजबूत नींव रखी और जल्द ही 100 विकेट का आंकड़ा छूकर इतिहास में सबसे कम उम्र में यह उपलब्धि हासिल करने वाले पांचवें गेंदबाज बन गए।

हालांकि 2009 के बाद उनके करियर में गिरावट भी आई, चोटों और खराब फॉर्म ने उन्हें टीम से बाहर कर दिया। 2012 में टखने की सर्जरी के बाद उनका करियर एक नए मोड़ पर आया। 2014 के इंग्लैंड दौरे पर लॉर्ड्स टेस्ट में 7/74 का करियर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर उन्होंने जोरदार वापसी की और भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई। इसके बाद श्रीलंका, वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के दौरों पर लगातार अच्छे प्रदर्शन के दम पर उन्होंने 200, 250 और फिर 300 टेस्ट विकेट पूरे किए, जो उनकी दृढ़ता और निरंतरता का प्रमाण है।

ईशांत शर्मा का करियर सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में टीम को संभालने की जिम्मेदारी भी निभाई। 2010 में मोहाली टेस्ट में 31 रन की अहम पारी खेलकर वीवीएस लक्ष्मण के साथ भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाना उनके हरफनमौला योगदान को दर्शाता है। 100 टेस्ट मैच खेलने वाले चुनिंदा भारतीय गेंदबाजों में शामिल ईशांत ने अपने अनुभव और कौशल से नई पीढ़ी के गेंदबाजों को भी प्रेरित किया है।

आईपीएल में भी उन्होंने कोलकाता नाइट राइडर्स, डेक्कन चार्जर्स, किंग्स इलेवन पंजाब, दिल्ली कैपिटल्स और गुजरात टाइटंस जैसी टीमों के लिए खेलते हुए अपनी उपयोगिता साबित की। 2020 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किए गए ईशांत ने यह साबित किया कि निरंतर मेहनत और धैर्य के दम पर लंबे समय तक शीर्ष स्तर पर बने रहना संभव है। आज भले ही वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर हों, लेकिन एक अनुभवी मार्गदर्शक और भरोसेमंद गेंदबाज के रूप में उनकी भूमिका अब भी बेहद अहम है।

Pratahkal Newsroom

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