भारतीय क्रिकेट के मौजूदा दौर में Ishan Kishan एक ऐसे नाम के रूप में उभरे हैं, जिन्होंने अपनी विस्फोटक बल्लेबाज़ी, तेज़ विकेटकीपिंग और मुश्किल हालात से उबरने की क्षमता के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर खास पहचान बनाई है। 2026 टी20 विश्व कप में भारत की खिताबी जीत में अहम भूमिका निभाते हुए उन्होंने लगातार मैच जिताऊ पारियां खेलीं, जिनमें पाकिस्तान के खिलाफ 77 रनों की पारी और नामीबिया के खिलाफ 61 रन की तेज़ पारी शामिल रही। यही नहीं, न्यूजीलैंड के खिलाफ 43 गेंदों में 103 रन की उनकी शतकीय पारी ने यह साबित कर दिया कि वह बड़े मंच के खिलाड़ी हैं।

लेकिन इस सफलता की कहानी सीधी नहीं रही। बिहार के पटना में 18 जुलाई 1998 को जन्मे ईशान किशन का शुरुआती सफर संघर्षों से भरा था। बिहार क्रिकेट संघ और बीसीसीआई के बीच विवाद के चलते उन्हें झारखंड के लिए खेलना पड़ा। यहीं से उन्होंने अपने करियर को नई दिशा दी और घरेलू क्रिकेट में धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए पहचान बनाई। 2016 अंडर-19 विश्व कप में भारत की कप्तानी करते हुए उन्होंने नेतृत्व क्षमता दिखाई, हालांकि असली चमक रणजी ट्रॉफी में आई, जहां उन्होंने 2016-17 सीजन में दिल्ली के खिलाफ 273 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली।

घरेलू क्रिकेट में निरंतर प्रदर्शन ने उन्हें आईपीएल तक पहुंचाया, जहां शुरुआत गुजरात लायंस से हुई, लेकिन असली पहचान मुंबई इंडियंस के साथ बनी। 2020 आईपीएल में उन्होंने 14 मैचों में 516 रन बनाकर खुद को टीम का सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज़ साबित किया। इसके बाद 2022 में उन्हें 15.25 करोड़ रुपये में खरीदा गया, जो उनकी बढ़ती साख का प्रमाण था। 2025 में सनराइजर्स हैदराबाद के लिए खेलते हुए उन्होंने अपने पहले ही मैच में शतक जड़कर यह दिखा दिया कि वह किसी भी टीम के लिए गेम-चेंजर बन सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनका आगाज़ मार्च 2021 में इंग्लैंड के खिलाफ हुआ, जहां उन्होंने 32 गेंदों में 56 रन बनाकर ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ जीता। इसके बाद जुलाई 2021 में वनडे डेब्यू में 42 गेंदों पर 59 रन की पारी खेली। लेकिन असली धमाका दिसंबर 2022 में बांग्लादेश के खिलाफ हुआ, जब उन्होंने 131 गेंदों में 210 रन ठोककर इतिहास रच दिया। इस पारी के साथ वह सबसे तेज़ वनडे दोहरा शतक लगाने वाले खिलाड़ी बने और ऐसा करने वाले सबसे युवा बल्लेबाज़ भी बने। साथ ही, वह पहले खिलाड़ी बने जिन्होंने अपने पहले वनडे शतक को दोहरे शतक में बदला।

हालांकि, 2023 के बाद उनका करियर एक मुश्किल दौर से गुज़रा। लगातार अच्छे प्रदर्शन के बावजूद टीम से बाहर रहना, मानसिक दबाव और बीसीसीआई कॉन्ट्रैक्ट से बाहर होना उनके लिए बड़ा झटका था। उन्होंने क्रिकेट से ब्रेक लिया और खुद को मानसिक रूप से मजबूत करने के लिए आध्यात्म का सहारा लिया। यह दौर उनके करियर का सबसे कठिन समय रहा, लेकिन यहीं से उन्होंने वापसी की नींव रखी।

2025-26 सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में झारखंड की कप्तानी करते हुए उन्होंने 10 पारियों में 517 रन बनाए, औसत 57.44 और स्ट्राइक रेट 197.32 के साथ टूर्नामेंट के सबसे सफल बल्लेबाज़ बने। फाइनल में 49 गेंदों पर 101 रन की पारी खेलकर उन्होंने अपनी टीम को पहला खिताब दिलाया। इस प्रदर्शन के बाद चयनकर्ताओं ने उन्हें फिर से भारतीय टीम में मौका दिया और उन्होंने मौके को दोनों हाथों से भुनाते हुए खुद को एक बार फिर साबित किया।

आज ईशान किशन को MS Dhoni की तरह एक निडर और मैच फिनिशर खिलाड़ी के रूप में देखा जाता है, जिनकी जड़ें भले ही छोटे शहर से जुड़ी हों, लेकिन उनकी सोच और खेल का स्तर वैश्विक है। उनकी कहानी सिर्फ रन और रिकॉर्ड की नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास और वापसी की मिसाल है, जिसने उन्हें भारतीय क्रिकेट के भविष्य का अहम स्तंभ बना दिया है।

Pratahkal Newsroom

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