हार के बाद ईरानी खिलाड़ियों पर मंडराया संकट; ऑस्ट्रेलिया बना आखिरी उम्मीद
एशियाई कप के बाद ईरानी महिला फुटबॉल टीम की सुरक्षा पर संकट। राष्ट्रगान के विरोध के बाद 'गद्दार' करार। ऑस्ट्रेलिया से खिलाड़ियों को बचाने और शरण देने की वैश्विक मांग।

Iran Womens Football Team Safety
Iran Womens Football Team Safety : खेल का मैदान अक्सर जीत और हार की कहानियों के लिए जाना जाता है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया में चल रहे एशियाई कप से ईरान की महिला फुटबॉल टीम की विदाई ने एक ऐसी मानवीय और कूटनीतिक हलचल पैदा कर दी है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। रविवार शाम जब गोल्ड कोस्ट स्टेडियम से ईरानी टीम की बस बाहर निकली, तो वहां का नजारा किसी भावुक युद्ध क्षेत्र जैसा था। सैकड़ों समर्थक बारिश में भीगते हुए चिल्ला रहे थे— "हमारी लड़कियों को बचाओ।" यह महज एक खेल टीम की विदाई नहीं थी, बल्कि उन खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए एक वैश्विक पुकार थी, जिन्हें अपने ही देश में 'गद्दार' करार दिया जा रहा है।
राष्ट्रगान का विरोध और 'गद्दार' होने का आरोप :
इस पूरे विवाद की जड़ पिछले सप्ताह दक्षिण कोरिया के खिलाफ मैच के दौरान शुरू हुई, जब ईरानी महिला टीम ने मैदान पर राष्ट्रगान गाने से इनकार कर दिया। यह कदम ईरान में चल रहे नागरिक अधिकारों के संघर्ष के प्रति एक मौन समर्थन माना गया। हालांकि, इस साहसी कदम ने ईरान के भीतर कट्टरपंथी खेमों को नाराज कर दिया है। एक प्रमुख रूढ़िवादी टिप्पणीकार ने टीम पर "युद्धकालीन गद्दार" होने का आरोप लगाते हुए उन्हें कड़ी सजा देने की मांग की है।
दिलचस्प और दुखद पहलू यह रहा कि अगले दो मैचों में टीम ने राष्ट्रगान भी गाया और सलामी भी दी। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और समर्थकों का मानना है कि खिलाड़ियों को ऐसा करने के लिए टीम के साथ आए 'ईरानी क्रांतिकारी गार्ड कोर' (IRGC) के सदस्यों द्वारा मजबूर किया गया था। स्टेडियम में मौजूद प्रशंसकों ने पुराने 'शेर और सूर्य' वाले झंडे फहराकर खिलाड़ियों का समर्थन किया, जबकि आधिकारिक नियमों के तहत केवल वर्तमान ईरानी ध्वज की अनुमति थी।
शरण की मांग और मानवाधिकारों का पेच :
ऑस्ट्रेलियाई पुरुष टीम के पूर्व कप्तान और मशहूर मानवाधिकार कार्यकर्ता क्रेग फोस्टर ने खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने खुलासा किया कि टीम प्रबंधन ने खिलाड़ियों को होटल में एक तरह से 'बंधक' बना रखा है और उन्हें बाहरी दुनिया, वकीलों या अपने परिवारों से बात करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। ऑस्ट्रेलिया में अब सरकार पर यह दबाव बढ़ रहा है कि:
- सुरक्षा का अधिकार : फीफा के नियमों के तहत हर खिलाड़ी को टूर्नामेंट के दौरान और बाद में सुरक्षा का पूर्ण अधिकार है।
- शरण का विकल्प : मानवाधिकार संगठन मांग कर रहे हैं कि यदि कोई खिलाड़ी वापस ईरान नहीं जाना चाहता, तो उसे ऑस्ट्रेलिया में राजनीतिक शरण दी जाए।
- पारिवारिक सुरक्षा : सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यदि खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया में रुकते हैं, तो ईरान में मौजूद उनके परिवारों और बच्चों पर जानलेवा खतरा मंडरा सकता है।
सरकार की चुप्पी और अनिश्चित भविष्य :
ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने कहा है कि उनका देश ईरानी महिलाओं और लड़कियों के साथ एकजुटता से खड़ा है, लेकिन खिलाड़ियों को शरण देने के मुद्दे पर सरकार ने अभी तक कोई स्पष्ट कानूनी कदम नहीं उठाया है। दूसरी ओर, टीम की मैनेजर मरज़ियेह जाफ़री ने आधिकारिक बयान में कहा है कि वे जल्द से जल्द वतन लौटना चाहती हैं। सोमवार को टीम के पांच सितारा होटल के बाहर संघीय पुलिस का कड़ा पहरा देखा गया, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
