वर्ल्ड बॉक्सिंग कप में भारत की धमाकेदार जीत; एक ही दिन में मिले चार गोल्ड पदक
वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल में भारतीय महिला मुक्केबाज़ों ने चार स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। मीनाक्षी, प्रीति, अरुंधति और नूपुर ने 5-0 की एकतरफा जीतों से देश का सिर ऊंचा किया, जबकि जदुमणि फाइनल में हार गईं। शहीद विजय सिंह पथिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में भारत की इस सुनहरी सफलता ने खेल जगत में नई उम्मीदें जगाई हैं।

शहीद विजय सिंह पथिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में गुरुवार का दिन भारतीय मुक्केबाज़ी के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया। वर्ल्ड बॉक्सिंग कप के फाइनल मुकाबलों में भारत की महिला मुक्केबाज़ों ने ऐसा दबदबा दिखाया कि पूरा स्टेडियम गर्व और उत्साह से गूंज उठा। चार अलग-अलग भार वर्गों में खेले गए मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों ने चार स्वर्ण पदक जीतकर दुनिया को अपनी ताकत का एहसास कराया।
भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक मीनाक्षी हुड्डा ने 48 किलोग्राम वर्ग में दिलाया। उन्होंने उज्बेकिस्तान की फोजिलोवा फरजोना को 5-0 से मात देकर शानदार शुरुआत की। जीत के बाद भावुक और खुश मीनाक्षी ने कहा कि घरेलू दर्शकों का समर्थन उनके लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं था। कोच विजय हुड्डा और ITBP, SAI, OGQ तथा BFI का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि फाइनल से पहले भले ही वह नर्वस थीं, लेकिन दर्शकों के हौंसले ने उन्हें स्वर्ण जीतने की ऊर्जा दी।
दिन का दूसरा स्वर्ण प्रीति ने 54 किलोग्राम वर्ग में इटली की सिरीन चाराबी को 5-0 से हराकर जीता। इसके बाद भारतीय समर्थकों की उम्मीदें और ऊंची हो गईं, और तीसरे फाइनल में अरुंधति चौधरी ने 70 किलोग्राम वर्ग में उज्बेकिस्तान की जोकिरोवा अजीजा को उसी अंतर से पछाड़कर भारत की बढ़त को और मजबूत किया। अरुंधति ने कहा कि यह जीत केवल स्वर्ण पदक नहीं, बल्कि पिछले डेढ़ साल से चले आ रहे तनाव और संघर्ष पर विजय का प्रतीक है।
भारत की चौथी स्वर्ण विजेता बनीं नूपुर, जिन्होंने 80+ किलोग्राम वर्ग में उज्बेकिस्तान की सोटिम्बोएवा ओल्टिनोय को 5-0 से हराया। नूपुर ने बताया कि पिछली बार रजत जीतने के बाद उन्होंने स्वर्ण का वादा किया था। उस समय आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन इस जीत ने वह वादा पूरा कर दिया।
दिन के अंत में जदुमणि भी फाइनल में उतरीं, लेकिन 50 किलोग्राम वर्ग में उज्बेकिस्तान की असिलबेक जलीलोवा से उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद भारतीय टीम के चार स्वर्ण पदक देश की महिला मुक्केबाज़ी के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि साबित हुए।
महिला खिलाड़ियों की इस सामूहिक जीत ने न केवल भारत का गौरव बढ़ाया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि भारतीय मुक्केबाज़ दुनिया के किसी भी मंच पर चुनौती देने में सक्षम हैं। यह प्रदर्शन भविष्य की बड़ी उम्मीदों को जन्म देता है और भारतीय खेल जगत में एक नई ऊर्जा का संचार करता है।
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Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
