लगातार तीसरी हार से भारत की टी20 में फिसली साख, मध्यक्रम की बल्लेबाजी बनी बड़ी चिंता
लगातार तीन हार के बाद भारतीय टी20 टीम के सामने मध्यक्रम का गहराता संकट एक बड़ी चुनौती बन गया है। क्या भारत ट्रेंट ब्रिज में इंग्लैंड के खिलाफ अपनी लय वापस पा सकेगा या यह हार का सिलसिला और लंबा चलेगा? जानिए टीम इंडिया की मौजूदा स्थिति का पूरा विश्लेषण।

मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी एक साथ चर्चा करते हुए।
मैनचेस्टर में इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में मिली हार के बाद भारतीय टीम लगातार तीन पूर्ण टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच हार चुकी है। आयरलैंड के खिलाफ सीरीज गंवाने से पहले भारत को अगस्त 2023 में वेस्टइंडीज के हाथों लगातार दो टी20 मैचों में हार का सामना करना पड़ा था। उस समय भारत ने लगातार दो टी20 विश्व कप नहीं जीते थे और सूर्यकुमार यादव सबसे शानदार टी20 बल्लेबाजों में शामिल थे, जबकि वैभव सूर्यवंशी का नाम क्रिकेट जगत में बहुत कम लोग जानते थे। आज की स्थिति यह है कि भारत दो बार का टी20 विश्व चैंपियन है। इस साल की शुरुआत में टीम को विश्व विजेता बनाने वाले सूर्यकुमार यादव की बल्लेबाजी में गिरावट के कारण न केवल उनकी कप्तानी छिन गई, बल्कि उन्हें टीम से भी बाहर होना पड़ा। वहीं, आईपीएल में शानदार प्रदर्शन के दम पर वैभव सूर्यवंशी ने मैनचेस्टर में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया।
भारत के लिए लगातार तीन मैच हारने का यह सिलसिला जुलाई-नवंबर 2021 के बाद पहली बार देखने को मिला है। उस दौरान भारत को लगातार चार टी20 मैचों में हार झेलनी पड़ी थी, जिसमें श्रीलंका के खिलाफ दो द्विपक्षीय मैच और दुबई में टी20 विश्व कप अभियान की शुरुआत में पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के खिलाफ मिली हार शामिल थी। ओल्ड ट्रैफर्ड की पिच पर असमान उछाल के बीच सैम करन ने भारतीय मध्यक्रम की पोल खोल दी। शिवम दुबे, जो तिलक वर्मा से पहले बल्लेबाजी करने आए थे, गेंद को बल्ले से जोड़ने के लिए संघर्ष करते दिखे। हालांकि दुबे की पारी केवल सात गेंदों की थी, लेकिन उनका क्रीज पर टिकना बेहद निराशाजनक रहा। पिछले दो भारतीय मैचों से यह स्पष्ट है कि मध्यक्रम में रन बनाने की गति काफी धीमी हो गई है। चेस्टर-ले-स्ट्रीट में भारत 8 ओवर के बाद 87/2 के स्कोर पर था, लेकिन अगले छह ओवरों में दो विकेट खोकर केवल 38 रन ही बना सका। अभिषेक शर्मा का विकेट गिरने के बाद हैरी ब्रूक ने भारतीय बल्लेबाजों को संभलने का मौका नहीं दिया और 9वें से 14वें ओवर के बीच सैम करन, लियाम डॉसन, आदिल राशिद, विल जैक्स और साकिब महमूद जैसे पांच अलग-अलग गेंदबाजों का इस्तेमाल किया।
मैनचेस्टर में भी यही पैटर्न दोहराया गया, जहां भारत 13वें ओवर की आखिरी गेंद पर श्रेयस अय्यर के आउट होने तक 130/2 के मजबूत स्कोर पर था। इसके बाद अगली 35 गेंदों में मेहमान टीम केवल 36 रन जोड़ सकी और उसने 3 विकेट गंवा दिए। दोनों पिछले मैचों में अंत में कुछ रन जरूर बने, लेकिन बल्लेबाजों में मैच की समझ का अभाव दिखा। पहले टी20 में शिवम दुबे ने 19 गेंदों में 34 रन बनाए थे और उन्हें आखिरी ओवर की बाकी गेंदें खेलनी चाहिए थीं, लेकिन उन्होंने दूसरी गेंद पर सिंगल ले लिया। इसी तरह मैनचेस्टर में तिलक वर्मा ने आखिरी ओवर की पहली तीन गेंदों पर 16 रन लिए थे, जिसके बाद उन्हें बाकी गेंदें खेलनी चाहिए थीं, लेकिन उन्होंने भी सिंगल ले लिया। मैनचेस्टर में मिली जीत ने इंग्लैंड के लिए राहत का काम किया है। लॉर्ड्स टेस्ट के बाद से ही इंग्लैंड क्रिकेट टीम काफी दबाव में थी, और यह नतीजा उनके लिए बड़ी राहत लेकर आया है। इससे टीम प्रबंधन को बेन स्टोक्स के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के बाद सभी प्रारूपों की कप्तानी से जुड़े सवालों को हल करने का भी समय मिल गया है। दूसरी ओर, ट्रेंट ब्रिज में इंग्लैंड का सामना करने के लिए तैयार भारत को उम्मीद होगी कि दक्षिण की ओर उनकी यह यात्रा हार का सिलसिला तोड़ेगी और उत्तर तथा आयरिश सागर के पार हुई घटनाएं महज एक अस्थायी दौर साबित होंगी।

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