India bid for 2038 Asian Games : वैश्विक खेल मानचित्र पर एक महाशक्ति के रूप में उभरने की अपनी महत्वाकांक्षी रणनीति के तहत, भारत ने वर्ष 2038 के एशियाई खेलों (Asiad) की मेजबानी के लिए आधिकारिक तौर पर अपनी दावेदारी पेश कर दी है। भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) ने इस संबंध में ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया (OCA) को 'रुचि की अभिव्यक्ति' (EOI) का औपचारिक प्रस्ताव सौंप दिया है। यह कदम केवल एक खेल आयोजन की मेजबानी मात्र नहीं है, बल्कि यह 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी हासिल करने के भारत के व्यापक विजन का एक महत्वपूर्ण आधार स्तंभ माना जा रहा है। चीन के सान्या शहर में आयोजित ओसीए की कार्यकारी बोर्ड की बैठक के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने इस प्रस्ताव को प्रस्तुत किया, जिस पर गंभीरता से चर्चा की गई है।

भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा के नेतृत्व में भारत ने अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है कि देश अब बड़े अंतरराष्ट्रीय बहु-खेल आयोजनों के लिए पूरी तरह तैयार है। आईओए के सीईओ रघुराम अय्यर ने पुष्टि की है कि यद्यपि यह प्रक्रिया अभी अपने शुरुआती चरण में है, लेकिन भारत ने 2030 और 2034 के खेलों के पहले से आवंटित होने के बाद, 2038 के रिक्त स्लॉट के लिए अपनी प्राथमिकता दर्ज करा दी है। इस महात्वाकांक्षी परियोजना के केंद्र में गुजरात का अहमदाबाद शहर है, जिसे संभावित मेजबान के रूप में सबसे आगे देखा जा रहा है। अहमदाबाद में विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे का तेजी से हो रहा विकास इस दावे को मजबूती प्रदान करता है, जिससे भविष्य की ओलंपिक महत्वाकांक्षाओं के लिए एक मजबूत ब्लूप्रिंट तैयार हो सके।

ऐतिहासिक रूप से, भारत का एशियाई खेलों के साथ एक गहरा नाता रहा है। देश ने 1951 में नई दिल्ली में पहले एशियाई खेलों की नींव रखी थी और इसके बाद 1982 में दोबारा शानदार आयोजन किया था। अब 56 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद इस प्रतिष्ठा को वापस लाने की कवायद शुरू हुई है। आधिकारिक प्रक्रिया के अनुसार, ओसीए का एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल जल्द ही भारत का दौरा कर सुविधाओं और व्यवहार्यता का विस्तृत मूल्यांकन करेगा। इस दौड़ में भारत को दक्षिण कोरिया के ग्वांगजू-डेगू और मंगोलिया जैसे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल सकती है, जिसका अंतिम निर्णय वर्ष 2028 तक होने की संभावना है।

भारत की यह सक्रियता उसके हालिया खेल प्रदर्शनों और आर्थिक सुदृढ़ता का प्रतिबिंब है। 2023 के एशियाई खेलों में पदकों का शतक लगाने के बाद देश के खेल तंत्र में एक अभूतपूर्व आत्मविश्वास का संचार हुआ है। 2030 राष्ट्रमंडल खेल, 2036 ओलंपिक और अब 2038 एशियाई खेलों के लिए लगाई जा रही ये बोलियां एक समन्वित रणनीति का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य भारत को वैश्विक खेल गंतव्य बनाना है। यदि भारत यह मेजबानी हासिल करने में सफल रहता है, तो यह न केवल देश के खेल बुनियादी ढांचे का कायाकल्प करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एथलीट विकास और वैश्विक छवि के नए प्रतिमान स्थापित करेगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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