MCC cricket laws : क्रिकेट के पारंपरिक ढांचे में एक बड़ा और दूरगामी बदलाव होने जा रहा है। खेल को अधिक किफायती और टिकाऊ बनाने की दिशा में मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब (MCC) ने क्रिकेट के नियमों में संशोधन की घोषणा की है, जिसके तहत उन बल्लों को भी वैध कर दिया जाएगा जिन्हें अब तक अवैध माना जाता था। यह फैसला अंग्रेजी विलो की बढ़ती कमी और बल्लों की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच खासतौर पर शौकिया और निचले स्तर के खिलाड़ियों को राहत देने के उद्देश्य से लिया गया है।

एमसीसी ने यह संशोधन क्रिकेट लॉज़ के नए संस्करण के तहत किया है, जो 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होंगे। यह बदलाव कानून 5.8 (बल्ले की श्रेणियां) से जुड़े कुल 73 संशोधनों में से एक है।

क्या बदलेगा नियमों में ?

1 अक्टूबर 2026 से खुले आयु वर्ग के मनोरंजक क्रिकेट में अब टाइप-डी लैमिनेटेड बल्लों के इस्तेमाल की अनुमति होगी। ये बल्ले अधिकतम तीन लकड़ी के टुकड़ों से बने होते हैं। इससे पहले इन बल्लों की अनुमति केवल जूनियर क्रिकेट तक सीमित थी।

लैमिनेटेड बल्लों में आमतौर पर सामने की सतह अंग्रेजी विलो की होती है, जबकि उसके पीछे कश्मीर विलो जैसी सस्ती और कम प्रदर्शन वाली लकड़ी का उपयोग किया जाता है। इससे लागत में उल्लेखनीय कमी आती है।

वहीं, टाइप-ए, बी और सी बल्ले अब भी ठोस, एक ही टुकड़े की विलो लकड़ी से बने रहेंगे और शीर्ष स्तर के क्रिकेट में इन्हीं बल्लों के उपयोग की संभावना बनी रहेगी।

निर्माताओं को भी राहत :

नए नियमों के तहत बल्ला निर्माता अब बल्ले के सामने वाले हिस्से के पीछे विलो के अलावा अन्य लकड़ियों का भी उपयोग कर सकेंगे। एमसीसी लॉज़ मैनेजर फ्रेजर स्टीवर्ट के अनुसार, इन बल्लों का व्यापक परीक्षण किया गया है और उनसे मिलने वाला प्रदर्शन लाभ “अधिकतम रूप से मामूली” पाया गया है।

उन्होंने कहा कि यह कदम खेल की प्रकृति बदले बिना उसे अधिक सुलभ और किफायती बनाने की दिशा में उठाया गया है।

बढ़ती कीमतें बनीं बदलाव की वजह :

हाल के वर्षों में अंग्रेजी विलो की उपलब्धता में कमी और दक्षिण एशिया से बढ़ती मांग के चलते बल्लों की कीमतों में तेज़ उछाल देखा गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ उच्च श्रेणी के बल्लों की कीमत लगभग 1,000 पाउंड तक पहुंच चुकी है, जो पहले की तुलना में करीब तीन गुना अधिक है।

एमसीसी का मानना है कि यह बदलाव न केवल लागत घटाने में मदद करेगा, बल्कि क्रिकेट को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में भी अहम कदम साबित होगा।

नियमों में अन्य प्रमुख संशोधन :

नए कानूनों में बल्लों के अलावा भी कई अहम बदलाव शामिल हैं:

  • क्रिकेट कानूनों से लिंग-आधारित भाषा हटाई जाएगी और भाषा को सरल बनाया जाएगा।
  • बहुदिवसीय मैचों में यदि अंतिम ओवर के दौरान विकेट गिरता है, तो ओवर पूरा किया जाएगा।
  • जूनियर और महिला क्रिकेट के लिए गेंदों के मानकीकृत आकार और वजन तय किए गए हैं।
  • ‘बनी हॉप कैच’ को नियमों से हटाया गया है।
  • जानबूझकर किए गए शॉर्ट रन और ओवरथ्रो को लेकर नियमों को और स्पष्ट किया गया है।
  • अंपायर को गेंद को ‘डेड’ घोषित करने में अधिक लचीलापन दिया गया है।

क्रिकेट के भविष्य की दिशा :

सन् 1787 से क्रिकेट के नियमों का संरक्षक रहा एमसीसी यह संकेत दे रहा है कि खेल परंपरा और आधुनिक जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह बदलाव खासकर जमीनी स्तर के क्रिकेट के लिए एक नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जिससे खेल अधिक समावेशी, किफायती और टिकाऊ बन सकेगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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