भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारों में हिम्मत सिंह का नाम अब एक ऐसे खिलाड़ी के रूप में लिया जा रहा है, जिसने अपने शांत स्वभाव और लगातार प्रदर्शन के दम पर पहचान बनाई है। 2025 के आईपीएल सीजन में लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए उनका बहुप्रतीक्षित डेब्यू इस बात का संकेत था कि लंबे इंतजार और संघर्ष के बाद यह खिलाड़ी अब बड़े मंच पर अपनी जगह पक्की करने के लिए तैयार है। घरेलू क्रिकेट में उनकी स्थिरता और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें एक भरोसेमंद बल्लेबाज़ के रूप में स्थापित किया है।

8 नवंबर 1996 को जन्मे हिम्मत सिंह ने क्रिकेट की बारीकियां दिल्ली की गलियों से सीखीं और जल्द ही अपनी प्रतिभा के दम पर दिल्ली की अंडर-16, अंडर-19 और अंडर-23 टीमों में जगह बनाई। दाएं हाथ के इस बल्लेबाज़ और ऑफ ब्रेक गेंदबाज़ ने कम उम्र में ही अपनी तकनीक और धैर्य से चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा। 2014-15 रणजी ट्रॉफी के लिए उन्हें दिल्ली की टीम में शामिल किया गया, हालांकि उस सीजन में उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला, लेकिन यह चयन उनके करियर का पहला बड़ा पड़ाव साबित हुआ।

महज 19 साल की उम्र में दिसंबर 2015 में विजय हजारे ट्रॉफी के दौरान उन्होंने लिस्ट-ए क्रिकेट में डेब्यू किया। उनके शुरुआती करियर में विवादों का साया भी पड़ा, जब उनके पिता पर चयन को लेकर आरोप लगे, लेकिन हिम्मत सिंह ने इन बाहरी परिस्थितियों से खुद को अलग रखते हुए केवल अपने खेल पर ध्यान केंद्रित किया। यही फोकस आगे चलकर उनके करियर की सबसे बड़ी ताकत बना। 14 अक्टूबर 2017 को उन्होंने रणजी ट्रॉफी में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में कदम रखा और इसके कुछ ही महीनों बाद जनवरी 2018 में टी20 प्रारूप में भी पदार्पण किया।

2018 का साल उनके करियर के लिए निर्णायक साबित हुआ, जब उन्हें एसीसी इमर्जिंग टीम्स एशिया कप के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया। इसी वर्ष आईपीएल नीलामी में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने उन्हें खरीदा, जिससे उनके करियर को एक नई दिशा मिली। हालांकि 2020 से पहले उन्हें रिलीज कर दिया गया, लेकिन इस अनुभव ने उन्हें बड़े मंच की समझ दी। इसके बाद उन्होंने घरेलू क्रिकेट में लगातार प्रदर्शन कर अपनी उपयोगिता साबित की और एक भरोसेमंद मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज़ के रूप में खुद को स्थापित किया।

समय के साथ हिम्मत सिंह न केवल एक स्थिर बल्लेबाज़ बने, बल्कि दिल्ली टीम के नेतृत्व की जिम्मेदारी भी संभाली। 2023 में उनकी कप्तानी में दिल्ली ने रणजी ट्रॉफी में मुंबई को 43 वर्षों बाद हराकर इतिहास रच दिया, जो उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बन गया। इसके अलावा 2024 में उन्होंने ईस्ट दिल्ली राइडर्स को दिल्ली प्रीमियर लीग के पहले संस्करण में चैंपियन बनाया, जिससे उनकी नेतृत्व क्षमता और मजबूत हुई।

इन सफलताओं ने उन्हें एक बार फिर आईपीएल के दरवाजे तक पहुंचाया। 2025 में लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए उन्होंने गुजरात टाइटंस के खिलाफ अपना आईपीएल डेब्यू किया और अपने प्रदर्शन से टीम का भरोसा जीता, जिसके चलते उन्हें अगले सीजन के लिए भी रिटेन किया गया। हिम्मत सिंह की कहानी इस बात का उदाहरण है कि निरंतर मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट से अंतरराष्ट्रीय मंच की ओर अपना रास्ता बना सकता है।

Pratahkal Newsroom

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