भारतीय क्रिकेट में आज दिल्ली कैपिटल्स के हेड कोच के रूप में अपनी रणनीतिक समझ और नेतृत्व क्षमता से नई पहचान बना चुके हेमंग बदानी का नाम उन खिलाड़ियों में शुमार है, जिन्होंने मैदान के अंदर और बाहर दोनों जगह अपनी छाप छोड़ी है। एक समय भारतीय टीम के भरोसेमंद मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज़ रहे बदानी आज युवा खिलाड़ियों को तराशने का काम कर रहे हैं। उनका क्रिकेट सफर इस बात का उदाहरण है कि कैसे सीमित अंतरराष्ट्रीय करियर के बावजूद निरंतर मेहनत और जुनून से कोई भी व्यक्ति खेल में अपनी अलग पहचान बना सकता है।

14 नवंबर 1976 को मद्रास में जन्मे बदानी ने घरेलू क्रिकेट में अपने प्रदर्शन के दम पर राष्ट्रीय टीम का दरवाजा खटखटाया। 2000 में बांग्लादेश के खिलाफ एशिया कप में वनडे डेब्यू करते हुए उन्होंने 35 रन बनाकर अपने करियर की सकारात्मक शुरुआत की। उसी साल वह आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2000 में उपविजेता रही भारतीय टीम का हिस्सा भी रहे। शुरुआती दौर में जिम्बाब्वे के खिलाफ घरेलू सीरीज में उन्होंने 153 रन बनाकर अपनी उपयोगिता साबित की, जिसमें दो अर्धशतक शामिल थे।

बदानी के करियर का सबसे यादगार पल 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पुणे में आया, जब उन्होंने अपना इकलौता अंतरराष्ट्रीय शतक जड़ा। इस सीरीज में उन्होंने पांच मैचों में 166 रन बनाए और खुद को एक भरोसेमंद बल्लेबाज़ के रूप में स्थापित किया। उसी साल उन्होंने जिम्बाब्वे के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया, हालांकि टेस्ट करियर ज्यादा लंबा नहीं चला और चार मैचों में 94 रन ही बना सके। वनडे में उन्होंने कुल 40 मैच खेलते हुए 867 रन बनाए, जिसमें उनका औसत 33.34 रहा।

हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका प्रदर्शन अस्थिर रहा, लेकिन घरेलू क्रिकेट में बदानी का बल्ला जमकर बोला। तमिलनाडु के लिए 1996-97 में डेब्यू करने वाले बदानी ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 6000 से ज्यादा रन बनाए, जिसमें 14 शतक शामिल हैं और उनका औसत लगभग 46 के करीब रहा। उन्होंने अपनी टीम को रणजी ट्रॉफी के फाइनल तक पहुंचाया और 2004-05 में घरेलू वनडे खिताब जिताने में कप्तान के रूप में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा उन्होंने राजस्थान, हरियाणा और विदर्भ जैसी टीमों का भी प्रतिनिधित्व किया, जिससे उनके अनुभव और विविधता का दायरा और बढ़ा।

टी20 क्रिकेट के शुरुआती दौर में बदानी ने इंडियन क्रिकेट लीग में हिस्सा लिया, जिसके चलते उन्हें कुछ समय के लिए प्रतिबंध का सामना भी करना पड़ा। बाद में वापसी करते हुए उन्होंने आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स के साथ करार किया, हालांकि उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला। लेकिन यह दौर उनके लिए सीखने और खुद को नए रूप में ढालने का अवसर साबित हुआ।

संन्यास के बाद बदानी ने कोचिंग में शानदार सफलता हासिल की। तमिलनाडु प्रीमियर लीग में चेपॉक सुपर गिलीज़ के साथ सात सीजन में चार खिताब जीतकर उन्होंने अपनी कोचिंग क्षमता का लोहा मनवाया। इसके बाद सनराइजर्स हैदराबाद के साथ फील्डिंग कोच और स्काउट की भूमिका निभाई और अंततः दिल्ली कैपिटल्स के हेड कोच बने। इसके साथ ही वह स्टार स्पोर्ट्स तमिल के लिए कमेंट्री भी करते हैं, जिससे उनका क्रिकेट से जुड़ाव लगातार बना हुआ है।

Pratahkal Newsroom

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