Women's cricket growth India : भारत का खेल परिदृश्य एक ऐतिहासिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, जहाँ महिला खिलाड़ियों ने न केवल मैदान पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, बल्कि देश की खेल संस्कृति की धुरी को भी बदल दिया है। हाल ही में 14 राज्यों में किए गए एक व्यापक सर्वेक्षण (बीबीसी द्वारा संचालित) के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि अब हर दस में से एक भारतीय महिला सक्रिय रूप से क्रिकेट खेल रही है। यह महज एक संख्या नहीं, बल्कि उन जंजीरों के टूटने की गूँज है जो दशकों से महिलाओं को खेल के मैदान से दूर रखती आई थीं। विशेष रूप से युवा पीढ़ी इस बदलाव की मशाल थामे हुए है, जिससे महिला खिलाड़ियों की सामाजिक प्रतिष्ठा में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।

क्रिकेट की पिच पर कम होता लैंगिक अंतराल :

वर्ष 2020 के मुकाबले 2026 में खेलों में महिलाओं की भागीदारी में क्रांतिकारी उछाल आया है। छह साल पहले जहाँ क्रिकेट खेलने वाले पुरुषों की संख्या महिलाओं से पांच गुना अधिक थी, वहीं आज यह अंतर घटकर महज तीन गुना रह गया है। सर्वेक्षण के अनुसार, क्रिकेट खेलने वाली 40 प्रतिशत महिलाएं सप्ताह में कम से कम एक बार मैदान पर उतरती हैं। इस गतिशीलता का मुख्य श्रेय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली शानदार सफलताओं को जाता है। मनु भाकर द्वारा 2024 पेरिस ओलंपिक में दो पदक जीतकर रचा गया इतिहास और 2025 में भारतीय महिला राष्ट्रीय क्रिकेट टीम द्वारा घरेलू जमीन पर 'आईसीसी महिला विश्व कप' की जीत ने करोड़ों युवतियों को खेल को करियर के रूप में देखने के लिए प्रेरित किया है।

भागीदारी और दर्शकों का नया समीकरण :

महिला खेलों के प्रति जनता का नजरिया भी बदल रहा है, जो डिजिटल और लाइव व्यूअरशिप के आंकड़ों में स्पष्ट झलकता है। जहाँ 63% लोग पुरुष खेलों का अनुसरण करते हैं, वहीं 51% उत्तरदाताओं ने महिला खेलों की खबरों में गहरी रुचि दिखाई है। लाइव मैचों के मामले में भी यह फासला कम हो रहा है:

  • लाइव व्यूअरशिप : 43% दर्शकों ने पिछले छह महीनों में महिलाओं के मैच लाइव देखे।
  • मैदान पर उपस्थिति : स्टेडियम जाकर मैच देखने के मामले में महिलाओं के खेल (29%) और पुरुषों के खेल (37%) के बीच का अंतर काफी कम हो गया है।
  • विविधता : क्रिकेट के साथ-साथ बैडमिंटन में भी महिलाओं की रुचि 4% से बढ़कर 6% हो गई है।

प्रगति के मार्ग में सांस्कृतिक और सामाजिक चुनौतियां :

सफलताओं के इस चमकदार दौर के बीच, यह अध्ययन एक गहरे सामाजिक विरोधाभास को भी उजागर करता है। विडंबना यह है कि जहाँ भागीदारी बढ़ी है, वहीं पारंपरिक रूढ़ियों ने भी अपनी पैठ मजबूत की है। सर्वेक्षण के अनुसार, 43% लोग अब भी महिला खेलों को पुरुषों की तुलना में 'कम मनोरंजक' मानते हैं। सबसे अधिक चिंताजनक तथ्य यह है कि लगभग आधे उत्तरदाताओं का मानना है कि महिला खिलाड़ियों के लिए 'आकर्षक और स्त्रीोचित' दिखना अनिवार्य होना चाहिए। ये विचार न केवल पुरुषों, बल्कि महिला उत्तरदाताओं में भी व्यापक रूप से पाए गए, जो दर्शाता है कि खेल कौशल से अधिक आज भी शारीरिक दिखावट को तवज्जो देने वाली सोच समाज में गहराई तक समाई हुई है।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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