भारतीय क्रिकेट के नए दौर में एक ऐसा नाम तेजी से सुर्खियों में उभरा है, जिसने अपनी दृढ़ता, तकनीक और दबाव में खेलने की क्षमता से सबका ध्यान खींचा है—ध्रुव जुरेल। दाएं हाथ के बल्लेबाज और कुशल विकेटकीपर के रूप में जुरेल ने बेहद कम समय में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी पहचान बना ली है। इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में उनका प्रदर्शन, खासकर रांची टेस्ट में खेली गई 90 रनों की जुझारू पारी और मैच जिताने वाली नाबाद 39 रन की पारी, उन्हें भारतीय टीम के भरोसेमंद युवा खिलाड़ियों में शामिल कर चुकी है।

21 जनवरी 2001 को आगरा में जन्मे जुरेल का सफर आसान नहीं रहा। उनके पिता भारतीय सेना में कार्यरत रहे और कारगिल युद्ध के अनुभवी रहे हैं। आर्थिक चुनौतियों के बीच क्रिकेट के प्रति जुरेल का जुनून लगातार बढ़ता गया। बचपन में एक दुर्घटना में उनका पैर बस के नीचे आ गया, जिसके बाद उन्हें सर्जरी से गुजरना पड़ा। बावजूद इसके उन्होंने हार नहीं मानी। उनके क्रिकेट करियर को आकार देने में उनके माता-पिता का त्याग अहम रहा, जहां पिता ने कर्ज लेकर बैट दिलाया और मां ने अपना इकलौता सोने का हार गिरवी रखकर उनका क्रिकेट किट तैयार कराया।

स्कूल के समर कैंप से शुरू हुआ क्रिकेट का यह सफर जल्द ही गंभीर प्रशिक्षण में बदल गया, जब जुरेल ने नोएडा की क्रिकेट अकादमी में जाकर अभ्यास शुरू किया। उत्तर प्रदेश के लिए अंडर-14, अंडर-16 और अंडर-19 स्तर पर खेलने के दौरान उनकी प्रतिभा निखरकर सामने आई। 2019 एशिया कप में टीम की कप्तानी और 2020 अंडर-19 विश्व कप में उपकप्तान की भूमिका ने उनके नेतृत्व कौशल को भी उजागर किया। जनवरी 2021 में उन्होंने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में टी20 डेब्यू किया और फरवरी 2022 में रणजी ट्रॉफी में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में कदम रखा, जहां नागालैंड के खिलाफ 249 रनों की विशाल पारी ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया।

इंडियन प्रीमियर लीग ने जुरेल के करियर को नई दिशा दी। 2022 में राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें खरीदा, हालांकि उन्हें उस सीजन खेलने का मौका नहीं मिला। लेकिन 2023 में पंजाब के खिलाफ डेब्यू मैच में 15 गेंदों पर नाबाद 32 रन की तेज पारी ने उन्हें टीम में स्थायी स्थान दिलाया। उस सीजन में उन्होंने 11 पारियों में 152 रन 172.72 के प्रभावशाली स्ट्राइक रेट से बनाए। 2025 सीजन में उनका प्रदर्शन और निखरा, जहां उन्होंने 14 मैचों में 333 रन बनाए और टीम के भरोसेमंद फिनिशर बनकर उभरे।

जनवरी 2024 में उन्हें पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में जगह मिली और राजकोट में इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने 46 रनों की सधी हुई पारी खेली। इसके बाद रांची टेस्ट में उनका प्रदर्शन निर्णायक साबित हुआ, जहां उन्होंने पहली पारी में 149 गेंदों पर 90 रन बनाकर टीम को संभाला और दूसरी पारी में शुभमन गिल के साथ महत्वपूर्ण साझेदारी करते हुए भारत को जीत दिलाई। अपने दूसरे ही टेस्ट में प्लेयर ऑफ द मैच बनना उनके आत्मविश्वास और क्षमता का प्रमाण था। इसके अलावा भारत ए के लिए खेलते हुए उन्होंने ऑस्ट्रेलिया ए और साउथ अफ्रीका ए के खिलाफ 140, 132 नाबाद और 127 नाबाद जैसी पारियां खेलकर चयनकर्ताओं को प्रभावित किया।

2025 में उन्हें दलीप ट्रॉफी के लिए सेंट्रल जोन का कप्तान नियुक्त किया गया, जो उनके बढ़ते कद को दर्शाता है। आईपीएल 2026 से पहले राजस्थान रॉयल्स द्वारा 14 करोड़ रुपये में रिटेन किया जाना उनके महत्व को साबित करता है। ध्रुव जुरेल की कहानी केवल एक खिलाड़ी की सफलता नहीं, बल्कि संघर्ष, त्याग और अटूट विश्वास की मिसाल है, जिसने उन्हें भारतीय क्रिकेट के भविष्य का चमकता सितारा बना दिया है।

Pratahkal Newsroom

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