मैदान पर बेटियों का दबदबा; पिछले 5 वर्षों में भारतीय क्रिकेट में महिलाओं की भागीदारी हुई दोगुनी
भारतीय महिला क्रिकेट में ऐतिहासिक उछाल! बीबीसी के अध्ययन के अनुसार 5 साल में महिला क्रिकेटरों की संख्या हुई दोगुनी। हर चौथी युवती खेल को मान रही करियर विकल्प।

Indian cricket
Women in Sports Statistics 2026 : भारतीय खेल जगत के इतिहास में एक ऐसा क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहा है, जिसने न केवल पारंपरिक रूढ़ियों को तोड़ा है, बल्कि क्रिकेट को पुरुषों के एकाधिकार वाले खेल से बाहर निकालकर एक साझा जुनून बना दिया है। 10,000 से अधिक महिलाओं पर किए गए एक व्यापक अध्ययन के अनुसार, भारत के 14 राज्यों में महिलाओं की भागीदारी साल 2020 के मुकाबले दोगुनी हो चुकी है। यह आंकड़े केवल खेल के प्रति बढ़ती रुचि को नहीं, बल्कि एक नए भारत की उस तस्वीर को पेश करते हैं जहाँ बल्ले और गेंद की चमक बेटियों के सपनों को नई उड़ान दे रही है।
आंकड़ों की जुबानी : क्रिकेट की पिच पर बदलता गणित
सर्वेक्षण के परिणाम चौंकाने वाले और उत्साहजनक हैं। साल 2020 में जहाँ क्रिकेट खेलने वाली महिलाओं की हिस्सेदारी महज 5 प्रतिशत थी, वह अब बढ़कर 10 प्रतिशत तक पहुँच गई है। युवा पीढ़ी में यह क्रेज और भी अधिक प्रभावशाली है; 15 से 24 वर्ष के आयु वर्ग में भागीदारी 6 प्रतिशत से बढ़कर सीधे 16 प्रतिशत हो गई है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि क्रिकेट ने भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय तक राज करने वाले पारंपरिक खेल 'कबड्डी' को भी बड़े अंतर से पीछे छोड़ दिया है। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में तो महिला क्रिकेट की भागीदारी में 10 गुना का ऐतिहासिक उछाल देखा गया है, जो 1 प्रतिशत से बढ़कर 10 प्रतिशत हो गया है।
सफलता की गूंज और करियर के प्रति बढ़ता रुझान :
भारतीय महिला क्रिकेट टीम के हालिया अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन ने इस आग में घी का काम किया है। टीम की पहली वनडे विश्व कप जीत और लगभग एक दशक बाद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी20 श्रृंखला में ऐतिहासिक सफलता ने देश की लाखों बेटियों को प्रेरित किया है। आज स्थिति यह है कि:
- लिंगानुपात में सुधार: 2020 में 5 पुरुषों पर 1 महिला खिलाड़ी थी, जो अब सुधरकर 3 पुरुषों पर 1 महिला के अनुपात पर आ गया है।
- करियर विकल्प: 15 से 24 वर्ष की प्रत्येक चार में से एक युवती (करीब 26%) अब खेल को एक गंभीर करियर विकल्प के रूप में देख रही है।
- अग्रणी राज्य: करियर के लिहाज से तमिलनाडु (27%), मध्य प्रदेश (19%) और मेघालय (19%) की युवतियां सबसे अधिक उत्साहित हैं।
चुनौतियां और सुरक्षा की चिंताएं :
हालाँकि प्रगति के ये आंकड़े सुखद हैं, लेकिन अध्ययन का एक पहलू जमीनी चुनौतियों की ओर भी इशारा करता है। सर्वेक्षण में पाया गया कि जो महिलाएं खेलों में सक्रिय नहीं हैं, उनमें से 13 प्रतिशत ने 'सुरक्षा संबंधी चिंताओं' को सबसे बड़ी बाधा बताया है। कलेक्टिव न्यूजरूम की प्रधान संपादक रूपा झा का मानना है कि भागीदारी और दर्शकों की संख्या बढ़ने के बावजूद व्यावहारिक चुनौतियां और रूढ़िवादी सोच अब भी बरकरार हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि यह डेटा नीति निर्माताओं को महिला खिलाड़ियों के लिए अधिक सुरक्षित और सहायक वातावरण तैयार करने के लिए प्रेरित करेगा।
भारतीय महिला क्रिकेट अब केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुका है। यदि सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं का सही समाधान निकाला जाए, तो वह दिन दूर नहीं जब भारतीय क्रिकेट के आसमान पर महिलाओं का सितारा पुरुषों के बराबर ही चमकता नजर आएगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
